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निर्मला सीतारमण के चाबहार बंदरगाह का बजट घटाने से ईरान चिंतित

निर्मला सीतारमण के चाबहार बंदरगाह का बजट घटाने से ईरान चिंतित

चाबहार पोर्ट को पाकिस्तान के ग्वादर पोर्ट का भारत की ओर से करारा जवाब भी कहा जाता रहा है. पोर्ट का उदघाटन दिसंबर, 2017 में हुआ था. भारत ने जनवरी, 2019 में इसका परिचालन अपने हाथ में लिया था.

चाबहार पोर्ट को पाकिस्तान के ग्वादर पोर्ट का भारत की ओर से करारा जवाब भी कहा जाता रहा है. पोर्ट का उदघाटन दिसंबर, 2017 में हुआ था. भारत ने जनवरी, 2019 में इसका परिचालन अपने हाथ में लिया था.

भारत ईरान में चाबहार बंदरगाह विकसित कर रहा है. इस बंदरगाह के जरिये बिना पाकिस्तान से गुजरे अफगानिस्तान और मध्य एशिया को भारत से जोड़ा जा सकेगा. वित्त मंत्री ने इस परियोजना के लिए आवंटित राशि पिछले साल की 150 करोड़ रुपये से घटाकर 45 करोड़ कर दी है.

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    केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आम बजट 2019 में चाबहार बंदरगाह के लिए आवंटित राशि घटा दी है. सरकार के इस कदम से ईरान चिंतित नजर आ रहा है. बजट में चाबहार पोर्ट के लिए आवंटन 45 करोड़ रुपये कर दिया गया है, जबकि पिछले साल ये राशि 150 करोड़ थी. हालांकि, सूत्रों का कहना है कि भारत अब भी इस परियोजना को लेकर प्रतिबद्ध है. बता दें कि भारत ईरान में चाबहार बंदरगाह विकसित कर रहा है. इस पोर्ट के जरिये बिना पाकिस्तान से गुजरे अफगानिस्तान और मध्य एशिया को भारत से जोड़ा जा सकेगा.

    'आवंटन घटाना-बढ़ाना सामान्य, परियोजना पर नहीं पड़ेगा असर'

    एक भारतीय राजनयिक ने कहा कि कई बार राष्ट्र रणनीतिक और तार्किक फैसले लेते हैं. इसका ये मतलब नहीं है कि भारत इस परियोजना के प्रति प्रतिबद्ध नहीं रहा. आवंटन बढ़ाना और घटाना सामान्य बात है. इससे परियोजना पर कोई असर नहीं पड़ेगा. इस पोर्ट को पाकिस्तान के ग्वादर पोर्ट का भारत की ओर से करारा जवाब भी कहा जाता रहा है. पोर्ट का उदघाटन दिसंबर, 2017 में हुआ था. भारत ने जनवरी, 2019 में इस पोर्ट का परिचालन अपने हाथ में लिया था.

    'काम में प्रगति तो है, लेकिन विकास की रफ्तार हो गई है धीमी'

    वहीं, ईरान के राजनयिक मानते हैं कि चाबहार में विकास कार्य धीमा हो गया है. एक राजनियक ने कहा कि चाबहार में काम में प्रगति तो हो रही है, लेकिन रफ्तार धीमी हो गई है. दोनों देश के नेता चाहे जो भी चाहते हों, लेकिन वक्त बर्बाद हो रहा है. हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि निश्चित रूप से भारत रणनीतिक महत्व की इस परियोजना से अपना ध्यान नहीं हटा रहा है.

    'चाबहार बंदरगाह परियोजना को लेकर भारत है काफी गंभीर' 

    एक वरिष्ठ राजनयिक ने कहा कि जहां तक हम समझ पा रहे हैं, भारत चाबहार को लेकर गंभीर है. पीएम मोदी, विदेश मंत्री एस जयशंकर, नितिन गडकरी से लेकर सभी सांसद इस परियोजना को लेकर काफी गंभीर हैं. इससे पहले भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर और ईरान के विदेश मंत्री जावेद जरीफ ने ताजिकिस्तान में मुलाकात के दौरान इस मुद्दे पर बात की थी.

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    Tags: Chabahar, Iran, Modi Government Budget, Nirmala sitharaman

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