कोरेगांव-भीमा : सीजेआई ने गौतम नवलखा की याचिका पर सुनवाई से खुद को किया अलग

प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि
प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि

प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई (Ranjan Gogoi) ने कहा कि मामले को उस पीठ के समक्ष सूचीबद्ध करें जिसमें मैं शामिल न रहूं. उन्होंने याचिका पर सुनवायी से सोमवार को खुद को अलग कर लिया.

  • भाषा
  • Last Updated: September 30, 2019, 3:57 PM IST
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नई दिल्ली. भारत के प्रधान न्यायाधीश (Chief Justice of India) रंजन गोगोई (Ranjan Gogoi) ने कोरेगांव-भीमा हिंसा (Koregaon-Bhima violence) मामले से खुद को अलग कर लिया है. नागरिक अधिकार कार्यकर्ता गौतम नवलखा के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी को रद्द करने से इनकार करने वाले बाम्बे हाईकोर्ट (Bombay High Court) के आदेश को चुनौती देने की याचिका पर सुनवायी से सोमवार को गोगोई ने खुद को अलग कर लिया. प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि मामले को उस पीठ के समक्ष सूचीबद्ध करें जिसमें मैं शामिल न रहूं. इस मामले को प्रधान न्यायाधीश, न्यायमूर्ति एस ए बोबडे और न्यायमूर्ति एस अब्दुल नजीर की पीठ के समक्ष पेश किया गया था. महाराष्ट्र सरकार ने इस मामले में कैविएट दायर कर अनुरोध किया कि कोई भी आदेश पारित करने से पहले उसकी बात सुनी जाए.

क्या है पूरा मामला
13 सितंबर को उच्च न्यायालय ने 2017 में कोरेगांव-भीमा हिंसा और कथित माओवादी संपर्कों के लिए नवलखा के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी को रद्द करने से इनकार कर दिया था. उच्च न्यायालय ने कहा कि मामले की गंभीरता को देखते हुए हमें लगता है कि विस्तृत जांच की जरूरत है. पुणे पुलिस ने 31 दिसंबर 2017 को एल्गार परिषद के बाद जनवरी 2018 में नवलखा और अन्यों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की थी. एल्गार परिषद आयोजित करने के एक दिन बाद पुणे जिले के कोरेगांव भीमा में हिंसा भड़क गई थी.

पुलिस ने लगाया था यह भी आरोप
पुलिस ने यह भी आरोप लगाया कि इस मामले में नवलखा और अन्य आरोपियों के माओवादियों से संबंध हैं और वे सरकार को गिराने का काम कर रहे हैं. हालांकि उच्च न्यायालय ने नवलखा की गिरफ्तारी पर संरक्षण तीन सप्ताह की अवधि के लिए बढ़ा दिया था ताकि वह उसके फैसले के खिलाफ उच्चतम न्यालय अपील कर सकें.



नवलखा के अलावा इन लोगों पर मामला दर्ज किया गया
नवलखा और अन्य आरोपियों पर गैरकानूनी गतिविधियां निवारण कानून (यूएपीए) और भारतीय दंड संहिता के प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया गया. नवलखा के अलावा वरवरा राव, अरुण फरेरा, वर्नोन गोन्साल्विस और सुधा भारद्वाज मामले में अन्य आरोपी हैं.

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