ब्राह्मण पुजारी की मौत के बाद, कोडावा समुदाय ने तालकावेरी पर पूजा करने के अधिकार वापस मांगे

ब्राह्मण पुजारी की मौत के बाद, कोडावा समुदाय ने तालकावेरी पर पूजा करने के अधिकार वापस मांगे
हर साल, लाखों भक्त देवी कावेरी की पूजा करने के लिए तालकावेरी और भागगमंडला जाते हैं (News18 Kannada)

कोडावा समुदाय के अनुसार, तालकावेरी (Talacauvery) में पूजा और अन्य सभी संबंधित अनुष्ठानों को अम्मा कोडावा (Amma Kodava) ने सदियों से संभाला था और कोडावा धार्मिक परंपराओं और अनुष्ठानों में ब्राह्मणों (Brahmins) की कोई भूमिका नहीं थी.

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  • Last Updated: August 26, 2020, 4:53 PM IST
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बेंगलुरु. हाल ही में हुई मूसलाधार बारिश और भूस्खलन (torrential rains and landslide) से कावेरी नदी के उद्गम स्थल (birthplace of river Cauvery) तालकावेरी (Talacauvery) में मुख्य पुजारी और उनके परिवार के सदस्यों की मौत हो गई. ब्राह्मण पुजारी नारायण अचार, उनकी पत्नी और तीन अन्य परिवार के सदस्य पिछले सप्ताह एक विशाल भूस्खलन में मारे गए. अब कोडावा समुदाय (Kodava community), पहाड़ी जिले के मूल निवासियों ने मांग की है कि राज्य सरकार को ब्राह्मणों (Brahmins) से पुरोहित के कर्तव्य लेकर उन्हें वापस कर देने चाहिए. स्थानीय लोगों को डर है कि अगर इस मुद्दे से सावधानी से नहीं निपटा गया, तो इससे कानूनी लड़ाई (legal battle) हो सकती है जो राजनीतिक रंग ले सकती है.

हर साल, लाखों भक्त देवी कावेरी की प्रार्थना करने के लिए तालकावेरी और भागगमंडला (Bhagamandala) जाते हैं. कोडावा के पुरोहित वर्ग से आने वाले अम्मा कोडावा ने इस संबंध में जिले के उपायुक्त से आधिकारिक अनुरोध किया है. उनके अनुसार, तालकावेरी (Talacauvery) में पूजा और अन्य सभी संबंधित अनुष्ठानों को अम्मा कोडावा (Amma Kodava) ने सदियों से संभाला था और कोडावा धार्मिक परंपराओं और अनुष्ठानों में ब्राह्मणों की कोई भूमिका नहीं थी. लगभग 150 साल पहले, 19वीं शताब्दी के मध्य में अंग्रेजों द्वारा कोडागु या कूर्ग (Kodagu or Coorg) की रियासत को जीत लेने के बाद, पुरोहितों की नौकरियों को पड़ोसी मैसूर साम्राज्य (Mysore kingdom) के ब्राह्मणों को हस्तांतरित कर दिया गया था.

"हम कोडागु जिले के मूल निवासी, हमारे पास पूजा करने का पहला अधिकार"
तब से, ब्राह्मण तालकावेरी में सभी धार्मिक गतिविधियों का आयोजन कर रहे हैं, जो कोडावा और अन्य समुदायों के लिए एक पवित्र स्थान है. अम्मा कोडावा समुदाय के नेता बनंदा एन प्रथु के अनुसार, उनके समुदाय ने कुछ कारणों से ब्राह्मणों को पूजा के अधिकार हस्तांतरित किए थे. हालांकि, उनका तर्क है कि उनके दावे को साबित करने के लिए सैकड़ों ऐतिहासिक रिकॉर्ड हैं कि अम्मा कोडावा का कावेरी नदी और इसकी उत्पत्ति के साथ एक प्राचीन संबंध है.
वे कहते हैं, “हम कोडागु जिले के मूल निवासी हैं. हम प्रकृति पूजक हैं. कावेरी हमारी देवी हैं. हमारे पास तालकावेरी और इग्गुथप्पा मंदिर में पूजा करने का पहला अधिकार है."



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पुजारी नारायण अचार और उनकी पत्नी की मौत की खबर सुनकर उनकी दोनों बेटियां, जो ऑस्ट्रेलिया में रहती हैं, जल्दी से भारत वापस आईं और उन्होंने माता-पिता की अंतिम क्रिया को संपन्न किया.
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