कुमारस्वामी का विवादित बयान, कहा- PM मोदी की मौजूदगी विक्रम के लिए 'अशुभ' साबित हुई

कर्नाटक (Karnataka) के पूर्व मुख्यमंत्री एच डी कुमारस्वामी (HD Kumaraswamy) ने यह बयान देकर एक बड़ा विवाद खड़ा कर दिया कि इसरो (ISRO) मुख्यालय में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी लैंडर विक्रम के लिए 'अशुभ' साबित हुई.

News18Hindi
Updated: September 13, 2019, 6:17 AM IST
कुमारस्वामी का विवादित बयान, कहा- PM मोदी की मौजूदगी विक्रम के लिए 'अशुभ' साबित हुई
कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री एच डी कुमारस्वामी ने चंद्रयान-2 को लेकर दिया विवादित बयान.
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Updated: September 13, 2019, 6:17 AM IST
बेंगलुरु. भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) की ओर से चंद्रयान-2 (CHANDRAYAN-2) के लैंडर विक्रम (Lander vikram) से संपर्क बहाल करने की कोशिशें जारी हैं. दुनिया (world) भर से लोग इसरो के चंद्रयान-2 मिशन की तारीफ करते नहीं थक रहे हैं. लोगों की शुभकामनाओं के बीच कर्नाटक (Karnataka) के पूर्व मुख्यमंत्री एच डी कुमारस्वामी (HD Kumaraswamy) ने यह बयान देकर एक बड़ा विवाद खड़ा कर दिया कि इसरो मुख्यालय में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी लैंडर विक्रम के लिए 'अशुभ' साबित हुई. यही कारण है कि चंद्रयान-2 मिशन के लैंडर विक्रम की सॉफ्ट लैंडिंग नहीं हो सकी.

कुमारस्वामी ने मैसूर में एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, मैं नहीं जानता, लेकिन संभवत: वहां उनके कदम रखने का समय इसरो वैज्ञानिकों के लिए अपशगुन लेकर आया. उन्होंने कहा कि मोदी छह सितंबर को देश के लोगों को यह संदेश देने के लिए बेंगलुरु पहुंचे कि चंद्रयान के प्रक्षेपण के पीछे उनका हाथ है, जबकि यह परियोजना 2008-2009 के दौरान की संप्रग सरकार और वैज्ञानिकों का परिणाम थी.

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कुमारस्वामी ने कहा, बेचारे वैज्ञानिकों ने 10 से 12 साल कड़ी मेहनत की. चंद्रयान-2 के लिए कैबिनेट की मंजूरी 2008-09 में दी गई थी और इसी साल फंड जारी किया गया था. उन्होंने कहा, प्रधानमंत्री यहां प्रचार पाने के लिए आए, जैसे मानो चंद्रयान-2 का प्रक्षेपण उन्हीं के कारण हुआ.

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लैंडर विक्रम अभी निष्क्रिय है लेकिन उससे रेडियो फ्रीक्वेंसी के जरिए संपर्क साधने की कोशिश की जा रही है


लैंडर विक्रम को जिंदा करने के लिए नासा कर रहा इसरो की मदद
भारत का चंद्रयान-2 मिशन अभी खत्म नहीं हुआ है. इसरो के वैज्ञानिकों ने लैंडर विक्रम को जिंदा करने के लिए पूरी ताकत झोंक दी है. अब इस अभियान में दुनिया का सबसे बड़ा स्पेस रिसर्च ऑर्गनाइजेशन नासा भी जुट गया है. नासा की जेट प्रॉपलशन लैबोरेट्री (NASA/JPL) ने लैंडर विक्रम से संपर्क साधने के लिए रेडियो फ्रीक्वेंसी भेजी है. नासा ये काम डीप स्पेस नेटवर्क (DSN) के जरिए कर रहा है.
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First published: September 13, 2019, 6:17 AM IST
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