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कोलकाता के नेता-डॉक्टर, जो सिर्फ 50 रुपये में करते हैं कोरोना पीड़ित, सामान्य मरीजों की डायलिसिस

डॉ हलीन ने 2008 में पांच बेड वाली यूनिट अपने घर पर शुरू की थी (सांकेतिक फोटो)
डॉ हलीन ने 2008 में पांच बेड वाली यूनिट अपने घर पर शुरू की थी (सांकेतिक फोटो)

डॉ हलीम के पास कुल 7 लोगों की टीम है. जो लॉकडाउन (Lockdown) शुरू होने के बाद से अब तक 2,190 लोगों का डायलिसिस (Dialysis) कर चुकी है.

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नई दिल्ली. कोविड-19 महामारी (Covid-19 Pandemic) का प्रसार रोकने के लिए देश भर में 25 मार्च से लगाए गये लॉकडाउन (Lockdown) के बाद से अन्य कई गंभीर बीमारियों (Serious Diseases) के रोगियों को इलाज मिल पाना मुश्किल होता जा रहा है. हाल ही में सामने आई एक सरकारी स्टडी में कहा गया था कि देशभर में कैंसर (Cancer) का इलाज करा रहे 64% लोगों पर लॉकडाउन का प्रभाव पड़ा था. लेकिन इस दौरान पश्चिम बंगाल में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के एक नेता, जो डॉक्टर भी हैं, मात्र 50 रुपये में लोगों को डायलिसिस (Dialysis) कर रहे हैं.

द प्रिंट ने अपनी एक रिपोर्ट में बताया है कि अपने इस काम से सुर्खियों में आए ये नेता एक 49 वर्षीय डॉक्टर हैं, जो कोलकाता (Kolkata) में पार्क स्ट्रीट के पास एक छोटी डायलिसिस यूनिट चलाते हैं. हलीम के पास कुल 7 लोगों की टीम है. जो लॉकडाउन (Lockdown) शुरू होने के बाद से अब तक 2,190 लोगों का डायलिसिस (Dialysis) कर चुकी है. इस टीम में 3 डॉक्टर और 4 टेक्नीशियन हैं. हलीम की यह यूनिट सिर्फ कोरोना संक्रमित (Corona Infected) और गैर संक्रमित सभी रोगियों को डायलिसिस की सुविधा दे रही है. हालांकि संक्रमण के लक्षण वालों को डायलिसिस के बाद जांच के लिए सरकारी फीवर क्लीनिक (Government Fever Clinic) में भर्ती होना जरूरी होता है.

2019 के लोकसभा चुनाव भी लड़े थे फवाद हलीम
बता दें कि फवाद हलीम वाममोर्चा के शासन में 1982 से 2011 तक पश्चिम बंगाल विधानसभा के स्पीकर रहे अब्दुल हलीम के बेटे हैं. 2019 में फवाद ने भी माकपा के टिकट पर डायमंड हार्बर से चुनाव लड़ा था लेकिन सीएम ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी से हार गये थे.
वर्तमान मे वे पीपुल्स रिलीफ कमेटी के महासचिव भी हैं लेकिन 2008 में स्थापित स्वास्थ्य संकल्प पार्टी से संबंध नहीं है. हलीम ने बताया कि यह क्षेत्र की पहली ऐसी अकेली डायलिसिस यूनिट है, क्योंकि आम तौर पर अन्य डायलिसिस यूनिट किसी सरकारी या निजी अस्पताल से जुड़ी होती हैं.



स्कूल के दोस्तों और कुछ रिश्तेदारों के साथ मिल 2008 में शुरू की यूनिट
हलीम ने बताया कि उन्होंने स्कूल के दोस्तों और कुछ रिश्तेदारों के साथ मिलकर 2008 में पांच बेड वाली यूनिट अपने घर पर शुरू की थी.

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उन्होंने बताया कि शुरुआत में वे मरीजों से 350 रुपये लेते थे और यह दर उन्होंने कभी नहीं बढ़ाई थी. जबकि सरकारी अस्पतालों में भी 900 से 1200 तक हो सकता है. लेकिन कोविड-19 के प्रसार को देखते हुए उन्होंने डायलिसिस के खर्च को बेहद घटा दिया और रोगियों से मात्र 50 रुपये लेना शुरू कर दिया.
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