पश्चिम बंगाल में अनोखा पांडाल, मां दुर्गा की जगह लगाई अप्रवासी महिला मजदूर की मूर्ति

कोलकाता के एक पांडाल में यह मूर्ति लगाई गई है. (तस्वीर-ट्विटर)
कोलकाता के एक पांडाल में यह मूर्ति लगाई गई है. (तस्वीर-ट्विटर)

दक्षिणी कोलकाता (South Kolakata) के बेहाला इलाके (Behala) में एक दुर्गा पूजा कमेटी (Durga Puja committee) ने इस बार अपने पांडाल में मां दुर्गा की जगह एक अप्रवासी मजदूर महिला (Migrant Woman) की मूर्ति लगाने का फैसला किया है. इसके जरिए कोरोना वायरस के दौरान अप्रवासी मजदूरों को हुई तकलीफों को प्रदर्शित किया गया है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 16, 2020, 5:56 AM IST
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 कोलकाता. पश्चिम बंगाल (West Bengal) में दुर्गा पूजा (Durga Puja 2020) सिर्फ एक सामान्य त्योहार नहीं है बल्कि वहां की संस्कृति का हिस्सा भी है. यही वजह है कि पश्चिम बंगाल के मूर्ति कलाकार सिर्फ अपने राज्य में ही नहीं बल्कि बिहार, यूपी, झारखंड और ओडिशा में मूर्तियां बनाते मिल जाएंगे. बिहार, झाखंड और पश्चिम बंगाल में दुर्गा पूजा के पांडाल भी कई बार सामाजिक संदेशों वाले स्वरूप में बनाए जाते हैं. इस बार की दुर्गा पूजा में भी कोलकाता का एक दुर्गा पूजा पांडाल अलग तरह के प्रयोग की वजह से चर्चा में है.

कोरोना वायरस के दौरान अप्रवासी मजदूरों को मिले को दर्द दिखाने का प्रयास
दक्षिणी कोलकाता के बेहाला इलाके में एक दुर्गा पूजा कमेटी ने इस बार अपने पांडाल में मां दुर्गा की जगह एक अप्रवासी मजदूर महिला की मूर्ति लगाने का फैसला किया है. इस महिला के हाथों में छोटा बच्चा भी है. पूजा कमेटी के संचालकों का कहना है कि उन्होंने कोरोना वायरस के दौरान अप्रवासी मजदूर महिलाओं के दुख को प्रदर्शित करने के लिए यह मूर्ति लगाने का फैसला किया है. ये मूर्ति न सिर्फ उनके दुख को प्रदर्शित करती है बल्कि साहस को भी सलाम करती है.





देवी सरस्वती और लक्ष्मी की जगह भी लगाईं अन्य मूर्तियां
इस पांडाल में सिर्फ दुर्गा ही नहीं पांडालों में लगने वाली अन्य मूर्तियां भी बदली गई हैं. जैसे देवी लक्ष्मी और सरस्वती की जगह पर अप्रवासी मजदूरों की बच्चियों को प्रदर्शित किया गया है. इनमें से एक के हाथ में उल्लू है जो देवी लक्ष्मी की मूर्ति का द्योतक है और दूसरी बत्तख के साथ में है जो देवी सरस्वती को प्रदर्शित करती है. बत्तख को देवी सरस्वती का वाहन माना जाता है. इन सभी के साथ एक हाथी के सिर वाले बच्चे को भी प्रदर्शित किया गया है जो भगवान गणेश का द्योतक है.

क्या कहती हैं मूर्ति बनाने वाली कलाकार
पांडाल में मुख्य अप्रवासी मजदूर महिला को देवी दुर्गा की तरफ जाते हुए दिखाया गया है. वो राहत की तलाश में उनकी तरफ जा रही है. दरअसल इस पांडाल की थीम ही 'राहत' है. अप्रवासी मजदूर महिला की मूर्ति बनाने वाली कलाकार रिंकू दास ने द टेलीग्राफ अखबार से बातचीत में कहा है- दरअसल उस महिला को ही देवी के तौर पर प्रदर्शित किया गया है. वो साहसी है और तपती धूप में भूखे-प्यासे अपने बच्चों के साथ जा रही है. वो खाना, पानी और अपने बच्चों के लिए राहत और मदद की तलाश कर रही है.
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