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मानसून सत्र का आखिरी हफ्ता, सरकार और विपक्ष के बीच क्या अब खत्म होगा गतिरोध?

विपक्षी नेताओं के मुताबिक केंद्र सरकार ने अभी तक 127वें संविधान संशोधन विधेयक 2021 पर समर्थन के लिए उनसे संपर्क नहीं किया है. फाइल फोटो

विपक्षी नेताओं के मुताबिक केंद्र सरकार ने अभी तक 127वें संविधान संशोधन विधेयक 2021 पर समर्थन के लिए उनसे संपर्क नहीं किया है. फाइल फोटो

Parliament monsoon session: अगले साल होने वाले पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव को देखते हुए केंद्र सरकार के लिए 127वां संविधान संशोधन विधेयक 2021 काफी अहम है.

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    नई दिल्ली. संसद के मानसून सत्र (Parliament Monsoon Session) में अब सिर्फ 5 दिनों का वक्त बचा है. ऐसे में केंद्र सरकार एक संवैधानिक संशोधन के माध्यम से आगे बढ़ना चाह रही है, जिसका उद्देश्य पिछड़ी जातियों की पहचान करने के लिए राज्यों की शक्ति को बहाल करना है, तो विपक्ष ने संकेत दिए हैं कि वह पेगासस जासूसी विवाद और किसान कानून पर बहस की मांग वाली अपनी रणनीति पर कायम रहेगा.

    19 जुलाई को शुरू हुआ मानसून सत्र हंगामेदार रहा है. संसद के दोनों सदनों में विपक्ष के सांसदों ने जोरदार तरीके से अपनी आवाज बुलंद करते हुए विरोध प्रदर्शन जारी रखा है. विपक्षी सांसद लगातार पेगासस विवाद, तीन कृषि कानून और पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों पर चर्चा की मांग कर रहे हैं. पिछले हफ्ते टीएमसी (TMC) सांसद शांतनु सेन (Shantanu Sen) को सदन में गैर जिम्मेदार व्यवहार के चलते मौजूदा सत्र के लिए निलंबित कर दिया गया था. वहीं, विपक्ष का आरोप है कि सदन में उन्हें बोलने नहीं दिया जा रहा है.

    विपक्षी नेताओं के मुताबिक केंद्र सरकार ने अभी तक 127वें संविधान संशोधन विधेयक 2021 पर समर्थन के लिए उनसे संपर्क नहीं किया है. इस विधेयक का उद्देश्य मई 2021 के सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले को अप्रभावी करना है, जिसमें शीर्ष कोर्ट ने कहा था कि केवल केंद्र सरकार ही सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों (SEBCs) को अधिसूचित कर सकती है.

    सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद राज्य सरकारों और पिछड़े वर्ग के समुदायों ने अपना विरोध जताया था. अगले साल होने वाले पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव को देखते हुए केंद्र सरकार के लिए यह विधेयक काफी अहम है. इस बिल के लिए विपक्ष का समर्थन काफी महत्वपूर्ण है, क्योंकि संसद में संविधान संशोधन विधेयक को पास कराने के लिए कार्यवाही के दौरान दो तिहाई सांसदों की मौजूदगी जरूरी है, जिसमें से कम से कम 50 फीसदी की उपस्थिति होनी चाहिए.

    कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने रविवार को कहा कि पार्टी पेगासस मामले पर बहस की मांग से पीछे नहीं हटेगी. राज्य सभा में कांग्रेस के चीफ व्हिप जयराम रमेश ने संकेत दिया कि अंतिम पांच दिनों में पार्टी पेगासस मामले पर अपने स्टैंड से पीछे नहीं हटेगी. जयराम रमेश ने कहा कि याद रखिए कि 2010 में क्या हुआ था. दरअसल 2010 के शीतकालीन सत्र में कोई काम नहीं हो पाया था और पूरा सत्र बर्बाद हो गया था. टू-जी स्पेक्ट्रम मामले में भ्रष्टाचार की जांच के लिए तत्कालीन विपक्षी पार्टी बीजेपी लगातार संयुक्त संसदीय समिति की मांग करती रही.

    लोकसभा में टीएमसी के नेता सुदीप बंदोपाध्याय ने कहा कि पार्टी अपनी मांग जारी रखेगी और त्रिपुरा में पार्टी कार्यकर्ताओं पर हमले को लेकर संसद में गांधी प्रतिमा के सामने धरना देगी. वहीं, सदन में पार्टी के लिए पेगासस अहम मुद्दा रहेगा. सुदीप बंदोपाध्याय ने कहा कि शनिवार को त्रिपुरा में बीजेपी नेताओं ने टीएमसी कार्यकर्ताओं पर हमला किया है. हालांकि बीजेपी ने मामले में किसी भी तरह की संलिप्तता से इनकार किया है.

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    कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया के राज्यसभा सांसद ई. करीम ने कहा कि संविधान संशोधन का मामला महत्वपूर्ण है. उन्होंने कहा, ‘यह एक महत्वपूर्ण बिल है और मैं चाहता हूं कि यह पारित हो जाए.’ बता दें कि मानसून सत्र के तीन हफ्तों के दरम्यान विपक्षी पार्टियों ने बीजेपी के खिलाफ संसद में एकजुट मोर्चा तैयार किया है. शुक्रवार को 13 विपक्षी पार्टियों के नेता दिल्ली स्थित जंतर मंतर पहुंचे और किसानों के प्रदर्शन में शामिल हुए. इन नेताओं ने पेगासस मामले पर भी अपनी बात रखी और कहा कि इजरायली सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल मानवाधिकार कार्यकर्ताओं, पत्रकारों और राजनेताओं के फोन को हैक करने के लिए इस्तेमाल किया गया है.

    इससे पहले, सोमवार को खड़गे के संसद भवन स्थित कक्ष में बैठक कर 14 विपक्षी पार्टियों के सदस्यों ने यह निर्णय लिया कि पेगासस जासूसी मामला और महंगाई के मुद्दे पर सरकार को आगे भी घेरा जाएगा. पेगासस, कृषि कानूनों और कुछ अन्य मुद्दों को लेकर, संसद के मानसून सत्र में शुरू से ही दोनों सदनों में गतिरोध बना हुआ है. 19 जुलाई से यह सत्र आरंभ हुआ था, लेकिन अब तक दोनों सदनों की कार्यवाही बाधित होती रही है.

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