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AAP को सर्विस डिपार्टमेंट देने को तैयार नहीं हैं एलजी, केजरीवाल बोले-फैलेगी अराजकता

AAP को सर्विस डिपार्टमेंट देने को तैयार नहीं हैं एलजी, केजरीवाल बोले-फैलेगी अराजकता

लेफ्टिनेंट गवर्नर अनिल बैजल और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल

लेफ्टिनेंट गवर्नर अनिल बैजल और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल

केजरीवाल के नौ दिन के धरने के बाद उनकी उपराज्यपाल से ये पहली मुलाकात थी. सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद भी दिल्ली सरकार और उपराज्यपाल के बीच गतिरोध बरकरार है.

    दिल्ली सरकार और लेफ्टिनेंट गवर्नर अनिल बैजल के बीच एक बार फिर से विवाद बढ़ता जा रहा है. अब लेफ्टिनेंट गवर्नर इस बात के लिए राजी नहीं है कि सर्विस डिपार्टमेंट का नियंत्रण दिल्ली सरकार को दी जाए. शुक्रवार को मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा कि ये भारत के इतिहास में पहली बार है कि जब केंद्र सरकार ने खुले तौर पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश मानने से इनकार किया है.

    दिल्ली सरकार और उपराज्यपाल में अधिकारों की लड़ाई को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को अहम फैसला सुनाया था. पांच जजों के बेंच ने कहा कि असली ताकत मंत्रिपरिषद के पास है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि मंत्रिपरिषद के सारे फैसले उप-राज्यपाल को बताया जाना चाहिए. लेकिन इस दायरे से पुलिस, भूमि और लोक व्यवस्था को बाहर रखा गया था.

    उपराज्यपाल के साथ 25 मिनट तक हुई बैठक के बाद केजरीवाल ने मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि एलजी बैजल ने गृह मंत्रालय से सलाह मांगी थी. उन्हें बताया गया कि सेवाओं को दिल्ली सरकार को नहीं दिया जाना चाहिए.

    केजरीवाल के नौ दिन के धरने के बाद उनकी उपराज्यपाल से ये पहली मुलाकात थी. आप नेता ने कहा कि इससे देश में अराजकता फैल जाएगी.


    उन्होंने कहा, ‘‘ सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि तीन विषयों पुलिस, भूमि और लोक व्यवस्था को छोड़कर दिल्ली सरकार के पास अन्य विषयों में कार्यपालिका के अधिकार होंगे. उपराज्यपाल इस बात से सहमत नहीं हैं कि सेवाओं का नियंत्रण दिल्ली सरकार को सौंपा जाना चाहिए. ’’

    सुप्रीम कोर्ट द्वारा ऐतिहासिक निर्णय दिए जाने के कुछ ही घंटों बाद दिल्ली सरकार ने नौकरशाहों के तबादलों और नियुक्ति के लिए एक नई प्रणाली लागू की, जिसमें मुख्यमंत्री को अनुमति देने वाला प्राधिकार बना दिया गया.


    इस मामले में सेवा विभाग ने अनुपालन करने से ये कहकर इनकार कर दिया कि सुप्रीम कोर्ट ने 2016 में जारी अधिसूचना को खारिज नहीं किया है. इस अधिसूचना में तबादलों और नियुक्ति के लिए गृह मंत्रालय को प्राधिकार बनाया गया है.

    (भाषा से इनपुट के साथ)

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    Tags: Anil baijal, Arvind kejriwal

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