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आप में 'अविश्‍वास': कुमार बोले- ये वो पार्टी नहीं जिसे हमने बनाया था

पंजाब विधानसभा चुनाव और दिल्ली निकाय चुनावों में हार के बाद से ही आम आदमी पार्टी के बड़े नेताओं के बीच मतभेद की स्थिति है. (Getty Images)

पंजाब विधानसभा चुनाव और दिल्ली निकाय चुनावों में हार के बाद से ही आम आदमी पार्टी के बड़े नेताओं के बीच मतभेद की स्थिति है. (Getty Images)

पंजाब विधानसभा चुनाव और दिल्ली निकाय चुनावों में हार के बाद से ही आम आदमी पार्टी के बड़े नेताओं के बीच मतभेद की स्थिति ...अधिक पढ़ें

    पंजाब विधानसभा चुनाव और दिल्ली निकाय चुनावों में हार के बाद से ही आम आदमी पार्टी के बड़े नेताओं के बीच मतभेद की स्थिति पैदा हो गई है. इसी साल मई में आप के संस्थापक सदस्य और वरिष्ठ नेता कुमार विश्वास ने भी पार्टी के प्रति अपनी नाराजगी जता दी थी.

    ओखला के विधायक अमानतुल्लाह खान ने विश्वास को बीजेपी का एजेंट बता दिया था. विश्वास को मनाने के लिए पार्टी ने खान को निलंबित कर दिया था और राजस्थान में विश्वास को पार्टी संगठन का प्रभारी बना दिया था.

    इस घटना के पांच महीने बाद और पार्टी की नेशनल काउंसिल की मीटिंग से सिर्फ दो दिन पहले आप ने खान के निलंबन को रद्द कर दिया है. कुमार विश्वास पार्टी के इस फैसले से नाखुश हैं.

    विश्वास ने न्यूज 18 से बात की और बताया कि आखिर कैसे पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने उनको धोखा दिया और आखिर उन्हें ऐसा क्यों लगता है कि पार्टी अपने मूल्यों को खो चुकी है.

    आप विधायक अमानतुल्लाह खान ने आपको भाजपा एजेंट बताया था. पहले पार्टी ने उन्हें सस्पेंड कर दिया और अब उनका सस्पेंशन रद्द कर दिया गया. पार्टी के इस फैसले पर आप क्या कहना चाहते हैं?
    अमानतुल्लाह लोक जनशक्ति पार्टी से आए हैं. उन पर सांप्रदायिक नफरत फैलाने तक का आरोप लगा है. मैं इन पर कोई टिप्पणी नहीं करना चाहता. वो केवल एक मोहरा हैं. 6 महीने पहले मैं एक नेता के पास गया था जो अन्य पार्टी से आकर हमसे जुड़ गए. हमारे पुराने कार्यकर्ताओं में से एक जो अन्ना के अनशन के दिनों से हमसे जुड़े थे. वो उनसे परेशान थे. उस नेता ने मुझसे बताया कि ये अन्ना के लोग उपद्रवी हैं. हमें उनके लिए एक अलग पार्टी बनानी चाहिए. मैंने उनसे कहा कि ये पार्टी अन्ना के लोगों के द्वारा ही बनाई गई है और आप तो बाद में जुड़े हैं.

    लोग हमें इसलिए पसंद करते हैं क्योंकि हम वैकल्पिक राजनीति लाए थे. हम वो सब नहीं करते जो दूसरी पार्टियां करती हैं. हमें अपने पोस्टरों में नेताओं की तस्वीरों का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए. हम जाति या धर्म की राजनीति नहीं करते. उदाहरण के तौर पर 2013 के चुनाव में हमने आरकेपुरम् से शाजिया इल्मी को खड़ा किया था जो एक हिंदू सीट मानी जाती है. वहीं मुस्तफाबाद जिसे मुस्लिम सीट माना जाता है हमने वहां से कपिल धामा को खड़ा किया. लोगों ने इन्हें पसंद किया. मैं कुछ राष्ट्रीय मुद्दों पर पार्टी से असहमत हूं, लेकिन इसका ये मतलब नहीं है कि मैं विद्रोही हूं. ये पार्टी के आंतरिक लोकतंत्र का मामला है अगर मैं अपनी राय पार्टी के फोरम में रख सकूं. पार्टी को अलग-अलग आवाजों को दबाने की जगह उन्हें सुनना सीखना चाहिए.

    आपने कहा कि अमानतुल्लाह खान केवल मोहरा हैं और इसके पीछे कोई और है. आप किसकी बात कर रहे हैं. कहीं आप अरविंद केजरीवाल की ओर तो इशारा नहीं कर रहे.
    जनता को हर चीज समझ में आती है. मैं किसी की ओर इशारा नहीं कर रहा. हमारे कार्यकर्ता और समर्थक सब कुछ जानते हैं.

    अब अरविंद केजरीवाल के साथ आपके रिश्ते कैसे हैं?
    मेरा मानना है कि नेताओं के बीच निजी संबंधों को पार्टी के मामलों से प्रभावित नहीं करना चाहिए. सार्वजनिक मंच पर इस बारे में मेरा बात करना ठीक नहीं होगा. लेकिन मैं बस यही कहना चाहता हूं कि अन्ना के आंदोलन के समय से जो लोग हमसे जुड़े हुए हैं वे बिलकुल डरें नहीं और सच बोलें.

    क्या केजरीवाल सच नहीं बोल रहे?
    वह कुछ नहीं कह रहे. मैंने हाल के दिनों में उनकी ओर से कोई बयान नहीं सुना. लेकिन मैं सभी मुद्दों पर बोलना जारी रखूंगा. अगर विदेश मंत्री संयुक्त राष्ट्र जाती हैं और पाकिस्तान को बेनकाब करती हैं तो मैं उनकी प्रशंसा करूंगा. मैं उनके साथ खड़ा रहूंगा. वह भी इसके बावजूद कि सुषमा जी ने मुझे अपने ट्विटर अकाउंट से ब्लॉक कर दिया है. लेकिन बीएचयू में अगर लड़कियों की पिटाई होगी और प्रधानमंत्री नींद में रहेंगे तो मैं सरकार के खिलाफ बोलूंगा.

    जब आपको आपकी पार्टी के लोग ही एजेंट कहकर बुलाते हैं तो उस पर आपकी क्या प्रतिक्रिया होती है?
    मैं किसी दूसरी पार्टी का सदस्य नहीं रहा हूं. जो लोग मेरे बारे में ऐसा कुछ बोलते हैं वो समाजवादी पार्टी और कांग्रेस जैसी दूसरी पार्टियों के अनुयायी रहे हैं. हमारे पास तो एक ऐसा शख्स भी है जो 40 सालों से आरएसएस का सदस्य रहा है. अब ये लोग मुझे बताएंगे कि पार्टी के प्रति वफादारी क्या है?

    पार्टी की नेशनल काउंसिल मीटिंग 2 नवंबर को है. आप क्या उम्मीद करते हैं कि पार्टी क्या करेगी?
    काउंसिल मीटिंग का एजेंडा बिलकुल साफ है. संजय सिंह जी देश की आर्थिक स्थिति पर बात करेंगे और आशुतोष जी राजनीतिक प्रस्तावों के बारे में बात करेंगे. पार्टी की ये पहली काउंसिल मीटिंग है और इसमें मैं वक्ता नहीं हूं. मैं वहां श्रोता के तौर पर जाऊंगा. अगर पार्टी मुझे कुछ कहने के लिए कहती है तो मैं बोलूंगा. भविष्य में हमें अपने जड़ों की ओर वापस लौटना होगा. हमें भ्रष्टाचार विरोध, स्वराज के सिद्धांतों और आंतरिक पार्टी की आम सहमति की ओर लौटना होगा.

    आम आदमी पार्टी के कई सदस्य अब पार्टी छोड़ चुके हैं, लेकिन आप डटे रहे. क्या आपको लगता है कि पार्टी ने अपना रास्ता खो दिया है? अगर हां, तो क्या अब इसको दुरुस्त नहीं किया जा सकता?
    नहीं, इसको दुरुस्त किया जा सकता है. लेकिन ये कहना गलत होगा कि यह वही पार्टी है जिसकी हमने स्थापना की थी. लोग हमारा सम्मान करते थे लेकिन उनमें से बहुत से लोग अब ऐसा नहीं करते. हमें बैठकर इस मुद्दे पर बात करनी होगी कि आखिर हमने लोगों का सम्मान क्यों गंवा दिया है. दिल्ली विधानसभा चुनाव के बाद हमने सात चुनाव गंवाए हैं. हम केवल बवाना उपचुनाव जीत पाए हैं. जो लोग पार्टी से बाहर गए थे वो अपने निजी गरिमा पर हुए हमले का सामना नहीं कर पाए थे. उन्हें पार्टी में रहकर ही लड़ना चाहिए था.

    Tags: Aam aadmi party, Arvind kejriwal

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