लाइव टीवी

ANALYSIS: क्‍यों सोनिया गांधी नहीं कर पा रहीं 2004 जैसी विपक्षी एकता का करिश्‍मा

News18Hindi
Updated: January 16, 2020, 5:10 PM IST
ANALYSIS: क्‍यों सोनिया गांधी नहीं कर पा रहीं 2004 जैसी विपक्षी एकता का करिश्‍मा
कांग्रेस की अंतरिम अध्‍यक्ष सोनिया गांधी विपक्षी दलों को एकजुट करने में नाकाम हो रही हैं.

कांग्रेस राहुल गांधी (Rahul Gandhi) की वापसी और प्रियंका गांधी (Priyanka Gandhi) को आगे बढ़ाकर राज्‍यों की लड़ाई लड़ रही है. कांग्रेस (Congress) का प्रभाव बाकी दलों में फीका पड़ता जा रहा है. विपक्ष के बाकी दल (Opposition Parties) भी कांग्रेस की मौजूदा स्थिति का फायदा उठाना चाहते हैं. एनआरसी (NRC), एनपीआर (NPR) और सीएए 2019 (CAA 2019) को लेकर कांग्रेस की ओर से बुलाई गई विपक्षी दलों की बैठक से कई बड़े दल नदारद रहे.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 16, 2020, 5:10 PM IST
  • Share this:
अनीता कत्‍याल

कांग्रेस की अंतरिम अध्‍यक्ष सोनिया गांधी (Sonia Gandhi) ने नागरिकता संशोधन कानून 2019 (CAA 2019), नेशनल रजिस्‍टर ऑफ सिटिजंस (NRC) और नेशनल पॉप्‍यूलेशन रजिस्‍टर (NPR) के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे स्‍टूडेंट्स के पक्ष में संयुक्‍त रणनीति बनाने के लिए 13 जनवरी को नई दिल्‍ली में सभी विपक्षी दलों (Opposition Parties) की बैठक बुलाई थी. इस बैठक में विपक्ष के 20 दलों ने शिरकत की, लेकिन तृणमूल कांग्रेस (TMC), समाजवादी पार्टी (SP), बहुजन समाज पार्टी (BSP), डीएमके (DMK), शिवसेना (Shiv Sena) और आम आदमी पार्टी (AAP) नदारद रहे.

ममता बनर्जी ने कांग्रेस पर आरोप लगाते हुए किया बैठक का बहिष्‍कार
बसपा सुप्रीमो मायावती (Mayawati) कुछ समय से विपक्षी दलों से दूरी बनाकर चल रही हैं. वहीं, तृणमूल कांग्रेस प्रमुख और पश्चिम बंगाल की मुख्‍यमंत्री ममता बनर्जी (CM Mamata Banerjee) ने कुछ दिन पहले ही बैठक का बहिष्‍कार (Boycott) कर दिया था. उन्‍होंने आरोप लगाया था कि कांग्रेस और वामदल (Left) गंदी राजनीति कर रहे हैं. ऐसे में उनकी पार्टी अकेले ही नागरिकता कानून और एनआरसी के खिलाफ लड़ेगी. डीएमके और शिवसेना के बैठक से गायब रहने का कारण अब तक साफ नहीं हुआ है. शिवसेना जहां हाल में ही गठबंधन में शामिल हुई है. वहीं, डीएमके लंबे समय से कांग्रेस की सहयोगी पार्टी है. इन सभी दलों ने एनआरसी, एनपीआर और सीएए का विरोध किया है.

2004 जैसे नतीजे हासिल नहीं कर पाईं कांग्रेस की अंतरिम अध्‍यक्ष
सोनिया गांधी को भरोसा था कि इन तीनों मुद्दों पर ज्‍यादातर राजनीतिक दल की सोच एक है. लिहाजा, ये सही समय है कि सभी विपक्षी दल एक मंच पर आकर साथ काम करें. सोनिया ने 2004 में भी ऐसा ही कदम उठाया था. तब उन्‍होंने व्‍यक्तिगत तौर पर विपक्षी नेताओं (Opposition Leaders) से मुलाकात कर संयुक्‍त प्रगतिशील गठबंधन (UPA) बनाया था. इसके बाद ये गठबंधन 10 साल केंद्र की सत्‍ता पर काबिज रहा. इस बार सोनिया वैसे ही नतीजे हासिल करने में नाकाम रहीं. सवाल उठता है कि आखिर क्‍यों विपक्षी दल कांग्रेस की अंतरिम अध्‍यक्ष की संयुक्‍त कार्रवाई की रणनीति को लेकर गंभीरता नहीं दिखा रहे हैं, जबकि सभी इन तीनों मुद्दों पर वैचारिक तौर पर एकदूसरे से सहमत हैं.

विपक्षी दल जहां राहुल गांधी को गठबंधन का नेता मानने को तैयार नहीं हैं. वहीं, यूपी की सियासत में प्रियंका गांधी का दखल सपा और बसपा को पसंद नहीं आ रहा है.
कई मुद्दों पर एकदूसरे से सहमत नहीं हो पा रही हैं विपक्षी पार्टियां
कांग्रेस की अंतरिम अध्‍यक्ष की रणनीति पर गंभीरता नहीं दिखाने का कारण विचारधारा नहीं है. दरअसल, प्रस्‍तावित गठबंधन के नेतृत्‍व और स्‍थानीय स्‍तर पर एकदूसरे के लिए गुंजाइश छोड़ने को लेकर विपक्षी दल एकमत नहीं हो पा रहे हैं. कांग्रेस के लिए 2004 की तरह अब गठबंधन का नेतृत्‍व हासिल करना काफी मुश्किल है. हालांकि, क्षेत्रीय दल इस बात को अच्‍छी तरह जानते हैं कि बीजेपी के खिलाफ राष्‍ट्रीय स्‍तर पर एक गठबंधन बनाने पर कांग्रेस को हर हाल में साथ लेना होगा. बावजूद इसके वे कांग्रेस को नेतृत्‍व सौंपने को तैयार नहीं हैं. कांग्रेस का प्रभाव धीमे-धीमे फीका पड़ता जा रहा है. विपक्ष के बाकी दल भी कांग्रेस की मौजूदा स्थिति का पूरा फायदा उठाना चाहते हैं.

राहुल गांधी को गठबंधन का नेता मानने को तैयार नहीं बाकी दल
विपक्षी दल कांग्रेस के साथ काम तो करना चाहते हैं, लेकिन अपनी शर्तों पर. वहीं, क्षेत्रीय दलों को यह डर भी सता रहा है कि राहुल गांधी (Rahul gandhi) फिर कांग्रेस का नेतृत्‍व संभालेंगे. वहीं, क्षेत्रीय दल राहुल गांधी को न तो गठबंधन का नेता स्‍वीकार करना चाहते हैं और न ही प्रधानमंत्री प्रत्‍याशी (PM Candidate) बनाने को तैयार हैं. इसके अलावा राज्‍यों में एकदूसरे से भिड़ने वाले क्षेत्रीय दल (Regional Parties) राष्‍ट्रीय स्‍तर पर भी एकदूसरे के सामने झुकने को तैयार नहीं हैं. लोकसभा चुनाव 2019 (Lok Sabha Election 2019) में ममता बनर्जी और राहुल गांधी के बीच मिलकर चुनाव लड़ने पर सहमति बनी, लेकिन इसी दौरान तय हो गया था कि पश्चिम बंगाल में दोनों एकदूसरे के खिलाफ होंगे.

ममता बनर्जी का पूरा ध्‍यान पश्चिम बंगाल में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव पर है. ऐसे में वह राज्‍य में अपने विरोधी दलों के साथ किसी भी मंच पर नजर आने से कतरा रही हैं.


राज्‍य में अपने विरोधियों के साथ नहीं दिखना चाहती हैं ममता बनर्जी
ममता बनर्जी का पूरा ध्‍यान पश्चिम बंगाल में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव पर है. वह अपने स्‍थानीय प्रतिद्वंद्वी कांग्रेस और वामदलों के साथ किसी भी मंच पर साथ नहीं दिखना चाहती हैं. इसलिए उन्‍होंने सोनिया गांधी की बुलाई बैठक का बहिष्‍कार कर दिया. इसी तरह अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejariwal) के नेतृत्‍व वाली आम आदमी पार्टी (AAP) दिल्‍ली विधानसभा चुनाव 2020 (Delhi Assembly Election 2020) में सबसे आगे नजर आ रही है. पार्टी नहीं चाहेगी कि उसके नेता किसी भी मंच पर कांग्रेस के साथ नजर आएं. डीएमके के मामले में भी विपक्षी खेमे का विरोधाभास नजर आता है. डीएमके इस समय निकाय चुनाव में सीट बंटवारे को लेकर कांग्रेस की तमिलनाडु (Tamil Nadu) इकाई के साथ जूझ रही है.

राज्‍यों में एकदूसरे को जगह देने के लिए तैयार नहीं क्षेत्रीय दल
उत्‍तर प्रदेश (UP) में कांग्रेस की सियासत हाशिए पर है. ऐसे में समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) और बसपा सुप्रीमो मायावती कांग्रेस के साथ हाथ मिलाने को लेकर बहुत ज्‍यादा उत्‍सुक नजर नहीं आते हैं. आम चुनाव 2019 में सपा और बसपा ने पुरानी कड़वाहट को भुलाकर साथ चुनाव लड़ा, लेकिन दोनों ने कांग्रेस से दूरी बनाकर रखी. उत्‍तर प्रदेश में जहां कांग्रेस अखिलेश और मायावती से सीटें देने में लचीला रुख अपनाने की मांग कर रही थी. वहीं, मध्‍य प्रदेश, राजस्‍थान और छत्‍तीसगढ़ में कांग्रेस ने खुद अडि़यल रवैया दिखाया. इसके अलावा प्रियंका गांधी का यूपी में बार-बार नजर आना अन्‍य विपक्षी दलों को रास नहीं आ रहा है. इन सभी तथ्‍यों को देखते हुए विपक्षी एकता का मुद्दा सोनिया गांधी के लिए बड़ी चुनौती है.

(लेखिका वरिष्‍ठ पत्रकार हैं. लेख उनके निजी विचार हैं.)

ये भी पढ़ें:-

आज दूसरे घर में शिफ्ट नहीं किये जाएंगे उमर अब्दुल्ला- सूत्र

CDS रावत का आतंकवाद पर बड़ा बयान- छोटे बच्चों को बनाया जा रहा है कट्टरपंथी

 

News18 Hindi पर सबसे पहले Hindi News पढ़ने के लिए हमें यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें. देखिए देश से जुड़ी लेटेस्ट खबरें.

First published: January 16, 2020, 4:05 PM IST
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर