जब अटल बिहारी वाजपेयी ने ठुकरा दिया था भारत रत्न

अटल बिहारी वाजपेयी (फाइल फोटो)

अटल बिहारी वाजपेयी (फाइल फोटो)

वरिष्ठ पत्रकार अशोक टंडन के मुताबिक पार्टी के कई वरिष्ठ नेता ये चाहते थे कि पीएम को करगिल विजय के बाद भारत रत्न से सम्मानित किया जाना चाहिए.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 25, 2019, 9:04 PM IST
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पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी 27 मार्च, 2015 को देश के सर्वोच्च सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किया गया था. तत्‍कालीन राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी कि उपस्थिति में उन्हें ये पुरस्कार दिया गया था. लेकिन क्या आप ये जानते हैं कि इससे पहले भी एक अटल को भारत रत्न देने की मांग उठी थी लेकिन उन्होने खुद ही इसे सिरे से ख़ारिज कर दिया था.



क्यों अटल ने भारत रत्न नहीं लिया था?

अटल ने बस से लाहौर जाकर भारत-पाकिस्तान के रिश्तों में एक नया अध्याय शुरू करना चाहा था. हालांकि परवेज़ मुशर्रफ ने करगिल में घुसपैठ कराकर भारत की पीठ में खंजर घोपने का कम किया. बहरहाल करगिल में युद्ध हुआ और भारतीय सेना ने इसमें जीत हासिल की. कारगिल के बाद हुए चुनावों में बीजेपी ने जीत हासिल की और अटल बिहारी वाजपेयी तीसरी बार देश के प्रधानमंत्री चुने गए.



अटल बिहारी वाजपेयी के मीडिया सलाहकार रहे वरिष्ठ पत्रकार अशोक टंडन के मुताबिक पार्टी के कई वरिष्ठ नेता ये चाहते थे कि पीएम को करगिल विजय के बाद भारत रत्न से सम्मानित किया जाना चाहिए. अटल से भी कहा गया कि जवाहरलाल नेहरू और इंदिरा गांधी ने भी प्रधानमंत्री रहते हुए खुद को भारत रत्न दिलवाया था और उन्हें भी ऐसा ही करना चाहिए. अटल ने जब ये बात सुनी तो बिना किसी झिझक ने उन्होंने इससे साफ़ इनकार कर दिया.






अटल ने क्या कहा था ?

दरअसल अटल उस दौरान भी राजनीति में अपनी साफगोई के लिए जाने जाते थे. अटल ने इस प्रस्ताव पर भी स्पष्ट कर दिया कि ये बिलकुल अनुचित है कि अपनी खुद की सरकार में उन्हें 'भारत रत्न' से सम्मानित किया जाए. यहां तक कि अटल के इनकार करने के बावजूद उनकी कैबिनेट के कुछ मंत्रियों ने योजना बनाई कि जब पीएम किसी विदेश दौरे पर होंगे तो उन्हें भारत रत्न देने की घोषणा करवा दी जाएगी. हालांकि अटल को इस बात की वक़्त रहते सूचना मिल गई और उन्होंने इन सभी मंत्रियों को सख्ती से डांट लगाते हुए ऐसा कुछ भी न करने की सलाह दी.



अटल को कई सम्मानों से नवाज़ा गया

भारत रत्न से पहले भी अटल बिहारी वाजपेयी को कई पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है. 1992 में उन्हें पद्म विभूषण, 1994 में लोकमान्य तिलक पुरस्कार, 1994 में श्रेष्ठ सांसद पुरस्कार और 1994 में ही गोविंद वल्लभ पंत पुरस्कार से नवाजा गया. वाजपेयी तीन बार देश के प्रधानमंत्री बने थे. पहली बार 16-31 मई, 1996, इसके बाद 19 मार्च 1998 से 13 मई 2004 तक और इसके बाद 1999 से लेकर 2004 तक.



अटल पहले गैरकांग्रेसी प्रधानमंत्री बने जिन्होंने पूरे 5 साल तक सरकार चलाई. 26 पार्टियों के साथ सरकार चलाने वाले वह देश के पहले प्रधानमंत्री थे. अटल बिहारी वाजपेयी रिकॉर्ड 9 बार लोकसभा के लिए चुने गए, जबकि दो बार वह राज्यसभा के लिए चुने गए. वो एक मात्र ऐसे नेता थे, जो चार राज्य यूपी, एमपी, गुजरात और दिल्ली से चुनकर संसद में पहुंचे थे.
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