लैंसेट के 21 एक्सपर्ट्स ने भारत को कोरोना से लड़ने के लिए दिए 8 सुझाव, कहा- तुरंत एक्शन लेने की जरूरत

सांकेतिक तस्वीर

Covid Third Wave: पिछले साल दिसंबर में लैंसेट की सिटिजन कमिशन ने भारत की स्वास्थ्य प्रणाली को लेकर एक पैनल का गठन किया था. इस पैनल में कुल 21 एक्सपर्ट को शामिल किया गया था.

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    नई दिल्ली.  भारत में कोरोना की दूसरी लहर (Coronavirus 2nd Wave) अब धीरे-धीरे थमती नजर आ रही है. लेकिन अप्रैल और मई के महीने में कोरोना ने यहां तबाही मचा दी. कई राज्यों में इस दौरान मौत की संख्या दोगुनी हो गई. आने वाले दिनों के लिए एक्सपर्ट्स तीसरी लहर की चेतावनी दे रहे हैं. इस बीच लैंसेट (The Lancet) पत्रिका ने भारत को कोरोना से लड़ने के लिए 8 सुझाव दिए हैं. साथ ही लैंसेट के एक्सपर्ट ने कहा है कि भारत को तुरंत एक्शन लेने की जरूरत है.

    पिछले साल दिसंबर में लैंसेट की सिटिजन कमिशन ने भारत की स्वास्थ्य प्रणाली को लेकर एक पैनल का गठन किया था. इस पैनल में कुल 21 एक्सपर्ट को शामिल किया गया था. इसमें बायोकॉन की किरण मजूमदार शॉ और टॉप सर्जन डॉक्टर देवी शेट्टी को भी रखा गया. इन सबने भारत को कोरोना से लड़ने के लिए तुरंत एक्शन लेने को कहा है. साथ ही पैनल ने कुल 8 सुझाव दिए है. आईए एक नज़र डालते हैं इन सुझावों पर...
    आवश्यक स्वास्थ्य सेवाओं के संगठन का विकेंद्रीकरण किया जाना चाहिए. दरअसल इसकी वजह है अलग-अलग ज़िलों में कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या का अलग-अलग होना. साथ ही सभी ज़िलों में स्वास्थ्य सेवाएं भी अलग-अलग है.
    एक पारदर्शी राष्ट्रीय मूल्य नीति होनी चाहिए. इसके तहत मेडिकल सेवाओं से जुड़ी सभी आवश्यक स्वास्थ्य सेवाओं जैसे कि एम्बुलेंस, ऑक्सीजन, आवश्यक दवाओं और अस्पताल देखभाल की कीमतों की सीमाएं तय होनी चाहिए. अस्पताल की देखभाल में किसी भी तरह के जेब खर्च की आवश्यकता नहीं होनी चाहिए और सभी लोगों के लिए मौजूदा स्वास्थ्य बीमा योजनाओं द्वारा लागत को कवर किया जाना चाहिए, जैसा कि कुछ राज्यों में किया गया है.
    COVID-19 के प्रबंधन पर स्पष्ट और साक्ष्य-आधारित जानकारी को अधिक व्यापक रूप से प्रसारित और कार्यान्वित किया जाना चाहिए. इस जानकारी में स्थानीय परिस्थितियों, स्थानीय भाषाओं में घरेलू देखभाल और उपचार, प्राथमिक देखभाल और जिला अस्पताल देखभाल के लिए उपयुक्त रूप से अनुकूलित अंतरराष्ट्रीय दिशा-निर्देश शामिल होने चाहिए.
    कोरोना से लड़ने के लिए हेल्थ सिस्टम के सभी संसाधनों को लगाने की जरूरत है. इसमें प्राइवेट सेक्टर को भी लगाया जाए. विशेष रूप से पर्याप्त व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण, बीमा और बाकी चीजों पर भी द्यान देने की जरूरत है
    राज्य सरकार ये फैसला करे कि पहले पहले किसको वैक्सीन लगाई जाए. वैक्सीन की आपूर्ति में सुधार के बाद इसे बढ़ाया जा सकता है. टीकाकरण एक सार्वजनिक हित है और इसे बाजार तंत्र पर नहीं छोड़ा जाना चाहिए. यानी बाजार वैक्सीन की कीमत तय न करे
    सामुदायिक जुड़ाव और सार्वजनिक भागीदारी भारत की COVID-19 प्रतिक्रिया के केंद्र में होनी चाहिए. जमीनी स्तर पर सिविल सोसाइटी की ऐतिहासिक रूप से स्वास्थ्य देखभाल और अन्य विकास गतिविधियों में लोगों की भागीदारी में महत्वपूर्ण भूमिका रही है.
    आने वाले हफ्तों में संभावित केसलोड के लिए जिलों को सक्रिय रूप से तैयार करने के लिए सरकारी डेटा संग्रह और मॉडलिंग में पारदर्शिता होनी चाहिए. स्वास्थ्य प्रणाली कर्मियों को आयु और लिंग के अलग-अलग COVID-19 मामलों, अस्पताल में भर्ती होने और मृत्यु दर, टीकाकरण के सामुदायिक स्तर के कवरेज, उपचार प्रोटोकॉल की प्रभावशीलता के समुदाय-आधारित ट्रैकिंग और दीर्घकालिक परिणामों पर डेटा की आवश्यकता होती है.
    कोरोना के चलते लोगों के घर चलाने में दिक्कत न हो इसके लिए जरूरी है कि सरकार ऐसे लोगों के अकाउंट में नकद पैसे ट्रांसफर करे. सभी श्रमिकों को बनाए रखने की आवश्यकता है, चाहे अनुबंध की स्थिति कुछ भी हो, सरकार की प्रतिबद्धता के माध्यम से इन कंपनियों को मुआवजे की पेशकश करने के लिए जब अर्थव्यवस्था पुनर्जीवित होती है.

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