ऑक्सीजन सिलेंडर की कमी पर पर दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा- 'भगवान भरोसे चल रहा है देश'

ऑक्सीजन सिलेंडर (सांकेतिक फोटो)

ऑक्सीजन सिलेंडर (सांकेतिक फोटो)

दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High court) ने कहा कि राष्ट्रीय राजधानी में कोविड-19 संबंधी स्थिति ‘गंभीर’ हो गई है और कई अस्पतालों में ऑक्सीजन खत्म हो रही है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 23, 2021, 8:41 AM IST
  • Share this:
नई दिल्ली. देश के कोविड-19 (Coronavirus In India) की मौजूदा लहर से जूझने के बीच अस्पतालों में ऑक्सीजन सिलेंडर की कमी से टूटे कहर पर दिल्ली हाईकोर्ट  (Delhi High court) ने कहा कि 'हम सभी जानते हैं कि देश भगवान भरोसे चल रहा है.' कोविड-19 प्रबंधन को लेकर केंद्र सरकार को कड़ी फटकार के एक दिन बाद अदालत ने यह टिप्पणी की. इसके साथ ही हाईकोर्ट ने कहा कि यदि सरकार चाह ले तो कुछ भी कर सकती है, यहां तक की 'धरती को स्वर्ग' बना सकती है.

दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि राष्ट्रीय राजधानी में कोविड-19 संबंधी स्थिति ‘गंभीर’ हो गई है और कई अस्पतालों में ऑक्सीजन खत्म हो रही है. इसने केंद्र को निर्देश दिया कि वह सुनिश्चित करे कि शहर को आवंटन आदेश के अनुरूप निर्बाध रूप से ऑक्सीजन की आपूर्ति हो. बंबई हाईकोर्ट ने गुरुवार को केंद्र और महाराष्ट्र सरकार को कोरोना वायरस संक्रमण से निपटने के लिए अस्पतालों में बिस्तर, रेमडेसिविर इंजेक्शन, टीके और ऑक्सीजन सहित उपलब्ध संसाधनों के प्रबंधन पर चार मई तक जवाब देने का निर्देश दिया.

अदालत ने केंद्र सरकार से यह भी कहा कि वह अपनी इस नीति पर पुनर्विचार करें कि घर-घर जाकर टीका लगाना संभव नहीं है. अदालत ने कहा कि उसे बुजुर्ग लोगों एवं दिव्यांगों की दशा पर विचार करना चाहिए.

अस्पतालों में रेमडेसिविर के वितरण के लिए  नीति तैयार करे- गुजरात हाईकोर्ट
गुजरात हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से कहा है कि वह कोविड-19 महामारी की प्रमुख दवा रेमडेसिविर की भारी मांग को देखते हुए अस्पतालों में इसके वितरण के लिए एक नीति तैयार करे. हाईकोर्ट ने कोविड स्थिति पर स्वत: संज्ञान लेते हुए 20 अप्रैल को वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए एक जनहित याचिका पर सुनवाई की थी. इस आदेश की विस्तृत प्रति गुरुवार को उपलब्ध करायी गयी.



वहीं सुप्रीम कोर्ट में चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया एस ए बोबडे की अध्यक्षता वाली पीठ ने यह भी कहा कि वह हाईकोर्ट्स में लंबित कुछ मुद्दों को वापस ले सकती है और खुद उनसे निपटेगी. हालांकि पीठ ने इन अदालतों में लंबित मामलों की न तो सुनवाई पर रोक लगाई और न ही इन मामलों को अपने पास स्थानांतरित किया.
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज