सूरत में आगजनी के बाद कोचिंग सेंटर्स पर जड़े ताले तो श्मशान घाट में लगाई जा रही हैं क्लासेज

गुजरात के सूरत में एक कोचिंग सेंटर में आग लगने से 22 बच्चों की मौत के बाद हजारों सेंटर्स बंद कर दिए गए हैं. ऐसे में कोचिंग सेंटर्स ने श्मशान, पार्क और सरकारी दफ्तरों के खाली हिस्सों में क्लास लगानी शुरू कर दी हैं.

News18Hindi
Updated: June 5, 2019, 2:53 PM IST
सूरत में आगजनी के बाद कोचिंग सेंटर्स पर जड़े ताले तो श्मशान घाट में लगाई जा रही हैं क्लासेज
सूरत में एक कोचिंग सेंटर में आगजनी की घटना के बाद गुजरात सरकार की फायर सेफ्टी मानकों को लेकर सख्ती के बाद हजारों सेंटर्स बंद हो गए हैं.
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Updated: June 5, 2019, 2:53 PM IST
गुजरात के पार्कों में आम लोगों की चहल-पहल और छोटे बच्चों के शोर के बजाय मैथ्स, फिजिक्स व केमिस्ट्री के फॉर्मूले सुनाई दे रहे हैं. दफ्तरों के खाली हिस्सों में पसरा सन्नाटा बच्चों के सवालों और टीचर्स के जवाबों से गुलजार हो गया है. दरअसल सूरत के कोचिंग सेंटर में आगजनी की घटना के बाद से गुजरात सरकार सख्त हो गई है. फायर सेफ्टी मानकों को लेकर सरकार की सख्ती के कारण राज्य के हजारों कोचिंग सेंटर्स पर ताले जड़ गए हैं.

ऐसे में कोचिंग सेंटर चलाने वाले लोग श्मशान घाट तक में क्लासेज लगा रहे हैं. सरकारी दफ्तरों के खाली हिस्सों, शहरों के पार्कों में कोचिंग सेंटर्स के कब्जे का नजारा आम हो गया है. हालांकि, विभिन्न शहरों में नगर निगम ने फायर सेफ्टी नियमों के मानकों पर फिट बैठने वाले सेंटर्स को नो-ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट जारी कर दिया है. बता दें कि सूरत के सरथना में एक इमारत की तीसरी मंजिल पर चल रहे कोचिंग सेंटर में लगी भीषण आग से 22 बच्चों की मौत हो गई थी.

जरूरी फायर सेफ्टी उपकरणों के बाद भी एनओसी नहीं
एक कोचिंग सेंटर के मालिक ने बताया कि मैंने सेंटर में सभी जरूरी फायर सेफ्टी उपकरण लगाए हुए हैं. इसके बावजूद सूरत की घटना के बाद सेंटर को बंद कर दिया गया है. नगरपालिका और कलेक्ट्रेट का कहना है कि सेंटर को नो-ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट जारी नहीं किया जा सकता है. टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने बताया कि ऐसे में कुछ दिनों तक कलेक्ट्रेक्ट कम्पाउंड के लॉन में क्लास लगानी पड़ी.

श्मशान में क्लास लेने को मजबूर
उन्होंने आगे बताया कि मुझे ऐसा करने से रोका गया और नहीं मानने पर धारा-144 का उल्लंघन करने के आरोप में मुझे और स्टूडेंट्स को हिरासत में लेने की चेतावनी दी गई. इसके बाद हमें एक मैदान में क्लास लगाने को मजबूर होना पड़ा, लेकिन गर्मी की वजह से वहां बैठना मुश्किल हो गया. इसके बाद श्मशान में क्लास लेने को मजबूर होना पड़ा, लेकिन इस पर पैरंट्स ने आपत्ति जताई.

कोचिंग संचालकों के पास कोई विकल्प नहीं
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इसी तरह अहमदाबाद में इंस्टिट्यूट चलाने वाले मनोरम यादव ने बताया, 'कोचिंग संचालकों के पास कोई विकल्प नहीं बचा है. वे खाली जगहों पर बच्चों को पढ़ाने के लिए मजबूर हैं. फायर सेफ्टी मानकों को पूरा करने के बावजूद सेंटर्स पर ताला लटका दिया गया है.' अकेले अहमदाबाद में ही 2400 से अधिक ट्यूशन क्लासेज़ हैं, जिन्हें सूरत की घटना के बाद सील कर दिया गया है.

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First published: June 5, 2019, 2:41 PM IST
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