भारत को जानने के लिए संस्कृत का ज्ञान होना जरूरी : मोहन भागवत

आरएसएस प्रमुख ने कहा कि देश में सभी मौजूदा भाषाएं, जिसमें आदिवासी भाषाएं भी शामिल है वह कम से कम 30 प्रतिशत संस्कृत के शब्दों से बनी हैं.

News18Hindi
Updated: July 21, 2019, 8:59 AM IST
भारत को जानने के लिए संस्कृत का ज्ञान होना जरूरी : मोहन भागवत
भारत को जानने के लिए संस्कृत का ज्ञान होना जरूरी : मोहन भागवत
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Updated: July 21, 2019, 8:59 AM IST
राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत ने एक बार फिर संस्कृत पर जोर देते हुए कहा है कि भारत को वो ही लोग समझ सकते हैं जिन्हें संस्कृत के बारे में जानकारी हो. संस्कृत को जाने बिना भारत को पूरी तरह से समझना मुश्किल है. नागपुर में एक पुस्तक के विमोचन कार्यक्रम में शिरकत करने पहुंचे आरएसएस प्रमुख ने कहा कि देश में सभी मौजूदा भाषाएं, जिसमें आदिवासी भाषाएं भी शामिल हैं वह कम से कम 30 प्रतिशत संस्कृत के शब्दों से बनी हैं.

भागवत ने कहा ने कि डॉ. बीआर आंबेडर हमेशा इस बात पर अफसोस जताते रहे कि उन्हें संस्कृत सीखने का अवसर नहीं मिल सका. आंबेडकर कहते थे कि देश की परंपराओं के बारे में जानने के लिए संस्कृत का ज्ञान होना जरूरी है. उन्होंने कहा, भारत में ऐसी कोई भी भाषा नहीं है, जिसे तीन से चार महीनों में नहीं सीखा जा सकता है. अगर कोई अपनी भाषा में बोलता है तो भले ही हम उसे पहली बार में समझ न सकें लेकिन अगर उस भाषा को धीरे-धीरे बोला जाए तो उसका भाव समझ में आने लगता है. इसका सबसे बड़ा कारण है संस्कृत है.

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संघ प्रमुख ने कहा, संस्कृत ज्ञान की भाषा है और (प्राचीन) खगोल विज्ञान, कृषि और आयुर्वेद के सभी ज्ञान संस्कृत में ही पाए जा सकते हैं. उन्होंने कहा, भारत के पूर्व-आधुनिक इतिहास के संसाधन भी केवल संस्कृत में हैं. भागवत ने कहा कि संस्कृत को जाने बिना भारत को पूरी तरह से समझना मुश्किल है.

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First published: July 21, 2019, 8:58 AM IST
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