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क्‍या बिहार के बाद पश्चिम बंगाल के मुस्लिम वोट बैंक में सेंध लगाने की तैयारी कर रहे ओवैसी?

News18Hindi
Updated: November 20, 2019, 3:06 PM IST
क्‍या बिहार के बाद पश्चिम बंगाल के मुस्लिम वोट बैंक में सेंध लगाने की तैयारी कर रहे ओवैसी?
पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी और एमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी के बीच कुछ समय से मुस्लिम राजनीति को लेकर तीखी बयानबाजी चल रही है.

पश्चिम बंगाल (West Bengal) की मुख्‍यमंत्री ममता बनर्जी (CM Mamata Banerjee) और ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्‍तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी (Asaduddin Owaisi) के बीच मुस्लिम सियासत को लेकर तीखी बयानबाजी जारी है. बिहार के मुस्लिम बहुल इलाके से एमआईएम प्रत्‍याशी के विधानसभा उपचुनाव जीतने के बाद पार्टी बंगाल में पैठ बढ़ा रही है. वहीं, विधानसभा चुनाव 2021 में टीएमसी (TMC) को बीजेपी (BJP) से तगड़ी टक्‍कर मिलती दिख रही है. इससे ममता काफी बौखलाई हुई नजर आ रही हैं.

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  • Last Updated: November 20, 2019, 3:06 PM IST
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सुजीत नाथ

कोलकाता. पश्चिम बंगाल (West Bengal) में मुस्लिम मतदाताओं की संख्‍या 31 फीसदी है, जो किसी भी चुनाव में निर्णायक भूमिका में रहते हैं. राज्‍य में माकपा (CPM) के सत्‍ता में रहने में भी मुस्लिम मतदाताओं की भूमिका थी. वहीं, ममता बनर्जी के माकपा को हटाकर 2011 में राज्‍य की सत्‍ता पर काबिज होने में भी मुस्लिम मतदाओं का बड़ा योगदान था. मुख्‍यमंत्री ममता बनर्जी (CM Mamata Banerjee) जानती हैं कि मुस्लिम वोटवैंक पर असर पड़ने से राज्‍य की 294 विधानसभा सीटों (Assembly Seats) में करीब 90 पर प्रभाव पड़ेगा. इससे विधानसभा चुनाव 2021 में तृणमूल कांग्रेस (TMC) की संभावनाएं कमजोर पड़ सकती हैं. इस बीच ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्‍तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी (Asaduddin Owaisi) को भी बंगाल में सियासी मौका नजर आ रहा है. वह 2011 से राज्‍य में पैठ बढ़ाने में जुटे हैं.

ममता बनर्जी के लिए बड़ी चुनौती पेश कर सकती है एमआईएम
बिहार (Bihar) के किशनगंज विधानसभा उपचुनाव (Bypolls) में एमआईएम की जीत के बाद ओवैसी बंगाल पर खास ध्‍यान दे रहे हैं. ये मुस्लिम बहुल विधानसभा क्षेत्र पश्चिम बंगाल से सटा हुआ है. हालांकि, ओवैसी ने अभी तक आधिकारिक तौर पर अपनी पार्टी की प. बंगाल इकाई की घोषणा नहीं की है. फिर भी ममता बनर्जी आशंकाओं से घिरी हुई नजर आ रही हैं. दरअसल, ओवैसी ने स्‍थानीय युवाओं को कोलकाता, उत्‍तरी दिनाजपुर, मालदा, मुर्शिदाबाद, जलपाईगुड़ी और नाडिया जिले में एमआईएम की विचारधारा के प्रचार की जिम्‍मेदारी सौंप दी है. मुस्लिम वोटबैंक में सेंध लगने पर एमआईएम ममता बनर्जी के लिए बड़ी चुनौती साबित हो सकती है. उनका ये डर तब सामने आया जब उन्‍होंने कहा कि अल्‍पसंख्‍यकों में भी हिंदुओं चरमपंथियों की तरह अतिवाद बढ़ रहा है. उन्‍होंने ओवैसी का नाम लिए बिना आरोप लगाया कि हैदराबाद की एक पार्टी बीजेपी से पैसे लेकर लोगों को उकसा रही है.

एमआईएम राज्‍य की सभी विधानसभा सीटों पर प्रत्‍याशी उतारेगी
एमआईएम के बंगाल प्रमुख जमीरुल हसन ने कहा कि हम ममता बनर्जी के खिलाफ नहीं थे. लेकिन, जब उन्‍होंने हमें अतिवादी कहा तो धक्‍का लगा. अब हमें बंगाल में मुस्लिमों की बेहतरी के बारे में सोचना ही होगा. उन्‍होंने स्‍पष्‍ट किया कि एमआईएम बंगाल में सभी सीटों पर अपने प्रत्‍याशी उतारेगी. बता दें कि कभी टीएमसी के समर्पित कार्यकर्ता रहे जमीरुल हसन ने सिंगुर मुद्दे पर ममता बनर्जी से मतभेदों के कारण पार्टी छोड़ दी थी. लोकसभा चुनाव 2019 में मतदाताओं ने स्‍पष्‍ट तौर पर दो धड़ों में बंटकर मतदान किया था. बीजेपी ने खुले तौर पर हिंदू कार्ड खेला, जबकि टीएमसी ने मुस्लिम मतदाताओं पर भरोसा जताया. ध्रुवीकरण का आलम यह था कि कभी टीएमसी के कट्टर समर्थक रहे मतुआ समुदाय के लोगों ने नागरिकता मुद्दे पर बीजेपी के पक्ष में मतदान किया.

एमआईएम और टीएमसी के टकराव के कारण मुस्लिम मतदाताओं के दो हिस्‍सों में बंटने का बीजेपी को बड़ा फायदा मिलेगा.
बीजेपी को मिलेगा मुस्लिम मतदाताओं के बंटने का बड़ा फायदा
टीएमसी के लिए पश्चिम बंगाल में ध्रुवीकरण चिंता का विषय बन गया है. ऐसे में एमआईएम का विधानसभा चुनाव 2021 में सभी सीटों पर प्रत्‍याशी उतारना और मुस्लिम मतदाताओं का दो हिस्‍सों में बंट जाना बीजेपी के लिए वरदान साबित हो सकता है. टीएमसी लोकसभा चुनाव में 18 सीटों पर मिली हार से उबरने की कोशिश कर ही रही थी कि एमआईएम का बंगाल में चलाया जा रहा प्रचार अभियान ममता बनर्जी के लिए नई चिंता खड़ी कर रहा है. पिछले छह महीनों में टीएमसी ने बीजेपी के दबदबे वाले कुछ क्षेत्रों में अपनी सियासी जमीन वापस हासिल कर ली है. विधानसभा चुनाव 2021 में मुस्लिम मतदाताओं के रुझान में बदलाव का अनुमान लगाते हुए पहली बार ममता बनर्जी ने 'अल्‍पसंख्‍यकों के अतिवादी' होने की बात सार्वजनिक तौर पर कही है. उन्‍होंने अल्‍पसंख्‍यकों के बारे में ये टिप्‍पणी हिंदू और राजवंशी मतदाता बहुल कूच बिहार में हुई एक रैली के दौरान कही.

हिंदू मतदाताओं को लुभाने के लिए उतावली नजर आ रहीं ममता
राजनीतिक विशेषज्ञ मोहित राय का कहना है कि अगर एमआईएम राज्‍य की सभी विधानसभा सीटों पर प्रत्‍याशी उतारती है तो टीएमसी के लिए सियासी समीकरणों में बदलाव होना तय है. अलग विचारधारा के कारण बीजेपी पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा. लेकिन एमआईएम प्रत्‍याशी ममता बनर्जी के लिए मुसीबत खड़ी कर सकते हैं. टीएमसी पर एमआईएम के पक्ष में खिसकने वाले मामूली मतदाताओं का भी काफी असर पड़ेगा. ऐसे में ममता बनर्जी हिंदू मतदाताओं को लुभाने के लिए उतावली नजर आ रही हैं. लोकसभा चुनाव 2014 में टीएमसी ने राज्‍य की 34 सीटों पर जीत दर्ज की थी, जबकि 2019 में उसे 22 सीटों से संतोष करना पड़ा. हालांकि, 12 सीटें कम होने के बाद भी मुस्लिम मतदाताओं के समर्थन के कारण टीएमसी के मत-प्रतिशत में बढ़ोतरी हुई थी.

लोकसभा चुनाव में हिंदू वोटर्स के एकजुट होने का बीजेपी को मिला फायदा
विधानसभा चुनाव 2016 में बीजेपी (BJP) का राज्‍य में मत-प्रतिशत (Vote Share) 12 फीसदी रहा था, जो लोकसभा चुनाव 2019 में जबरदस्‍त उछाल के साथ 39 फीसदी पहुंच गया था. राय का कहना है कि बीजेपी के मत-प्रतिशत में 27 फीसदी उछाल हिंदू मतदाताओं (Hindu Voters) के एकजुट होने से आया था. इससे साफ हो जाता है कि मतदाताओं का रुख धर्म के आधार पर भी बदलता है. अब एमआईएम के बंगाल की सियासत में दखल से यह तय है कि इसका नुकसान ममता बनर्जी को ही उठाना होगा. ऐसे में वह बीजेपी के खाते में गए मतदाताओं को वापस अपने खेमे में लाने की भरपूर कोशिश कर रही हैं. वह यह साबित करने की कोशिश कर रही हैं कि टीएमसी मुस्लिम तुष्टिकरण की राजनीति नहीं करती है.

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First published: November 20, 2019, 1:55 PM IST
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