केंद्र ने SC में चार नए जजों की नियुक्ति को दी मंजूरी, इसी हफ्ते लेंगे पद व गोपनीयता की शपथ

केंद्र सरकार ने मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाले कॉलेजियम की सिफारिशें स्वीकार करते हुए सुप्रीम कोर्ट में चार नए जजों की नियुक्ति को मंजूरी दे दी है. CJI रंजन गोगोई से पहले किसी मुख्य न्यायाधीश ने 8 महीने के कार्यकाल में नहीं कराई 10 जजों की नियुक्ति.

News18Hindi
Updated: May 22, 2019, 6:09 PM IST
केंद्र ने SC में चार नए जजों की नियुक्ति को दी मंजूरी, इसी हफ्ते लेंगे पद व गोपनीयता की शपथ
सीजेआई रंजन गोगोई 8 महीने से कम के कार्यकाल में 10 जजों को दिलाएंगे पद व गोपनीयता की शपथ.
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Updated: May 22, 2019, 6:09 PM IST
देश के मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई अपने आठ महीने से कम के कार्यकाल में सुप्रीम कोर्ट के 10 जजों को पद व गोपनीयता शपथ दिला देंगे. उनसे पहले किसी सीजेआई ने ऐसा नहीं किया है. यही नहीं, चार नए जजों की नियुक्ति के बाद पिछले कुछ दशकों में पहली बार सुप्रीम कोर्ट में 31 जज हो जाएंगे. दरअसल, केंद्र सरकार ने बुधवार को सीजेआई की अध्यक्षता वाले कॉलेजियम की सिफारिशें स्वीकार करते हुए सुप्रीम कोर्ट में चार नए जजों की नियुक्ति की मंजूरी दे दी है.

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने भी जस्टिस बीआर गवई, जस्टिस सूर्य कांत, जस्टिस अनिरुद्ध बोस और जस्टिस एएस बोपन्ना की नियुक्ति को अधिसूचित कर दिया है. उम्मीद की जा रही है कि चारों जज गुरुवार या शुक्रवार को पद व गोपनीयता की शपथ लेंगे.



केंद्र ने 48 घंटे में मंजूर की कॉलेजियम की सिफारिश 

सीजेआई रंजन गोगोई ने 3 अक्टूबर, 2018 को पदभार संभाला था. इसके बाद 30 अक्टूबर, 2018 को उनकी अगुवाई में कॉलेजियम ने सुप्रीम कोर्ट में जजों की नियुक्ति को लेकर पहली सिफारिश की. केंद्र ने 48 घंटे के अंदर जस्टिस हेमंत गुप्ता, जस्टिस सुभाष रेड्डी, जस्टिस एमआर शाह और जस्टिस अजय रस्तोगी की नियुक्ति को मंजूरी दे दी.

सरकार की तेजी पर सीजेआई ने जताया था आश्चर्य 

इससे पहले जस्टिस जोसेफ की नियुक्ति में हो रही देरी के कारण सरकार और न्यायपालिका में टकराव की स्थिति पैदा हो गई थी. छह महीने तक चली खींचतान के बाद केंद्र सरकार ने अगस्त, 2018 में उनकी सुप्रीम कोर्ट में नियुक्ति पर अपनी मुहर लगाई थी. इसके बाद केंद्र की ओर से सिफारिशों पर इतनी तेजी से लिए गए फैसले पर सीजेआई रंजन गोगोई ने आश्चर्य जताया था. कॉलेजियम ने जनवरी, 2019 में जस्टिस दिनेश माहेश्वरी और जस्टिस संजीव खन्ना की शीर्ष अदालत में नियुक्ति की सिफारिश की. इस बार फिर सरकार ने तेजी दिखाई और 16 जनवरी को दोनों जजों की नियुक्ति को मंजूरी दे दी.

केंद्र ने लौटा दिए जस्टिस बोस और बोपन्ना के नाम 
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इन सभी नियुक्तियों के बाद सुप्रीम कोर्ट में चार पद खाली रह गए थे, क्योंकि शीर्ष अदालत में जजों के 31 पद हैं. कॉलेजियम ने 12 अप्रैल को जस्टिस बोस और जस्टिस बोपन्ना के नाम केंद्र सरकार को भेजे. केंद्र ने 7 मई को दोनों के नाम कॉलेजियम को वापस भेजते हुए कहा कि वरिष्ठता के आधार पर इन पर फिर विचार किया जाए.

कॉलेजियम ने पुराने दो के साथ दो नए नाम भी भेजे 

10 मई को कॉलेजियम में शामिल सीजेआई और चार सबसे वरिष्ठ जजों ने फिर से दोनों के नाम सरकार को भेज दिए. साथ ही जस्टिस सूर्य कांत और जस्टिस गवई का नाम भी शामिल कर दिया. केंद्र ने 22 मई को चारों जजों की सुप्रीम कोर्ट में नियुक्ति पर मुहर लगा दी. इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट में जजों के सभी पदों पर नियुक्तियां भी पूरी हो गई.

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