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लखीमपुर खीरी केस: आशीष मिश्रा की जमानत रद्द करने की मांग, किसानों के परिजन पहुंचे सुप्रीम कोर्ट

लखीमपुर खीरी केस: आशीष मिश्रा की जमानत रद्द करने की मांग, किसानों के परिजन पहुंचे सुप्रीम कोर्ट

आशीष मिश्रा की जमानत का विरोध. (File pic)

आशीष मिश्रा की जमानत का विरोध. (File pic)

Lakhimpur Kheri Case: परिजनों ने सुप्रीम कोर्ट से उसे मिली जमानत (Ashish Mishra Bail) को रद्द करने की मांग की है. इनकी ओर से सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई गई है. इस याचिका में कहा गया है कि हाईकोर्ट ने फैसला देते हुए आशीष मिश्रा के खिलाफ सबूतों पर गौर नहीं किया है. इस मामले में पीड़ित परिवार के वकील प्रशांत भूषण हैं.

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नई दिल्‍ली. लखीमपुर खीरी में हुई हिंसा (Lakhimpur Kheri Case) के मामले में पिछले दिनों मुख्‍य आरोपी आशीष मिश्रा (Ashish Mishra) को जमानत दे दी गई थी. अब उसकी जमानत के खिलाफ मृत किसानों के परिजनों ने सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) का दरवाजा खटखटाया है. इन परिजनों ने सुप्रीम कोर्ट से उसे मिली जमानत (Ashish Mishra Bail) को रद्द करने की मांग की है. इनकी ओर से सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई गई है. इस याचिका में कहा गया है कि हाईकोर्ट ने फैसला देते हुए आशीष मिश्रा के खिलाफ सबूतों पर गौर नहीं किया है. इस मामले में पीड़ित परिवार के वकील प्रशांत भूषण हैं.

वहीं इससे पहले 17 फरवरी को भी सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर करके केंद्रीय मंत्री अजय मिश्रा के बेटे आशीष मिश्रा की जमानत रद्द करने का अनुरोध किया गया था. आशीष मिश्रा को लखीमपुर खीरी हिंसा के सिलसिले में गिरफ्तार किया गया था. इस घटना में चार किसानों सहित आठ लोगों की मौत हो गई थी.

इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ के गत 10 फरवरी के आदेश को रद्द करने के अनुरोध वाली एक पत्र अर्जी पर दर्ज स्वत: संज्ञान मामले में अधिवक्ताओं शिव कुमार त्रिपाठी और सीएस पांडा द्वारा एक आवेदन दाखिल किया गया था.

वकीलों ने जस्टिस (सेवानिवृत्त) राकेश जैन के नेतृत्व वाले विशेष जांच दल (एसआईटी) और अभियोजन पक्ष और उत्तर प्रदेश पुलिस से यह सवाल करने का अनुरोध किया गया है कि चीजों में देरी क्यों की जा रही है. साथ ही इसमें यह भी निर्देश देने का अनुरोध किया गया है कि आरोपपत्र वाली रिपोर्ट की एक प्रति प्रस्तुत की जाए.

17 फरवरी को लगाई गई इस अर्जी में कहा गया है कि जमानत आदेश में ‘स्पष्ट त्रुटि’ है क्योंकि उच्च न्यायालय ने एक निष्कर्ष पर पहुंचने के लिए ‘हो सकता है’ शब्द का उपयोग किया और कहा कि हो सकता है कि उक्त अपराध चालक द्वारा खुद को बचाने के लिए गति बढ़ाने के चलते हुआ हो.

पिछले साल 3 अक्टूबर को, लखीमपुर खीरी में हिंसा के दौरान आठ लोगों की मौत हो गई थी. उक्त घटना उस समय हुई थी जब किसान उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के इलाके के दौरे का विरोध कर रहे थे. चार किसान एक एसयूवी से कुचले गए थे. गुस्साए किसानों ने एक ड्राइवर और दो भाजपा कार्यकर्ताओं की कथित तौर पर पीट-पीट कर हत्या कर दी थी. उक्त हिंसा में एक पत्रकार की भी मौत हो गई थी, जिसके बाद केंद्र के अब निरस्त हो चुके कृषि कानूनों पर विरोध करने वाले विपक्षी दलों और किसान समूहों के बीच आक्रोश उत्पन्न हो गया था. (इनपुट भाषा से भी)

Tags: Ashish Mishra, Lakhimpur Kheri case, Supreme Court

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