लश्कर-ए-तैयबा के तीन आतंकियों को NIA कोर्ट में सुनाई गई 10 साल की सजा

केन्द्रीय जांच एजेंसी

Lashkar e Taiba NIA Court: आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा ने भारत के चर्चित हिन्दू नेताओं, पत्रकारों, राजनीतिक हस्तियों और और पुलिस अधिकारियों को मारने की साजिश रची गई थी.

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नई दिल्ली. केन्द्रीय जांच एजेंसी (NIA) की मुंबई स्थित (NIA Special Court, Mumbai) द्वारा आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (Lashkar-e-Taiba Terrorists) के तीन आतंकियों को दोषी मानते हुए 10 साल की सजा का ऐलान किया गया है. दोषी पाए गए आरोपियों का नाम इस प्रकार से है- 1. मोहम्मद मुज्मिल, 2. मोहम्मद सादीक, 3. मोहम्मद अकरम. इन आरोपियों के खिलाफ एनआईए की टीम ने तफ्तीश के दौरान काफी महत्वपूर्ण सबूत और गवाहों के आधार पर कोर्ट में उससे जुडे तमाम सबूतों को सामने रखा, उसके बाद मंगलवार 15 जून को मुंबई में स्थित एनआईए की विशेष कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए 10 साल की कैद और जुर्माने का आदेश सुनाया है.


कई हिन्दू नेताओं ,पत्रकारों , राजनेताओं और पुलिस अधिकारियों को मारने की थी साजिश
आतंकी संगठन लश्कर-ए -तैयबा और  आतंकी संगठन हरकत उल-जिहाद-ए-इस्लामी द्वारा भारत में कई चर्चित हिन्दू नेताओं (prominent Hindu leaders), पत्रकारों (journalists), राजनीतिक हस्तियों (politicians) और पुलिस अधिकारियों (police officers) को मारने की साजिश विदेश में रची गई थी. इसके लिए सऊदी अरब में षडयंत्र रचा गया था. इसके लिए आतंकी मोहम्मद अकरम ने रियाद, दमन और सऊदी अरब (Saudi Arabia) में कई अन्य आतंकियों के साथ बैठकर साजिश रची थी.


इस साजिश को अंजाम देने के लिए आत्मघाती आतंकियों का भी चयन किया गया था, इस साजिश में मोहम्मद अकरम ने हैदराबाद निवासी ओबीड - उर- रहमान (Obaid-Ur-Rehaman), मोहम्मद सादीक और मोहम्मद मुजम्मिल के साथ इस साजिश को अंजाम देने के लिए टार्गेट और लोकेशन का चयन किया गया था, लेकिन उससे पहले ही इस मामले में जानकारी मुंबई की एटीएस टीम को लगी और कुछ आतंकियों को गिरफ्तार करके इस मामले का पर्दाफास कर दिया था.


एनआईए के पहले मुंबई स्थित एटीएस की टीम कर रही थी तफ्तीश
जांच एजेंसी के अधिकारी के मुताबिक मुंबई के काला चौकी इलाके की एटीएस ( ATS Kalachowki, Mumbai) टीम द्वारा कई आतंकियों के खिलाफ साल 2012 में 31 अगस्त को एक मामला दर्ज किया  गया था, उसके बाद इस मामले को बेहतर तरीके से तफ्तीश के लिए जांच का जिम्मा एनआईए  को सौंपा गया था, जिसके अंतर्गत एटीएस की टीम ने आर्म्स एक्ट (Arms Act) के तहत कई आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था, जिसे बाद में एनआईए की टीम भी तफ्तीश कर रही थी.





एनआईए के द्वारा दर्ज एफआईआर के  तहत प्रमुख तौर पर इन आरोपियों के खिलाफ भी मामला दर्ज किया गया था, जो इस प्रकार से हैं --


1.  सिद्दीकी बीन उस्मान (Siddique Bin Usman@ अबू हंजाला  @ अब्दूल )   -  हैदराबाद का रहने वाला


2. फुरकान भाई ( Furkhan Bhai ) उर्फ अब्दुल्ला उर्फ अबू साद उर्फ अफजल उर्फ अकबर  - हैदराबाद का रहने वाला


3.  शाईद फैसल (Shaeed Faisal ) उर्फ उस्ताद उर्फ उमर उर्फ जाकिर  -- बैंगलोर का रहने वाला, लेकिन बाद में सऊदी अरब में बस गया .


4.  मोहम्मद मुज्मिल (Mohd. Muzzami)
5.  मोहम्मद सादीक (Mohd. Sadiq )
6.  मोहम्मद अकरम  (Mohd. Akram)


लश्कर -ए -तैयबा का ही दूसरा सहयोगी संगठन है हूजी
एनआईए की तफ्तीश के दौरान ये पाया गया की इन आरोपियों का वास्ता सीधे तौर पर आतंकी संगठन लश्कर के साथ था, लेकिन बाद में लश्कर -ए -तैयबा के साथ ही  प्रतिबंधित आतंकी संगठन हरकत उल - जिहाद-ए-इस्लामी (Harkat-ul-Jihad-e-Islami) यानी हूजी (HuJI) संगठन के साथ कनेक्शन सामने आया, जिसमें ये सारे आतंकियों के नाम शामिल थे. मतलब साफ था कि ये आतंकी अलग -अलग आतंकी संगठनों के लिए अलग -अलग नामों से  काम करते थे. एनआईए के अधिकारी के मुताबिक इस मामले में अभी भी हमारी तफ्तीश चल ही है.

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