नीति आयोग ने राज्यों से कहा- जमीन के बेहतर इस्तेमाल के लिए KVIC मॉडल अपनाएं

नीति आयोग ने राज्यों से कहा- जमीन के बेहतर इस्तेमाल के लिए KVIC मॉडल अपनाएं
नीति आयोग के सीईओ अमिताभ कांत (फाइल फोटो)

केंद्र सरकार (Central Government) के थिंकटैंक नीति आयोग (Niti Ayog) ने राज्यों से कहा है कि वे केवीआईसी के मॉडल के आधार पर अपनी वन भूमि (Forest Land) और कृषि भूमि (Agricultural Land) पर चंदन और बांस की पौध लगाएं.

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नई दिल्ली. खादी और ग्रामोद्योग आयोग (Khadi and Village Industries Commission) ने रविवार को बताया कि केंद्र सरकार (Central Government) के थिंकटैंक नीति आयोग (Niti Ayog) ने राज्यों से कहा है कि वे आयोग के मॉडल के आधार पर अपनी वन भूमि (Forest Land) और कृषि भूमि (Agricultural Land) पर चंदन और बांस की पौध लगाएं, साथ ही राज्यों में किसानों को भी ऐसे व्यावसायिक वृक्षारोपण के लिए प्रोत्साहित करें. केवीआईसी (KVIC) ने एक बयान में कहा, ‘‘चंदन और बांस का वृक्षारोपड़, जो संपत्तियों के मौद्रिकरण और वित्तीय स्थायित्व के लिए केवीआईसी की अपनी तरह की पहली शुरुआत है, उसे पूरे देश में अपनाना चाहिए.’’

आयोग के अनुसार नीति आयोग के सीईओ अमिताभ कांत (Niti Aayog CEO Amitabh Kant) ने चार जुलाई को सभी मुख्य सचिवों को लिखे एक पत्र में अपने राज्यों में चंदन और बांस के बागान लगाने का अनुरोध करते हुए कहा, ‘‘केवीआईसी की इस कवायद से दो उद्देश्य पूरे होंगे- विशाल भूमि संसाधानों से कुछ आमदनी होगी और किसानों को वित्तीय मजबूती के लिए चंदन और बांस की व्यावसायिक खेती के लिए प्रोत्साहित किया जा सकेगा.’’

केवीआईसी ने बांस की विशेष किस्म के लगाए पेड़
केवीआईसी ने 262 एकड़ भूमि में फैले नासिक स्थित अपने प्रशिक्षण केंद्र में चंदन और बांस के पेड़ लगाए थे. इसी पृष्ठभूमि में कांत ने यह बात कही.
केवीआईसी ने चंदन और अगरबत्ती बनाने में काम आने वाली बांस की विशेष किस्म बंबूसी टुल्डा के 500-500 पेड़ लगाए. केवीआईसी को 10-15 वर्षों में तैयार होने वाले चंदन के पेड़ों से 50 करोड़ रुपये मिलने की उम्मीद है, जबकि बांस के पेड़ों से तीन साल बाद हर साल चार से पांच लाख रुपये मिलने का अनुमान है.



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नीति आयोग ने अर्थव्यवस्था में सुधार के दिए थे संकेत
बता दें कुछ दिन पहले नीति आयोग के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) अमिताभ कांत ने कहा था कि कोविड-19 महामारी से प्रभावित अर्थव्यवस्था में सुधार के संकेत दिख रहे हैं और जल्दी ही इसमें तेजी आएगी. कोरोना वायरस महामारी और उसकी रोकथाम के लिये ‘लॉकडाउन’ से विभिन्न क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियां पूरी तरह ठप हो गयी थीं. अब धीरे-धीरे अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों को खोला जा रहा है. सरकार ने अर्थव्यवस्था को गति देने के लिये प्रोत्साहन पैकेज की घोषणा समेत नीतिगत कदम उठाये हैं.

कांत ने ‘फिक्की फ्रेम्स 2020’ में कहा, ‘‘मैं इस बात पर पूरा भरोसा करने वाला हूं कि भारत की स्थिति जल्द बेहतर होगी. हम अर्थव्यवस्था में सुधार के संकेत पहले ही देख रहे हैं. हम देख रहे हैं कि दैनिक उपयोग का सामान बनाने वाली कंपनियों जैसे क्षेत्र पटरी पर आ चुके हैं.’’

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बढ़ रही हैं आर्थिक गतिविधियां
आर्थिक गतिविधियों में नरमी से सरकार के राजस्व संग्रह पर असर पड़ा है. हालांकि धीरे-धीरे अर्थव्यवस्था को खोले जाने से आर्थिक गतिविधियां बढ़ रही हैं. जून में जीएसटी संग्रह 90,917 करोड़ रुपये रहा जो मई में 62,009 करोड़ रुपये तथा अप्रैल में 32,294 करोड़ रुपये था. ईंधन और बिजली मांग में भी अप्रैल और मई के मुकाबले तेजी देखी जा रही है.

कांत ने कहा कि महामारी एक बड़ी चुनौती है और यह केवल भारत के लिये ही नहीं बल्कि अमेरिका और यूरोपीय देशों समेत पूरी दुनिया के लिये है.
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