यूरोपीय न्यूक्लियर रिसर्च सेंटर में नटराज की मूर्ति क्यों रखी है?

सर्न में नटराज प्रतिमा की यह तस्वीर सर्न के पोर्टल से साभार.
सर्न में नटराज प्रतिमा की यह तस्वीर सर्न के पोर्टल से साभार.

सोशल मीडिया (Social Media) पर कई तरह की चर्चाएं हैं, जिनसे इस सवाल के जवाब में आपके हाथ कुछ भ्रांतियां (Misinformation) भी लग सकती हैं. फेक न्यूज़ (Fake News) के इस समय में फैक्ट्स के साथ पूरी कहानी जानिए कि तथ्य क्या कहते हैं.

  • News18India
  • Last Updated: October 21, 2020, 7:57 AM IST
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दुनिया में अपनी तरह की शुरूआती संस्था है यूरोपीय न्यूक्लियर रिसर्च संस्थान (European Nuclear Research Organisation) यानी CERN. यहां परमाणु विज्ञान (Atomic Science) संबंधी अध्ययन के लिए न केवल दुनिया के सबसे जटिल उपकरण रखे हैं, बल्कि दुनिया का सबसे बड़ा और शक्तिशाली पार्टिकल एक्सलेटर लार्ज हैड्रन कोलाइडर (LHC) भी रखा हुआ है. लेकिन दिलचस्प बात यह है कि इन तमाम उपकरणों और मशीनों के साथ ही इस संस्थान के परिसर में नटराज (Natraj Statue) की 2 मीटर की एक मूर्ति भी स्थापित है!

धर्म को वैज्ञानिक आधार पर परिभाषित करने की टेंडेंसी चूंकि पुरानी रही है इसलिए इस बारे में भी कई तरह की भ्रांतियां फैलाई जा रही हैं. सोशल मीडिया पर इस तरह की कई थ्योरीज़ बताई जा रही हैं कि आखिर क्यों यूरोपीय संस्था के परिसर में नटराज की मूर्ति रखी है. सच क्या है? ये जानने से पहले ज़रा इन दिलचस्प दावों को भी देखिए जो सोशल मीडिया पर किए जा रहे हैं.

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* कुछ का कहना है कि इस मूर्ति में 'आनंद तांडव' की मुद्रा है, जो सब एटम्स की गति के समान है.
* कुछ कह रहे हैं कि परमाणु की संरचना को नटराज की मूर्ति समझाती है.
* कुछ मान रहे हैं कि ब्रह्मांड की परिकल्पना के विज्ञान और इस मूर्ति के शिल्प में सामंजस्य है.

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सर्न में नटराज प्रतिमा को लेकर ट्विटर पर चर्चा.


लेकिन ये तमाम दावे सोशल मीडिया पर सिर्फ चर्चा के तौर पर ही हैं. इनमें से कोई भी दावा यह साबित नहीं करता कि CERN के मुख्यालय में नटराज की मूर्ति क्यों रखी है. ये तमाम अंदाज़े अगर गलत हैं, तो सही जवाब क्या है? आइए जानें.

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भारत की तरफ से तोहफा है
जी हां, भारत सरकार ने CERN के साथ संबंध को यादगार बनाने के लिए तोहफे के तौर पर नटराज की मूर्ति संस्था को दी थी. 1960 के दशक में शुरू हुई यह संस्था अब तक बेहतर ढंग से सक्रिय है और भारत इसका सदस्य देश है. CERN की वेबसाइट पर जो उल्लेख है, वो भारत के संबंध के साथ ही नटराज प्रतिमा को लेकर काफी कुछ स्पष्ट करता है :

भारत CERN का एसोसिएट सदस्य है क्योंकि CERN कई संस्कृतियों को साथ लेकर चलने वाली संस्था है. यहां 100 से ज़्यादा देशों और 680 संस्थानों के वैज्ञानिकों का स्वागत किया जा चुका है... CERN में कई कलाकृतियां और प्रतिमाएं रखी हैं, जिनमें से शिव की भी एक प्रतिमा है.


क्यों दिया गया था ये तोहफा?
साल 2004 में 18 जून को CERN के परिसर में स्थापित की गई नटराज की प्रतिमा के साथ जो स्मारिका लगी है, उसमें भौतिकी के मशहूर विद्वान कापरा के शब्दों में लिखा है : 'सदियों पहले से भारतीय कलाकारों ने शिव के नृत्य की कल्पना के चित्र उकेरे, जो कि कॉस्मिक डांस या अलौकिक नृत्य की परिकल्पना देते हैं. इसका रूपक वर्तमान भौतिकी के साथ धर्म और मिथक को जोड़ता है.'

हिंदू धार्मिक मान्यता के अनुसार नटराज रूप शक्ति और जीवन का प्रतीक है. भारत सरकार ने भेंट के लिए इस प्रतिमा को इसलिए चुना था क्योंकि इस अलौकिक नृत्य को आधुनिक सब एटॉमिक पार्टिकल अध्ययनों के साथ एक प्रतीक के तौर पर समझा जा सकता था.

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एक नास्तिक ने बनाई थी यह मूर्ति!
नटराज प्रतिमा CERN कैंपस में बिल्डिंग 39 और 40 के बीच स्थित है, जो मुख्य भवन के पास ही है. CERN में रखी इस प्रतिमा से जुड़ा एक और रोचक तथ्य इसके कलाकार से जुड़ा है. एक रिपोर्ट की मानें तो नटराज की यह मूर्ति अंधविश्वास, जाति व्यवस्था, धार्मिक मान्यताओं और ज्योतिष आदि की आलोचना करने वाले एक नास्तिक कलाकार तमिलनाडु के राजन उर्फ 'सिरपी' ने बनाई थी.

वैक्स मॉडल के सहारे मिट्टी का सांचा बनाकर उसमें पिघली धातु डालकर बनाई गई इस प्रतिमा को लेकर अंत में यही कहा जा सकता है कि मिथक और विज्ञान के बीच एक प्रतीकात्मक रिश्ता कायम करने के मंतव्य से भारत ने CERN को जो भेंट दी थी, वह अब भी प्रासंगिक बनी हुई है.
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