क्‍यों निर्भया के एक दोषी ने फांसी से बचने के लिए किया जेसिका लाल हत्‍याकांड का जिक्र?

क्‍यों निर्भया के एक दोषी ने फांसी से बचने के लिए किया जेसिका लाल हत्‍याकांड का जिक्र?
निर्भया गैगरेप और मर्डर केस में दोषियों को फांसी देने की कोर्ट ने तारीख तय कर दी है (Demo Pic)

सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में दायर क्‍यूरेटिव पिटिशन में निर्भया गैंगरेप और हत्‍या मामले में दोषी विनय कुमार शर्मा ने कहा कि न्‍याय व्‍यवस्‍था गरीब होने के कारण उससे पक्षपात कर रही है, जबकि जेसिका लाल (Jessica Lall) की बिना किसी उकसावे के जघन्‍य हत्‍या (Brutal Murder) करने वाले सिद्धार्थ वशिष्‍ठ उर्फ मनु शर्मा (Manu Sharma) को सिर्फ उम्रकैद की सजा दी गई. विनय ने मामले की खुली अदालत (Open Court) में दोबारा सुनवाई (Rehearing) की मांग की है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 9, 2020, 5:04 PM IST
  • Share this:
नई दिल्‍ली. निर्भया गैंगरेप और हत्‍या मामले (Nirbhaya Gangrape and Murder Case) में दोषी विनय कुमार शर्मा ने आरोप लगाया है कि देश की न्‍याय व्‍यवस्‍था गरीब होने के कारण उसके साथ पक्षपात (Bias) कर रही है. विनय ने सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में क्‍यूरेटिव पिटिशन दायर कर मामले की ओपन कोर्ट में दोबारा सुनवाई की मांग की है. साथ ही कहा है कि सुप्रीम कोर्ट के वरिष्‍ठतम जज मामले की सुनवाई करें. विनय ने याचिका में कहा है कि जेसिका लाल (Jessica Lall) की बिना किसी उकसावे के जघन्‍य हत्‍या करने वाले सिद्धार्थ वशिष्‍ठ उर्फ मनु शर्मा (Manu Shrama) को फांसी के बजाय उम्रकैद (Life Imprisonment) की सजा दी गई, जबकि गरीब होने के कारण उसे मौत की सजा दी गई है.

याची ने अपराधिक न्‍याय व्‍यवस्‍था के पक्षपाती होने का लगाया आरोप
याचिका में कहा गया है, 'जेसिका लाल की हत्‍या के मामले में दोषी मनु शर्मा ताकतवर राजनीतिक परिवार से था. अपराधिक न्‍याय व्‍यवस्‍था (Criminal Justice System) में पक्षपात के कारण ही याची और लाल मर्डर केस के दोषी के फैसलों में असमानता है. दोनों मामलों के फैसलों से साफ है कि कमजोर और गरीब हमेशा सताया जाता है. गरीब (Poor) को सबसे कठोर सजा सुनाई जाती है.' याचिका में कहा गया है कि दूसरे वर्गों के अपराध कितने भी घृणित और बर्बर क्‍यों न हों, उन्‍हें कम सजा दी जाती है. ये गरीबों को लेकर न्‍याय व्‍यवस्‍था का पक्षपातपूर्ण रवैया है. गरीबों के मामलों में पूर्वाग्रह से फैसले लिए जाते हैं. बता दें कि दिल्‍ली की विशेष अदालत ने मामले में दोषी मुकेश, पवन गुप्‍ता, विनय शर्मा और अक्षय कुमार सिंह का डेंथ वारंट (Death Warrants) जारी कर दिया है. इन सभी को 22 जनवरी की सुबह 7 बजे तिहाड़ जेल में फांसी दी जाएगी.

क्‍यूरेटिव पिटिशन में कहा - बदल दिए गए मौत की सजा के मायने



क्‍यूरेटिव पिटिशन (Curative Petition) में विनय ने कहा कि अपराध के समय उनकी युवावस्था को विषम परिस्थिति के रूप में गलत तरीके से खारिज कर दिया गया है. कानून के लिहाज से लिया गया फैसला बहुत खराब है, क्‍योंकि इसके बाद सुप्रीम कोर्ट की ओर से सुनाए गए निर्णयों ने देश में मौत की सजा के मायने ही बदल दिए. मेरे जैसे कई दोषी मौत की सजा के उम्रकैद में तब्‍दील होने का इंतजार कर रहे थे. सुप्रीम कोर्ट ने 2017 में चारों दोषियों के खिलाफ फैसला दिया था. इसके बाद कम से कम 17 रेप व मर्डर के मामलों में सुप्रीम कोर्ट की अलग-अलग तीन सदस्‍यीय पीठों ने दोषियों को मौत की सजा दी है. बता दें कि 16 दिसंबर, 2012 की रात दिल्‍ली में छह लोगों ने 23 साल की पैरामेडिकल स्‍टूडेंट के साथ चलती बस में रेप किया और सड़क पर फेंक दिया.



सुप्रीम कोर्ट ने 2017 में दिए फैसले में बरकरार रखी थी मौत की सजा
निर्भया की 29 दिसंबर, 2012 को इलाज के दौरान सिंगापुर (Singapore) के माउंट एलिजाबेथ हॉस्पिटल में मौत हो गई. सुप्रीम कोर्ट ने 9 जुलाई, 2018 को अन्‍य तीन दोषियों की पुनर्विचार याचिका (Review Pleas) को खारिज कर दिया था. कोर्ट ने कहा था कि याचिका में फैसले पर पुनर्विचार का कोई आधार नहीं दिया गया है. मामले में आरोपी राम सिंह ने कथित तौर पर तिहाड़ जेल (Tihar Jail) में आत्‍महत्‍या कर ली थी. एक नाबालिग (Juvenile) आरोपी को जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड ने दोषी ठहराते हुए तीन साल के लिए सुधार गृह (Reformation Home) भेज दिया था. शीर्ष अदालत ने 2017 में दिए फैसले में दिल्‍ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) और निचली अदालत (Trial Court) की ओर से दी गई मौत की सजा (Capital Punishment) को बरकरार रखा था.

ये भी पढ़ें:-

ममता बनर्जी ने कांग्रेस-वामदल पर लगाए ये आरोप, विपक्ष की बैठक से किया किनारा
क्‍या आदित्‍य महाराष्‍ट्र में ठाकरे परिवार-शिवसेना की पकड़ कर पाएंगे और मजबूत?
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज

corona virus btn
corona virus btn
Loading