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लखीमपुर खीरी हिंसा मामले में सुप्रीम कोर्ट ने रद्द की आशीष मिश्रा की जमानत, 1 सप्ताह में सरेंडर करने को कहा

लखीमपुर खीरी हिंसा मामले में सुप्रीम कोर्ट ने मुख्य आरोपी आशीष मिश्रा की जमानत रद्द कर दी. (File Photo)

लखीमपुर खीरी हिंसा मामले में सुप्रीम कोर्ट ने मुख्य आरोपी आशीष मिश्रा की जमानत रद्द कर दी. (File Photo)

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आशीष मिश्रा को जमानत दी थी और वह 18 फरवरी को जेल से बाहर आए थे. सुप्रीम कोर्ट ने मामले को नए सिरे से सुनवाई के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट को वापस भेज दिया है.

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा टेनी के बेटे और लखीमपुर खीरी हिंसा के मुख्य आरोपी आशीष​ मिश्रा की जमानत रद्द कर दी है. शीर्ष अदालत ने आशीष मिश्रा को एक सप्ताह के अंदर सरेंडर करने का आदेश दिया है. इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 10 फरवरी को आशीष मिश्रा को जमानत दी थी और वह 18 फरवरी को जेल से बाहर आए थे. सुप्रीम कोर्ट ने मामले को नए सिरे से सुनवाई के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट को वापस भेज दिया है. चीफ जस्टिस एनवी रमण, न्यायमूर्ति सूर्य कांत और न्यायमूर्ति हिमा कोहली की पीठ ने सोमवार को यह फैसला सुनाया.

सुप्रीम कोर्ट ने माना की आशीष मिश्रा को जमानत देते वक्त इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पीड़ित पक्ष की बात ठीक से नहीं सुनी और उनकी दलीलों को नजरंदाज किया. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सिर्फ एक एफआईआर (जिसमें कहा गया था कि लखीमपुर खीरी हिंसा में किसी की मौत गोली लगने से नहीं हुई) के आधार पर आशीष मिश्रा को जमानत दे दी, जो गलत है, इसलिए हाईकोर्ट को आशीष मिश्रा की जमानत याचिका पर फिर से विस्तार से सुनवाई करनी होगी. सुप्रीम कोर्ट ने मौखिक टिप्पणी की कि पहले इलाहाबाद हाईकोर्ट जिस जज ने आशीष मिश्रा की जमानत याचिका पर सुनवाई की थी, इस मामले में वह दोबारा सुनवाई नहीं करेंगे.

SC ने 4 अप्रैल को फैसला सुरक्षित रख लिया था
किसानों के पक्ष ने आशीष मिश्रा की जमानत का विरोध किया था और इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी. सुप्रीम कोर्ट ने किसानों की याचिका पर सुनवाई पूरी होने के बाद 4 अप्रैल को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था. तब सुप्रीम कोर्ट ने आशीष मिश्रा की जमानत याचिका मंजूर करने के इलाहबाद उच्च न्यायालय के आदेश पर सवाल उठाए थे और कहा था कि जब मामले की सुनवाई अभी शुरू होनी बाकी है, तो पोस्टमार्टम रिपोर्ट और चोटों की प्रकृति जैसी अनावश्यक बातों पर गौर नहीं किया जाना चाहिए. विशेष पीठ ने इस तथ्य का कड़ा संज्ञान लिया था कि राज्य सरकार ने न्यायालय द्वारा नियुक्त विशेष जांच दल (एसआईटी) के सुझाव के अनुसार उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ याचिका दायर नहीं की.

क्या है लखीमपुर खीरी हिंसा का पूरा मामला?
गौरतलब है कि तीन कृषि कानूनों (जिन्हें केंद्र सरकार ने बाद में रद्द कर दिया था) को लेकर किसानों का एक समूह पिछले साल 3 अक्टूबर को भाजपा नेता और उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के लखीमपुर खीरी दौरे का विरोध कर रहा था. केशव प्रसाद मौर्य का हेलीकॉप्टर जिस मैदान में उतरना था, उसको किसानों ने घेर लिया था, जिस कारण वह सड़क मार्ग से लखीमपुर खीरी पहुंचे. उनका रूट भी डायवर्ट किया गया था. लखीमपुर खीरी के तिकुनिया में एक एसयूवी (महिंद्रा थार) ने प्रदर्शन कर रहे 4 किसानों को कुचल दिया था. इससे गुस्साए प्रदर्शनकारियों ने एसयूवी में सवार बीजेपी के 2 कार्यकर्ताओं और एक चालक को पीट-पीट कर मार डाला और इस हिंसा में एक स्थानीय पत्रकार की भी मौत हो गई थी. किसान पक्ष का आरोप है कि एसयूवी केंद्रीय मंत्री अजय मिश्रा टेनी के पुत्र आशीष​ मिश्रा उर्फ मानू चला रहे थे. जबकि केंद्रीय मंत्री के बेटे का कहना है कि वह घटना के वक्त मौके पर मौजूद ही नहीं थे.

Tags: Ashish Mishra, Lakhimpur Case Updates, Lakhimpur Kheri case

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