सबरीमाला विवाद पर सुनवाई के लिए सीजेआई एसए बोबडे ने क्‍यों बनाई 9 जजों की संविधान पीठ

सबरीमाला विवाद पर सुनवाई के लिए सीजेआई एसए बोबडे ने क्‍यों बनाई 9 जजों की संविधान पीठ
सुप्रीम कोर्ट के मुख्‍य न्‍यायाधीश एसए बोबडे ने सबरीमाला विवाद पर सुनवाई के लिए 9 सदस्‍यीय सविधान पीठ ही क्‍यों बनाई.

सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के मुख्‍य न्‍यायाधीश एसए बोबडे (CJI SA Bobde) ने केरल के सबरीमाला में भगवान अय्यपा के मंदिर में महिलाओं के प्रवेश पर विवाद (Sabarimala Dispute) के मामले की सुनवाई के लिए बनाई 9 सदस्‍यीय संविधान पीठ (Constitution Bench) के लिए सभी नए जजों को चुना है. सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश को मंजूरी देने वाली पीठ के भी किसी सदस्‍य को नई पीठ में शामिल नहीं किया गया है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 13, 2020, 1:40 PM IST
  • Share this:
उत्‍कर्ष आनंद

नई दिल्‍ली. सुप्रीम कोर्ट के मुख्‍य न्‍यायाधीश एसए बोबडे (CJI SA Bobde) की अध्‍यक्षता वाली 9 सदस्‍यीय संविधान पीठ अगले कुछ दिन सबरीमाला जैसे मंदिरों (Temples), मस्जिदों (Mosques), पारसी मंदिरों (Parasi Temples) और अन्‍य पूजास्‍थलों (Places of Worship) में महिलाओं के प्रवेश को लेकर सुनवाई करेगी. इसके बाद आस्‍था और विश्‍वास को संविधान के तहत परिभाषित करेगी. पीठ में मुख्य न्यायाधीश एसए बोबडे के अलावा जस्टिस आर. भानुमति, अशोक भूषण, एल. नागेश्वर राव, मोहन एम. शांतनगौदर, एस. अब्दुल नजीर, आर. सुभाष रेड्डी, बीआर गवई और सूर्यकांत शामिल हैं.

सीजेआई ने 9 सदस्‍यीय पीठ में सभी नए जज किए शामिल
सीजेआई बोबडे ने केरल के सबरीमाला में भगवान अय्यपा के मंदिर में महिलाओं के प्रवेश पर विवाद (Sabarimala Dispute) के मामले की सुनवाई के लिए बनाई 9 सदस्‍यीय संविधान पीठ (Constitution Bench) में सभी नए जजों को चुना है. सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश को मंजूरी देने वाली पीठ के भी किसी सदस्‍य को नई पीठ में शामिल नहीं किया गया है. सबरीमाला विवाद को लेकर दायर पुनर्विचार याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान त्‍तकालीन सीजेआई रंजन गोगोई की अध्‍यक्षता वाली पांच सदस्‍यीय पीठ ने 2 के मुकाबले 3 के बहुमत से मामला बड़ी बेंच को भेजने का फैसला लिया था. बहुमत का मानना था कि शीर्ष अदालत सबरीमाला मंदिर में ही महिलाओं के प्रवेश तक सीमित नहीं रह सकती. जरूरत है कि कोर्ट मस्जिदों और पारसी मंदिरों में भी ऐसी पाबंदियों पर सुनवाई कर फैसला ले.
बेंच बनाने के लिए सुप्रीम कोर्ट के नियमों का किया इस्‍तेमाल


पांच सदस्‍यीय पीठ के दो जजों का मानना था कि हर उम्र की महिला को सबरीमाला मंदिर में प्रवेश के आदेश में कुछ भी गलत नहीं है. मंदिर में हर उम्र की महिलाओं को प्रवेश मिलना ही चाहिए. हालांकि, बहुमत का मानना था कि मामला बड़ी बेंच को भेजा जाना चाहिए. सामान्‍य तौर पर जब पांच सदस्‍यीय पीठ किसी मामले को बड़ी बेंच को भेजती है तो 9 नहीं 7 जजों की बेंच सुनवाई करती है. इस मामले में सीजेआई बोबडे ने सुप्रीम कोर्ट नियम, 2013 के आदेश 6 नियम 1 के तहत मिले अधिकारों का इस्‍तेमाल करते हुए ऐसे सभी मामलों की एकसाथ सुनवाई के लिए 9 जजों की पीठ का गठन किया. अब सवाल उठता है कि सीजेआई ने ये फैसला क्‍यों लिया. इसका जवाब 14 नवंबर 2019 के फैसले में ही मिल जाएगा कि सीजेआई ने मामले की सुनवाई के लिए पहले 7 जजों की संविधान पीठ बनाने के बजाय 9 सदस्‍यीय बेंच क्‍यों बनाई.

पांच जजों की पीठ ने दो फैसलों में विसंगतियों का दिया हवाला
पांच सदस्‍यीय पीठ ने बहुमत के फैसले में शीर्ष न्यायालय की दो संविधान पीठ के फैसलों के बीच विसंगतियों का हवाला दिया था, जिनमें एक फैसला सात जजों और दूसरा पांच जजों की बेंच ने लिया था. एक सात सदस्‍यीय पीठ ने 1954 में मद्रास बनाम शिरूर मठ के श्री लक्षमिंद्र तीर्थ स्‍वामी मामले में कहा था कि किसी धर्म के जरूरी धार्मिक प्रचलनों को तय करने का काम उस संप्रदाय पर ही छोड़ देना चाहिए. वहीं, एक पांच सदस्‍यीय पीठ ने अजमेर बनाम सईद हुसैन अली व अन्‍य के मामले में 1962 में दिए फैसले में अदालत की भूमिका की गुंजाइश निकाली थी. तब कोर्ट ने कहा था कि संविधान पीठ हस्‍तक्षेप से वर्जित माने जाने वाले धर्मनिरपेक्ष चलन या अंधविश्‍वास को जरूरी धार्मिक प्रचलनों से अलग कर सकती है. ऐसे में सबरीमाला मामले पर सुनवाई करते हुए बहुमत ने कहा था कि मौजूदा मामले को दोनों से बड़ी बेंच को भेजा जाना चाहिए.

अनुच्‍छेद-25 और 26 से जुड़े सभी मामलों पर लग जाएगा विराम
तत्‍कालीन सीजेआई रंजन गोगोई अध्‍यक्षता वाली पांच सदस्‍यीय पीठ ने कहा था कि बड़ी बेंच चाहे तो धार्मिक अभ्‍यास और प्रचार जैसे संवैधानिक और मौलिक मुद्दों पर भी विचार कर सकती है. साथ ही जोर देकर कहा था, 'विभिन्‍न धर्मों से जुड़े ऐसे ही कई मामलों को देखते हुए यह समय की मांग है कि सुप्रीम कोर्ट पूर्ण न्‍याय करे और संवैधानिक सिद्धांतों के तहत आधिकारिक फैसला ले. लिहाजा, पीठ में सात जजों से कम सदस्‍य नहीं होने चाहिए. बड़ी बेंच का फैसला संविधान के अनुच्‍छेद-25 और 26 (धार्मिक अभ्‍यास का अधिकार) से जुड़े सभी मामलों पर विराम लगा देगा. साथ ही ऐसे निर्णायक फैसले से लोगों में भरोसा भी बढ़ेगा. ऐसा फैसला लोगों के दृष्टिकोण में स्थिरता सुनिश्चित कर सकता है. न्‍याय व्‍यवस्‍था से जुड़े लोग कह सकते थे कि शिरूर मठ मामले में सात जजों की बेंच के फैसले पर नौ सदस्‍यीय पीठ ही पुनर्विचार कर सकती है. साथ ही सीजेआई बोबडे भविष्‍य के लिए सभी मामलों को निपटाना चाहते थे. ऐसे में उन्‍होंने 9 जजों की बेंच गठित करने का फैसला लिया.

ये भी पढ़ें:

सबरीमाला विवाद: सभी धर्मों के ऐसे मामलों को एकसाथ सुनेगी SC की संविधान पीठ

मोदी सरकार का बड़ा कदम, हज में यह सुविधा देने वाला भारत दुनिया का पहला देश

 

 
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज

corona virus btn
corona virus btn
Loading