लाल बहादुर शास्त्री की मौत के बाद क्यों नहीं हुआ पोस्टमार्टम?

जब लाल बहादुर शास्त्री ताशकंद समझौते पर हस्ताक्षर करने के लिए गए तो पूरी तरह स्वस्थ थे. फिर 11 जनवरी 1966 की रात अचानक उनकी मृत्यु कैसे हो गई?

ओम प्रकाश | News18Hindi
Updated: January 11, 2019, 4:24 PM IST
लाल बहादुर शास्त्री की मौत के बाद क्यों नहीं हुआ पोस्टमार्टम?
पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री (file photo)
ओम प्रकाश
ओम प्रकाश | News18Hindi
Updated: January 11, 2019, 4:24 PM IST
आज से 53 साल पहले हुई पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की मौत का रहस्य आज भी कायम है. उनके बेटे सुनील शास्त्री का कहना है कि पूर्व पीएम शास्त्री की मौत दिल का दौरा पड़ने से नहीं हुई थी, बल्कि ये एक रहस्यमयी मौत थी. यदि पोस्टमार्टम कराया जाता तो सच्चाई सामने आ जाती.

इस छोटे कद के बड़े आदमी को मरणोपरान्त भारत रत्न से सम्मानित किया गया. देश में कई लोगों ने शास्त्री जी की मौत पर सवाल उठाया था. उनकी मौत संदेहजनक स्थितियों में हुई. भारत-पाकिस्तान के बीच 11 जनवरी 1966 को हुए ताशकंद समझौते के बाद वह हमेशा के लिए दुनिया छोड़ गए.

पूर्व सांसद सुनील शास्त्री ने कहा कि भारत-पाक युद्ध (1965) की समाप्ति के बाद जब पिता जी ताशकंद समझौते पर हस्ताक्षर करने गए तो पूरी तरह स्वस्थ थे. फिर 11 जनवरी 1966 की रात अचानक उनकी मृत्यु कैसे हो गई? मैं तो इसमें साजिश मानता हूं. (ये भी पढ़ें: जब थप्पड़ के बदले शास्त्री जी ने चपरासी को लगा लिया था गले!)

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मौत के बाद शव का पोस्टमार्टम भी नहीं कराया जाना, साजिश की ओर ही इशारा करता है. उनका पार्थिव शरीर जब देश लाया गया तो काफी लोगों ने देखा था कि चेहरा, सीना और पीठ से लेकर कई अंगों पर नीले और उजले निशान थे. इसलिए पोस्टमार्टम क्यों नहीं हुआ, ये सवाल तो हमेशा बना रहेगा.

छोटे कद का बड़ा आदमी

बताते हैं कि शास्त्री जब ताशकंद समझौते के लिए जा रहे थे तो किसी ने उनसे सवाल किया गया कि आप कद में काफी छोटे हैं और पाकिस्तानी राष्ट्रपति अयूब खान काफी लंबे हैं. आपको बातचीत में परेशानी नहीं होगी. इस पर उन्होंने जवाब दिया कि भारत सिर उठाकर बात करेगा और पाकिस्तान सिर झुका कर.
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सुनील शास्त्री का कहना है कि शास्त्री जी के नाम पर देश में कुछ नहीं हुआ. जबकि वह देश के हीरो थे. सबकुछ एक परिवार के नाम पर हुआ.

देश के लाल का कमाल और खुद्दारी  

-लाल बहादुर शास्त्री के शासनकाल में अन्न संकट गहराया गया था. उन्होंने देश के लोगों से एक शाम का उपवास रखने की अपील की. उनकी अपील का असर ऐसा हुआ कि उस समय न केवल घरों में, बल्कि होटलों में भी चूल्हे जलने बंद हो गए थे.

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1952 में शास्त्री रेल मंत्री बने और यह पद 1956 में छोड़ दिया. 1956 में महबूबनगर रेल हादसे में 112 लोगों की मौत हुई थी. इस पर उन्होंने इस्तीफा दे दिया. इसे तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने स्वीकार नहीं किया. कुछ माह बाद ही अरियालूर रेल दुर्घटना में 114 लोग मारे गए. उन्होंने फिर इस्तीफा दे दिया. आज भी इस इस्तीफे की नजीर पेश की जाती है.

-जब वो प्रधानमंत्री थे उस दौरान उनके परिवार के लोगों ने उनसे कार खरीदने का अनुरोध किया. उन्‍होंने फिएट कार खरीदी, उस समय उसकी कीमत 12 हजार रुपये थी जबकि खाते में सिर्फ 7 हजार. इसलिए पंजाब नेशनल बैंक से 5 हजार रुपये का लोन लिया.

-लाल बहादुर शास्त्री का जन्म दो अक्टूबर 1904 को रामनगर चंदौली (तब बनारस) में हुआ. उनका असली नाम लाल बहादुर श्रीवास्तव था. लाल बहादुर शास्‍त्री जाति प्रथा के घोर विरोधी थे. इसलिए उन्‍होंने कभी अपने नाम के साथ सरनेम नहीं लगाया.

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