कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने जजों के फैसलों पर आपत्ति जताने के ट्रेंड पर सवाल उठाया

कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने जजों के फैसलों पर आपत्ति जताने के ट्रेंड पर सवाल उठाया
रविशंकर प्रसाद ने उठाए ट्रेंड पर सवाल.

रविशंकर प्रसाद (Ravi Shankar Prasad) ने कहा जनहित याचिका के नाम पर सोशल मीडिया में दुष्प्रचार कर अपने पक्ष में आदेश के लिए माहौल बनाना और फैसला पक्ष में न आने पर न्यायपालिका पर सवाल उठाना एक गलत ट्रेंड है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 10, 2020, 4:04 PM IST
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नई दिल्‍ली. केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद (Ravi Shankar Prasad) ने न्यायाधीशों पर सोशल मीडिया के द्वारा किए जा रहे व्यक्तिगत आक्षेपों पर चिंता जताई है. एक अंग्रेजी अखबार में लिखे अपने लेख के द्वारा इस बढ़ते ट्रेंड को उन्‍होंने चिंता का विषय बताया. रविशंकर प्रसाद ने आरोप लगाया है कि कई लोगों के द्वारा मनमुताबिक फैसला नहीं मिलने के बाद जजों के खिलाफ दुष्प्रचार चलाना न्यापालिका की स्वतंत्रता पर विपरित असर डालता है.

रविशंकर प्रसाद ने कहा जनहित याचिका के नाम पर सोशल मीडिया में दुष्प्रचार कर अपने पक्ष में आदेश के लिए माहौल बनाना और फैसला पक्ष में न आने पर न्यायपालिका पर सवाल उठाना एक गलत ट्रेंड है. रविशंकर प्रसाद लिखते हैं कि कांग्रेस और उनके समर्थित वकीलों द्वारा अपने मन लायक फैसला न आने पर भारत के मुख्य न्यायाधीश पर महाभियोग चलाना पिछले कुछ वर्षों की सबसे दुर्भाग्यपूर्ण घटना रही. उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने बड़े नेताओं ने आपातकाल में न्यायपालिका की आज़ादी के लिए प्रताड़ना सही है और इसलिए वो न्यायपालिका पर बढ़ते हमले से चिंतित हैं.

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रविशंकर प्रसाद ने लिखा है कि जिन्हें देश की जनता ने बार बार चुनावों में हार का मुंह दिखाया है और वो लोग राजनीति और शासन के माध्यम से सुप्रीम कोर्ट के फैसलों पर असर नहीं डाल पा रहे हैं. वहीं ऐसे काम में लगे हैं. ये स्वीकार नहीं किया जा सकता है. पिछले हफ्ते ही सुप्रीम कोर्ट ने वरिष्ठ अधिकवक्ता प्रशांत भूषण को सजा सुनाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने एक रुपये का जुर्माना लगाया था. प्रशांत भूषण पर न्यायपालिका के फैसलों कै खिलाफ बोलने का आरोप था.
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