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राफेल सौदे के खिलाफ पुनर्विचार याचिकाओं में सुप्रीम कोर्ट को क्‍यों नहीं लगा दम?

News18Hindi
Updated: November 14, 2019, 6:06 PM IST
राफेल सौदे के खिलाफ पुनर्विचार याचिकाओं में सुप्रीम कोर्ट को क्‍यों नहीं लगा दम?
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि फ्रांस के साथ किए गए राफेल सौदे को लेकर दायर पुनर्विचार याचिकाओं पर सुनवाई की कोई जरूरत नहीं है.

शीर्ष अदालत (Supreme Court) ने कहा कि जब तक रिकॉर्ड में कोई खामी ना हो तब तक तथ्‍यों (Facts) को अनदेखा नहीं किया जा सकता. ऐसे में फ्रांस के साथ किए गए राफेल सौदे (Rafale Deal) को लेकर दायर पुनर्विचार याचिकाओं (Review Petitions) पर सुनवाई की कोई जरूरत नहीं है. कोर्ट ने कहा कि इस मामले में अधिवक्‍ता प्रशांत भूषण (Advocate Prashant Bhushan), पूर्व मंत्री यशवंत सिन्‍हा (Yashwant Sinha) और अरुण शौरी (Arun Shourie) की पुनर्विचार याचिकाएं खारिज की जाती हैं.

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  • Last Updated: November 14, 2019, 6:06 PM IST
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नई दिल्‍ली. सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने राफेल डील (Rafale Deal) मामले में मोदी सरकार को बड़ी राहत दी है. मुख्‍य न्‍यायाधीश रंजन गोगोई (CJI Ranjan Gogoi) की अध्‍यक्षता वाली पीठ ने राफेल मामले में दायर सभी पुनर्विचार याचिकाओं को खारिज कर दिया है. कोर्ट ने 14 राफेल लड़ाकू विमान के सौदे को वैध मानते हुए 14 दिसंबर, 2018 के अपने फैसले को बरकरार रखा है. सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में याचियों की ओर से पेश की गईं सौदे की प्रक्रिया में गड़बड़ी की दलीलों को खारिज कर दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा, 'हमें नहीं लगता कि मामले में एफआईआर दर्ज करने का निर्देश देने की कोई जरूरत है.' बता दें कि अधिवक्‍ता प्रशांत भूषण (Advocate Prashant Bhushan), पूर्व मंत्री यशवंत सिन्‍हा (Yashwant Sinha) और अरुण शौरी (Arun Shourie) ने मामले में पुनर्विचार याचिकाएं दायर की थीं.

'विमान के साथ उपलब्‍ध कराई जा रही सामग्री बढ़ी कीमत को संतुष्‍ट करती है'
याचिकाकर्ताओं ने मांग की थी कि फ्रांसीसी रक्षा कंपनी दसॉ एविएशन (Dassault Aviation) के साथ 36 लड़ाकू विमानों के खरीद सौदे की जांच शुरू करने का निर्देश दिया जाए. लेकिन, पीठ ने अपने पिछले फैसले को ही दोहरा दिया. कोर्ट ने कहा कि राफेल विमानों की जरूरत (Necessity) को लेकर कभी कोई विवाद नहीं रहा है. जब तक रिकॉर्ड में कोई खामी ना हो तब तक तथ्‍यों (Facts) को अनदेखा नहीं किया जा सकता. ऐसे में फ्रांस के साथ किए गए राफेल सौदे को लेकर दायर पुनर्विचार याचिकाओं (Review Petitions) पर सुनवाई की कोई जरूरत नहीं है. कोर्ट ने कहा, 'जहां तक बात इसकी कीमत की है तो विमान के साथ उपलब्‍ध कराई जा रही सामग्री इस पहलू को संतुष्‍ट करती है.'

 


'याची सौदे के हर पहलू को तय करने में बनना चाहते हैं अपीलीय प्राधिकारी'
सीजीआई के नेतृत्‍व वाली पीठ (CJI-Led Bench) ने याचिकाओं में उठाए गए खरीद सौदे के निर्णय में विसंगतियों के मुद्दे पर कहा, 'ऐसा लगता है कि याचिकाकर्ता अनुबंध के हर पहलू को तय करने के लिए खुद को एक अपीलीय प्राधिकारी के रूप में पेश करने का प्रयास कर रहे हैं और कोर्ट को भी ऐसा ही करने के लिए कह रहे हैं. हमें नहीं लगता कि यह हमारे अधिकार क्षेत्र में आता है.'
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पीठ ने कहा कि कोई भी निर्णय लेने से पहले कई तरह की राय आती हैं, जो अलग-अलग हो सकती हैं. ये राय लिए गए निर्णय से बिलकुल अलग हो सकती हैं. निर्णय से पहले खूब बहस होती है और विशेषज्ञों की राय ली जाती है. इस पर अंतिम फैसला संबंधित प्राधिकरण को लेना होता है. इसी तरह से किसी योजना को निर्णय तक पहुंचाया जाता है. किसी अनुबंध में अलग-अलग सुझावों को रिकॉर्ड में रखना असंभव हो जाएगा. अगर ऐसा किया जाने लगा तो निर्णय की प्रक्रिया में बहस का उद्देश्‍य ही खत्‍म हो जाएगा.

'मामले में हमारा पिछला फैसला संविधान के अनुच्‍छेद-32 के दायरे में था'
पुनर्विचार याचिका में लीक्‍ड डॉक्‍यूमेंट्स के आधार पर कहा गया कि 2015 में रक्षा मंत्रालय ने प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से फ्रांस के साथ की जा रही सौदेबाजी पर आपत्ति जताई थी. साथ ही याचिका में सात सदस्‍यीय सौदेबाजी टीम के तीन वरिष्‍ठ अधिकारियों के मतभेदों का भी जिक्र किया गया था. सभी दलीलें सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट की तीन सदस्‍यीय पीठ ने कहा कि पुनर्विचार याचिकाओं में कोई दम नहीं है. लिहाजा, सभी पुनर्विचार याचिकाएं खारिज की जाती हैं. साथ ही एक बार फिर दोहराया जा रहा है कि हमारा पिछला फैसला संविधान के अनुच्‍छेद-32 के दायरे में था.

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First published: November 14, 2019, 3:42 PM IST
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