कलकत्ता उच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की कमी

देश की सबसे पुरानी अदालतों में से एक कलकत्ता उच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या स्वीकृत क्षमता से आधे से भी कम है जिससे न्यायपालिका का कामकाज बुरी तरह प्रभावित हो रहा है

भाषा
Updated: September 17, 2017, 2:03 PM IST
कलकत्ता उच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की कमी
कलकत्ता उच्च न्यायालय (file photo/getty images)
भाषा
Updated: September 17, 2017, 2:03 PM IST
देश की सबसे पुरानी अदालतों में से एक कलकत्ता उच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या स्वीकृत क्षमता से आधे से भी कम है जिससे न्यायपालिका का कामकाज बुरी तरह प्रभावित हो रहा है. कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश निशिता महात्रे की सेवानिवृत्ति के बाद अगले सप्ताह न्यायाधीशों की संख्या 30 तक रह जाएगी. जबकि स्वीकृत न्यायाधीशों की संख्या 72 है. दिसंबर में और न्यायाधीशों की सेवानिवृत्ति के बाद इसकी संख्या महज 25 रह जाएगी.

कलकत्ता उच्च न्यायालय बार संघ के अध्यक्ष उत्तम मजूमदार ने कहा, अगर न्यायाधीशों की तुरंत नियुक्तियां नहीं की गई तो (उच्च न्यायालय में ) न्याय देने वाली व्यवस्था के चरमराने की आशंका है. उन्होंने बताया कि हमने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, भारत के प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा और केंद्रीय कानून मंत्री रवि शंकर प्रसाद से नए न्यायाधीशों लाने के लिए मिलने का समय मांगा है.

वकीलों ने 13 सितंबर को पश्चिम बंगाल के राज्यपाल के एन त्रिपाठी को एक ज्ञापन सौंपकर उनसे कलकत्ता उच्च न्यायालय में स्वीकृत क्षमता के अनुसार न्यायाधीशों के रिक्त पदों को भरने में हस्तक्षेप करने और तुरंत कदम उठाने की मांग की थी.

मजूमदार ने कहा, कलकत्ता उच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की स्वीकृत क्षमता 72 है जबकि अभी केवल 31 न्यायाधीश ही मौजूद है. अभी उच्च न्यायालय के समक्ष करीब तीन लाख मामले लंबित हैं. ज्ञापन में कहा गया है, पिछले तीन वर्षों में उच्च न्यायालय में केवल एक नियुक्ति के अलावा न्यायाधीशों की कोई नियुक्ति नहीं की गई.

करीब 600 वकीलों के हस्ताक्षर वाले पत्र में लिखा गया है, स्थिति चिंताजनक है और न्याय तथा शांति की भावना बहाल करने के लिए तुरंत कदम उठाने की जरुरत है. कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश निशिता महात्रे ने चार अगस्त को न्यायाधीशों की नियुक्तियां न किए जाने पर कहा था कि न्यायाधीशों की संख्या आधे से भी कम होने के कारण अदालत काम नहीं कर पा रही है.

न्यायाधीशों की नियुक्तियों में देरी पर केंद्र की आलोचना करते हुए उच्च न्यायालय की एक अन्य खंडपीठ ने 12 जुलाई को चेतावनी दी कि अगर तुरंत कदम नहीं उठाए गए तो  उचित कार्रवाई की जाएगी.
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