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LAC पर चीन के सैनिकों और वाहनों की गिनती तक बताती है भारतीय सेना की 'देसी' तकनीक

LAC पर चीन के सैनिकों और वाहनों की गिनती तक बताती है भारतीय सेना की 'देसी' तकनीक

तवांग जिले में प्रमुख तौर पर तीन विवादित जगह हैं. इनमें नामका चु घाटी, सुमदोरोंग चू और यांग्त्से का नाम शामिल है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Shutterstock)

तवांग जिले में प्रमुख तौर पर तीन विवादित जगह हैं. इनमें नामका चु घाटी, सुमदोरोंग चू और यांग्त्से का नाम शामिल है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Shutterstock)

India-China Update: स्वदेशी उपकरणों के अलावा भारत ने LAC और उससे आगे गहरे इलाकों में 24 घंटे निगरानी के लिए सैटेलाइट, रडार, ग्राउंड सेंसर्स, इजरायली UAV और एयरक्राफ्ट भी तैनात किए हैं. इन सभी जगहों से मिलने वाली जानकारी संयुक्त रूप से रूपा में डिविजनल सर्विलांस में प्राप्त होती है. इस जगह की सुरक्षा के लिए हर समय सेना के जवान तैनात रहते हैं. बीते हफ्ते 5 माउंटेन डिविजन के जनरल ऑफिसर कमांडिंग के मेजर जनरल जुबीन ए मिनवाला ने कहा था कि सेना तकनीक के जरिए युद्ध के मैदान में और पारदर्शिता तैयार कर रही है.

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    (अमृता नायक दत्त)

    नई दिल्ली. वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर चीन (China) की बढ़ती गतिविधियों पर नजर रखने के लिए भारतीय सेना (Indian Army) ने ‘देसी’ तरीका अपनाया है. सेना ने निगरानी के लिए स्वदेशी रूप से उपकरण तैयार किए हैं, जो पूर्वी सेक्टर में पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) की विवादित सीमा पर गश्त समेत कई गतिविधियों पर नजर रख सकेंगे. बीते हफ्ते ही पूर्वी सेना के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल मनोज पांडे ने कहा था कि PLA ने पूर्वी सीमाओं पर LAC पर अपनी वार्षिक अभ्यास की संख्या बढ़ा दी है.

    साथ ही उन्होंने यह भी बताया था कि LAC पर चीन की गश्ती बढ़ गई है. इन गतिविधियों की जानकारी हासिल करने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और अन्य तकनीकों के साथ सेना ने तैयारी की है. उदाहरण के लिए मेजर भव्य शर्मा ने फेस रिकॉग्निशन सॉफ्टवेयर बनाया है, जिसे PLA के जवानों को पहचानने के लिए LAC पर तैनात किया गया है. जब भी अरुणाचल प्रदेश में तवांग सेक्टर के पास विवादित इलाके में सैनिक नजर आएंगे, तो भारतीय पक्ष के पास इसकी जानकारी होगी. इस सॉफ्टवेयर में पहले से मौजूद डेटा है, जिसे सेना ने लंबे समय में हासिल किया है.

    सॉफ्टवेयर ‘पायथन’ लैंग्वेज कोड की मदद से चलता है और इसमें दो मॉड्यूल फेस डिटेक्शन और फेस रिकॉग्निशन हैं. यह सॉफ्टवेयर AI कंप्यूटर विजन तकनीक का इस्तेमाल करता है और लाइव फीड, रिकॉर्डेड वीडियो और फोटो से जानकारी हासिल करता है. अप्रैल में यह सॉफ्टवेयर 5 हजार रुपये में तैयार किया गया था. खास बात है कि यह बगैर इंटरनेट के काम करता है.

    मेजर शर्मा 5 माउंटेन डिविजन के सिग्नल्स रेजिमेंट से हैं. यह उन दो डिविजन्स में से एक है, जो तवांग सेक्टर और सेक्टर की सीमा LAC के संवेदनशील इलाकों का ध्यान रखते हैं. तवांग जिले में प्रमुख तौर पर तीन विवादित जगह हैं. इनमें नामका चु घाटी, सुमदोरोंग चू और यांग्त्से का नाम शामिल है. भारतीय सेना की तरफ से तैनात किए गए अन्य उपकरणों में पैन टिल्ट थर्मल इमेजर का नाम शामिल है.

    मौके पर मौजूद अधिकारियों का कहना है कि सॉफ्टवेयर को PLA के जवानों, उनके हल्के वाहनों, उनकी संख्या का आकलन और जानवरों की गतिविधियों का पता लगाने के लिए LAC के अग्रिम मोर्चों पर तैनात किया गया था. उपकरण के जरिए हासिल होने वाली जानकारी को सटीक और बेहतर बनाने के लिए डिजिटाइज किया गया था.

    स्वदेशी उपकरणों के अलावा भारत ने LAC और उससे आगे गहरे इलाकों में 24 घंटे निगरानी के लिए सैटेलाइट, रडार, ग्राउंड सेंसर्स, इजरायली UAV और एयरक्राफ्ट भी तैनात किए हैं. इन सभी जगहों से मिलने वाली जानकारी संयुक्त रूप से रूपा में डिविजनल सर्विलांस में प्राप्त होती है. इस जगह की सुरक्षा के लिए हर समय सेना के जवान तैनात रहते हैं.

    बीते हफ्ते 5 माउंटेन डिविजन के जनरल ऑफिसर कमांडिंग के मेजर जनरल जुबीन ए मिनवाला ने कहा था कि सेना तकनीक के जरिए युद्ध के मैदान में और पारदर्शिता तैयार कर रही है. उन्होंने कहा था, ‘हम पूरे हालात को लेकर हमारी जागरूकता बढ़ाने के लिए तकनीक का इस्तेमाल कर रहे हैं.’ सेना के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि जब तकनीक का इस्तेमाल मौके पर मौजूद शख्स के तौर पर नहीं किया जाता, तो यह सेना को दुश्मनों की जानकारी के तौर पर मदद करती है.

    Tags: China, Face Recognition, India, Indian army, LAC, PLA

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