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बीजेपी महासचिव राम माधव ने हिटलर और मुसोलिनी को क्‍यों बताया लोकतंत्र की उपज?

News18Hindi
Updated: January 17, 2020, 3:36 PM IST
बीजेपी महासचिव राम माधव ने हिटलर और मुसोलिनी को क्‍यों बताया लोकतंत्र की उपज?
बीजेपी के महासचिव राम माधव ने रायसीना डायलॉग में कहा कि आलोचना स्‍वीकार है, लेकिन हिंसा किसी भी तरह से ठीक नहीं है.

बीजेपी महासचिव राम माधव (Ram Madhav) ने कहा कि नगारिकता संशोधन कानून 2019 (CAA 2019) किसी के खिलाफ नहीं है. देश का संविधान (Constitution) बहुत ही शानदार है और हम सभी उससे बंधे हुए हैं. भारतीय लोकतंत्र लगातार आगे बढ़ते हुए परिपक्‍व होता रहेगा. उन्‍होंने CAA के विरोध पर कहा कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया की दुहाई देने वालों ने सड़कों को लोकतंत्र (Democracy) का मंच बनाकर हिंसा की. लोकशाही समय के साथ ही मजबूत होती है.

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  • Last Updated: January 17, 2020, 3:36 PM IST
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नई दिल्‍ली. नागरिकता संशोधन कानून 2019 (CAA 2019) के खिलाफ पूरे देश में विरोध का सिलसिला जारी है. इस बीच, बीजेपी (BJP) के महासचिव और जम्‍मू-कश्‍मीर के प्रभारी राम माधव (Ram Madhav) ने कहा कि एडॉल्‍फ हिटलर (Adolf Hitler) तथा बेनिटो मुसोलिनी (Benito Mussolini) लोकतंत्र की ही उपज थे. इसके बाद से लेकर आज तक दुनिया में उदारवादी लोकतंत्र हुए हैं. लोकतंत्र समय के साथ मजबूत होता रहता है. उन्‍होंने नई दिल्‍ली में एक वैश्विक सम्‍मेलन के दौरान बृहस्‍पतिवार को कहा, 'भारत में कहां लोकतंत्र वास्तव में प्रगति कर रहा है? यह सवाल उठाया जाना ही साबित करता है कि भारतीय लोकतंत्र जीवंत बना हुआ है. ये खुद अपना रास्ता बनाते हुए आगे बढ़ता रहता है.'

'राजनीति के हथियार के तौर पर न हो लोकतंत्र का इस्‍तेमाल'
राम माधव ने रायसीना डायलॉग-2020 के तीसरे दिन कहा कि हम एक मजबूत लोकतांत्रिक देश हैं. भारत में भी कमियां है, लेकिन हमारा झुकाव हमेशा लोकतंत्र (Democracy) की तरफ रहेगा. पूरी दुनिया में कहीं भी लोकतंत्र का एक सर्वमान्‍य मॉडल नहीं है. हिंद-प्रशांत क्षेत्र में ही कई तरह के लोकतांत्रिक मॉडल हैं. भारत ने पड़ोसी देशों को भी लोकतंत्र बहाल करने में मदद की है. इस सब के बीच लोकतंत्र का इस्तेमाल राजनीति या हथियार के तौर पर नहीं किया जाना चाहिए. बता दें कि रायसीना डायलॉग में 12 देशों के विदेश मंत्रियों ने हिस्सा लिया है. साथ ही इसमें 100 देशों के 700 विशेषज्ञों ने भी इसमें हिस्‍सा लिया है.

'बड़ी संख्‍या में लोगों को नागरिकता कानून की जानकारी नहीं'



नागरिकता संशोधन कानून के विरोध पर पूछे गए सवालों पर राम माधव ने कहा कि बड़ी संख्‍या में लोगों को इसके बारे में जानकारी नहीं है. हम लोग पढ़ते नहीं हैं. कम से कम नागरिकता कानून को लेकर ऐसा कहा जा सकता है. यह कानून 1955 के नागरिकता कानून में संशोधन कर बनाया गया है. कानून बनाने और उसमें संशोधन करने में फर्क होता है. भारत के पास एक शानदार संविधान है, जो देश के सभी नागिरकों को अधिकार देता है. ये कानून किसी के साथ कोई भेदभाव नहीं करता है. अगर आप यह मुद्दा उठा रहे हैं इसका मतलब है कि यहां पर चेक और बैलेंस है. विदेश मंत्रालय और ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन की ओर से कार्यक्रम का आयोजन 2016 से किया जा रहा है.

'आलोचना का स्‍वागत है, लेकिन हिंसा किसी तरह से ठीक नहीं'
बीजेपी महासचिव ने कहा कि आलोचना का स्वागत है, लेकिन अपने मुद्दे को सही जगह पर उठाने का एक तरीका है. हिंसा करना किसी भी तरह से ठीक नहीं है. लोकतंत्र के भविष्य को लेकर किसी को भी चिंता करने की जरूरत नहीं है. पिछले सात दशक से भारतीयों ने इसे संभाला है. ये भविष्‍य में भी आगे ही बढ़ता जाएगा. लोकतंत्र को सफल बनाने के तरीकों पर उन्होंने कहा कि केवल सरकार के प्रयास से यह सफल साबित नहीं हो सकता है. इसे नागरिकता के सिद्धांतों के साथ ही आगे बढ़ाया जा सकता है. लोकतंत्र के लिए कई ऐसे संस्थान होने चाहिए जो थिंक टैंक के तौर पर काम करे.

रायसीना डायलॉग में हुई आतंकवाद और जलवायु परिवर्तन पर चर्चा
रायसीना डायलॉग में इस बार वैश्वीकरण, साल 2030 का एजेंडा, तकनीकी का महत्व, जलवायु परिवर्तन और आतंकवाद पर चर्चा हुई. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को इस कार्यक्रम का उद्घाटन किया. यह कार्यक्रम दुनिया की कूटनीति में भारत के बढ़ते दबदबे को दर्शाता है. समारोह में ईरान के विदेश मंत्री जवाद जरीफ पर सबकी नजरें थीं. ईरान के अल-कुद्स फोर्स के कमांडर जनरल कासिम सुलेमानी के मारे जाने के बाद ईरान के विदेश मंत्री का यह पहला विदेशी दौरा था. ईरान के विदेश मंत्री ने कासिम सुलेमानी के मारे जाने को लेकर अमेरिका पर निशाना साधा. इस कार्यक्रम में चीफ ऑफ डिफेंस स्टॉफ (CDS) जनरल बिपिन रावत ने आतंकवाद, पैलेट गन और पत्थरबाजी पर चर्चा की.

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First published: January 17, 2020, 3:35 PM IST
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