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मध्यस्थता के बाद अयोध्या की जमीन सरकार को देने और ASI निर्धारित मस्जिद में नमाज़ का था सुझाव

Utkarsh Anand | News18Hindi
Updated: November 11, 2019, 7:36 AM IST
मध्यस्थता के बाद अयोध्या की जमीन सरकार को देने और ASI निर्धारित मस्जिद में नमाज़ का था सुझाव
इस पैनल में सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज एफएमआई खलीफुल्लाह, गुरु श्री श्री रविशंकर और वरिष्ठ वकील श्रीराम पांचू शामिल थे (फाइल फोटो)

इस रिपोर्ट में प्रभावी तौर पर कहा गया है कि राम जन्मभूमि विवाद (Ram Janmbhoomi Dispute) में शामिल कुछ पक्ष एक समझौते पर पहुंच गए थे. इस समझौते पर सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड (Sunni Central Waqf Board) के ज़फर अहमद फारुखी ने हस्ताक्षर भी किए थे.

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  • Last Updated: November 11, 2019, 7:36 AM IST
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नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने अयोध्या विवाद को सुलझाने के लिए गठित मध्यस्थता पैनल (Mediation Panel) की आखिरी रिपोर्ट को खारिज कर दिया था. इसमें अयोध्या मामले में एक समझौते तक पहुंचने की बात कही गई थी. सुप्रीम कोर्ट ने इस 'समझौते' को खारिज कर दिया था क्योंकि इस पर सभी पक्षों के लोगों के हस्ताक्षर नहीं थे और सुप्रीम कोर्ट ने इसे खारिज करने की एक और वजह इसका सशर्त होना भी बताया था.

अयोध्या मामले (Ayodhya Dispute) पर फैसला एक दिन पहले ही आया है. इसके साथ ही पहली बार यह भी सामने आया है कि मध्यस्थता पैनल की आखिरी रिपोर्ट में क्या कहा गया था, जिसकी अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज एफएमआई खलीफुल्लाह कर रहे थे और इसमें गुरु श्री श्री रविशंकर (Sri Sri Ravi Shankar) और वरिष्ठ वकील श्रीराम पांचू इसके सदस्यों के तौर पर शामिल थे.

विवादित जमीन पर अपने सभी अधिकारों को छोड़ने को तैयार था सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड
पांच जजों की बेंच ने अपने फैसले में लिखा है कि 16 अक्टूबर को जब मालिकाना हक से जुड़ी आखिरी सुनवाई खत्म हो गई तब मध्यस्थता पैनल ने 'फाइनल रिपोर्ट ऑफ द कमेटी' (Final Report of the Committee) शीर्षक से अपनी अंतिम रिपोर्ट पेश की थी. इस रिपोर्ट में प्रभावी तौर पर कहा गया है कि विवाद में शामिल कुछ पक्ष एक समझौते पर पहुंच गए थे. इस समझौते पर सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड के ज़फर अहमद फारुखी ने हस्ताक्षर भी किए थे.

बेंच ने इसके बाद यह भी लिखा था कि समझौते के तहत सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड (Sunni Central Waqf Board) विवादित जमीन पर अपने सभी अधिकारों, हितों और दावों को छोड़ने को तैयार थी. लेकिन ऐसा वह अपनी कुछ शर्तें के पूरा होने के बाद करने वाली थी.

सभी पक्षों के हस्ताक्षर न होने के चलते हुआ खारिज
फैसले में कहा गया है, "कोर्ट को मध्यस्थता पैनल (Mediation Panel) से जो समझौते का करार मिला है उस पर राजी नहीं हुआ जा सकता क्योंकि इस पर वर्तमान विवाद के सभी पक्षों के हस्ताक्षर नहीं हैं." बेंच ने इसके बाद यह भी कहा कि ऐसे समझौते को आखिरी भी नहीं माना जा सकता, जो दोनों ही पक्षों को आखिरी तौर पर विवाद के निपटारे के लिए बाध्य करता हो.
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बेंच ने कहा, "इसके अलावा यह केवल कुछ परिस्थितियों और कुछ विशेष शर्तों पर आधारित था. ऐसे में समझौता (Settlement) इस विवाद में सारे पक्षों पर लागू होने वाला और अंतिम नहीं माना जा सकता." अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने हालांकि मध्यस्थता पैनल के प्रयासों के प्रति अपनी प्रशंसा को दर्ज किया है.

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First published: November 10, 2019, 7:42 PM IST
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