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कुलभूषण जाधव केस: अगर पाकिस्तान ने ICJ का फैसला नहीं माना तो क्या होगा?

कुलभूषण जाधव केस : अगर पाकिस्तान ने ICJ का फैसला नहीं माना तो क्या होगा?

कुलभूषण जाधव केस : अगर पाकिस्तान ने ICJ का फैसला नहीं माना तो क्या होगा?

आईसीजे कोर्ट के बाद जिस तरह से पाकिस्तान की सरकार की ओर से संकेत मिले हैं उससे लगता है कि यह मामला संयुक्त राष्ट्र में जा सकता है.

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    भारतीय नागरिक कुलभूषण जाधव मामले में इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस (ICJ)ने फैसला दिया है कि पाकिस्तान कुलभूषण को दी गई मौत की सजा की समीक्षा करे और उन्हें राजनयिक पहुंच मुहैया कराए. अब सवाल ये उठता है कि क्या इंटरनेशनल कोर्ट के फैसले को मानने के लिए कोई देश मजबूर हो सकता है या नहीं? जानकारों की मानें तो जाधव के मामले में सैद्धांतिक तौर पर पाकिस्तान अईसीजे का फैसला मानने के लिए बाध्य होगा.

    भारत की अपील वियना संधि पर आधारित है. इस संधि पर पाकिस्तान और भारत ने हस्ताक्षर किए हैं. इस संधि के मुताबिक अगर कोई मामला अंतरराष्ट्रीय कोर्ट में जाता है तो दोनों देशों को इस कोर्ट में दिए फैसले को मानना होगा. आईसीजे कोर्ट के बाद जिस तरह से पाकिस्तान की सरकार की ओर से संकेत मिले हैं उससे लगता है कि यह मामला संयुक्त राष्ट्र में जा सकता है. पाकिस्तान के पीएम इमरान खान ने ICJ के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वह कानून के आधार पर इस मामले में आगे बढ़ेंगे.

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    गौरतलब है कि इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस (ICJ)ने पाकिस्तान में कुलभूषण को मौत की सजा के खिलाफ भारत की याचिका पर बुधवार को अपना फैसला सुनाया था. आईसीजे ने 15-1 के बहुमत से कहा कि जाधव की मौत की सजा पर रोक बरकरार रहेगी. पाकिस्तान की सैन्य अदालत में उन्हें दोषी ठहराने और उन्हें दी गई सजा पर पुनर्विचार करने की जरूरत है. आईसीजे ने मामले में पाकिस्तान की आपत्तियों को खारिज कर दिया. साथ ही पाकिस्तान के इस तर्क को भी खारिज कर दिया कि भारत ने जाधव की वास्तविक नागरिकता की जानकारी नहीं दी है.

    अमेरिका ने नहीं माना था ICJ का फैसला
    वियना संधि के तहत भले ही भारत और पाकिस्तान को इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस (ICJ)के फैसले को मानने के लिए बाध्य होना पड़ेगा लेकिन कई देश ऐसे भी हैं जिन्होंने आईसीजे के फैसले को मानने से इंकार कर दिया था. एक बार अमेरिकी कोर्ट ने मैक्सिको के 51 नागरिकों को दोषी मानकर सजा सुनाई थी. मैक्सिको ने आईसीजे के इसकी अर्जी दाखिल की थी. 2004 में आईसीजे ने अमेरिका के खिलाफ फैसला सुनाया लेकिन अमेरिका ने फैसले को नहीं माना.

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