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भारत ने चीन संग पूर्वी लद्दाख के बाकी हिस्सों से सैनिकों की वापसी पर दिया जोर

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची. (ANI Tweet/8 April 2021)

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची. (ANI Tweet/8 April 2021)

Ladakh Tension India China: भारत इस बात पर जोर देता रहा है कि सीमा पर शांति दोनों देशों के बीच समग्र संबंधों के लिए आवश्यक है.

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नई दिल्ली. भारत ने गुरुवार को एक बार फिर से पूर्वी लद्दाख में संघर्ष वाली शेष जगहों से भारतीय और चीन के सैनिकों की वापसी की बात को दोहराया, ताकि इलाके में शांति का माहौल स्थापित हो. अपने साप्ताहिक प्रेस ब्रीफिंग में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने कहा, "जैसा कि हमने पिछले सप्ताह कहा था कि पूर्वी लद्दाख में सैनिकों के हटने से ही सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति बहाल हो सकती है और द्विपक्षीय संबंधों की प्रगति का माहौल बन सकता है."


इसके साथ ही उन्होंने कहा, "चीन सीमा मामलों पर विचार विमर्श एवं समन्वय पर कार्यकारी तंत्र (डब्ल्यूएमसीसी) की 12 मार्च को हुई बैठक के दौरान दोनों पक्ष वरिष्ठ कमांडरों की 11वें दौर की वार्ता के लिए राजी हुए थे." दोनों सेनाओं के कोर कमांडरों की बैठक शुक्रवार को हो सकती है और इसमें पूर्वी लद्दाख में संघर्ष वाले शेष स्थानों में सैनिकों की वापसी पर चर्चा हो सकती है. भारत इस बात पर जोर देता रहा है कि सीमा पर शांति दोनों देशों के बीच समग्र संबंधों के लिए आवश्यक है.


बीते 2 अप्रैल एक ऑनलाइन प्रेस वार्ता में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने पैंगोंग झील क्षेत्र में सैनिकों की वापसी को एक महत्वपूर्ण कदम बताया था और कहा था कि इसने पश्चिमी सेक्टर में अन्य मुद्दों के समाधान के लिये अच्छा आधार प्रदान किया है. उन्होंने कहा था कि पूर्वी लद्दाख में दोनों पक्षों द्वारा शेष मुद्दों का तेजी से समाधान करने पर सहमति बनी है. दोनों पक्ष सैन्य एवं राजनयिक चैनलों के माध्यम से संपर्क में हैं.


बागची ने विदेश मंत्री एस जयशंकर के बयान का हवाला देते हुए यह भी कहा था कि पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर वर्तमान हालात लम्बे समय तक बने रहना किसी के हित में नहीं है. उन्होंने उम्मीद जताई थी कि चीनी पक्ष शेष क्षेत्रों से सैनिकों की पूरी तरह जल्द वापसी सुनिश्चित करने के लिए हमारे साथ मिलकर काम करेगा.


गौरतलब है कि भारत और चीन की सेनाओं के बीच पैंगोंग सो इलाके में पिछले वर्ष पांच मई को हिंसक संघर्ष के बाद सीमा गतिरोध उत्पन्न हो गया था. इसके बाद दोनों पक्षों ने हजारों सैनिकों एवं भारी हथियारों की तैनाती की थी. सैन्य एवं राजनयिक स्तर की वार्ता के बाद दोनों पक्षों ने इस वर्ष फरवरी में पैंगोंग सो के उत्तरी और दक्षिणी किनारे से सैनिकों एवं हथियारों को पीछे हटा लिया था. इसके बाद ही 20 फरवरी को सैन्य स्तर की वार्ता हुई थी. समझा जाता है कि इसमें भारत ने देपसांग, हाटस्प्रिंग और गोगरा समेत अन्य लंबित मुद्दों के समाधान पर जोर दिया था. वहीं, पिछले सप्ताह सेना प्रमुख एम एम नरवणे ने कहा था कि पैंगोंग सो झील क्षेत्र से सैनिकों के पीछे हटने से भारत के लिये खतरा केवल कम हुआ हैं, खत्म नहीं.

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