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अवमानना मामले में कुणाल कामरा का माफी मांगने से इनकार, सुप्रीम कोर्ट के खिलाफ किया था ट्वीट

कुणाल कामरा की फाइल फोटो
कुणाल कामरा की फाइल फोटो

कुणाल कामरा (Kunal Kamra) ने नोटिस के संबंध में दिए गए जवाब में कहा कि जजों को भी चुटकुलों से सुरक्षा नहीं मिलती है. कॉमेडियन ने कहा कि न्यायपालिका में लोगों का भरोसा उसके खुद के कामों से बनता है, किसी टिप्पणी या आलोचना से नहीं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 29, 2021, 9:15 PM IST
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नई दिल्ली. कॉमेडियन कुणाल कामरा ने सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) और न्यायाधीशों पर की गई टिप्पणी के मामले में माफी मांगने से इनकार कर दिया है. मामले की सुनवाई से पहले अदालत को दिए हलफनामे में उन्होंने कहा है कि ताकतवर लोग औऱ संस्थाओं ने अगर फटकार या आलोचना को सहन करना जारी नहीं रखा, तो हमारा देश बंधक कलाकारों और पालतू कुत्तों की तरह हो जाएगा. इसके अलावा उन्होंने कश्मीर (Kashmir) का जिक्र करते हुए कोर्ट पर तंज भी कसा है.

कॉमेडियन ने अपने हलफनामे में लिखा, 'अगर अदालत को लगता है कि उसने हद पार की है और उसका इंटरनेट अनिश्चितकाल के लिए बंद करना चाहता है, तो ऐसे में वो हर 15 अगस्त पर अपने कश्मीरी दोस्तों की तरह स्वतंत्रता दिवस के कार्ड भेजेगा.' कामरा को बीते साल 18 दिसंबर को सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए कथित रूप से मजाक उड़ाने के चलते अवमानना का नोटिस दिया गया था. अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने उनके खिलाफ केस चलाने की अनुमति दे दी थी.





नोटिस के संबंध में दिए गए जवाब में कामरा ने कहा कि जजों को भी चुटकुलों से सुरक्षा नहीं मिलती है. कॉमेडियन ने कहा कि न्यायपालिका में लोगों का भरोसा उसके खुद के कामों से बनता है, किसी टिप्पणी या आलोचना से नहीं. इस दौरान उन्होंने कॉमेडियन मुनव्वर फारूकी की गिरफ्तारी का भी जिक्र किया है. कामरा ने कहा, 'हम अभिव्यक्ति और बोलने की आजादी पर हमले के गवाह बन रहे हैं. मुनव्वर फारूकी को ऐसे चुटकुलों के लिए जेल भेजा गया, जिसे उसने सुनाया ही नहीं है.' उन्होंने कहा, 'स्कूली छात्रों को राजद्रोह को लेकर पूछताछ की जा रही है.'
कामरा के हलफनामे में कहा गया है, 'ये चुटकुले वास्तविक नहीं है और ऐसा होने का दावा भी नहीं करते हैं. ज्यादातर लोग ऐसे चुटकुलों पर प्रतिक्रिया नहीं देते हैं, जिन पर उन्हें हंसी नहीं आती है. वे उन्हें ऐसे नजरअंदाज कर देते हैं, जैसे हमारे राजनेता अपने आलोचकों को करते हैं. एक चुटकुले का जीवन यही खत्म हो जाना चाहिए. मैं नहीं मानता कि जजों समेत किसी भी बड़ी अथॉरिटी को केवल इसलिए अपना काम छोड़ देना चाहिए कि उन व्यंग या चुटकुले कहे जा रहे हैं.'

शुक्रवार को जस्टिस अशोक भूषण, आर सुभाष रेड्डी और एमआर शाह ने इस मामले की सुनवाई की. इसके अलावा बेंच कॉमेडियन रचिता तनेजा को जारी कारण बताओ नोटिस पर भी सुनवाई करेगी.
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