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संविधान में कोई भी राष्ट्रीय भाषा नहीं: रविशंकर प्रसाद

News18Hindi
Updated: November 21, 2019, 8:48 PM IST
संविधान में कोई भी राष्ट्रीय भाषा नहीं: रविशंकर प्रसाद
रविशंकर प्रसाद ने बताया कि संविधान में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट और प्रत्येक हाईकोर्ट में सभी कार्यवाही अंग्रेजी भाषा में होगी.

कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद (Ravi Shankar Prasad) ने राज्यसभा (Rajya sabha) को एक प्रश्न के लिखित उत्तर में हिंदी और उसके राष्ट्रीय भाषा होने की बहस के संबंध में जवाब दिया. उन्होंने सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट की भाषा संबंधी सवालों का भी जवाब दिया.

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  • Last Updated: November 21, 2019, 8:48 PM IST
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नई दिल्ली. कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद (Ravi Shankar Prasad) ने गुरुवार को कहा कि सरकार की आधिकारिक भाषा हिंदी और लिपि देवनागरी है लेकिन, भारत के संविधान में राष्ट्रीय भाषा का कोई उल्लेख नहीं है. कानून मंत्री प्रसाद ने राज्यसभा (Rajya sabha) को एक प्रश्न के लिखित उत्तर में यह जानकारी दी. उन्होंने बताया कि संविधान के अनुच्छेद 343 (1) के अनुसार, सरकार की आधिकारिक भाषा हिंदी और लिपि देवनागरी है तथा भारत के संविधान (Constitution of India) में राष्ट्रीय भाषा का कोई उल्लेख नहीं है. प्रसाद ने बताया कि संविधान के अनुच्छेद 348(1) में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट और प्रत्येक हाईकोर्ट में सभी कार्यवाही अंग्रेजी भाषा में होगी.

उन्होंने बताया कि संविधान के अनुच्छेद 348 के खंड (2) में कहा गया है कि खंड (1) के उपखंड (ख) में किसी राज्य का राज्यपाल राष्ट्रपति की पूर्व सहमति से उस हाईकोर्ट की कार्यवाही में हिंदी का या उस राज्य के शासकीय प्रयोजन के लिए प्रयोग होने वाली किसी अन्य भाषा का उपयोग अधिकृत कर सकेगा जिस उच्च न्यायालय का मुख्य स्थान उसी राज्य में है.

गृहमंत्री के बयान के बाद हुआ था विवाद
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के हिंदी दिवस पर दिए गए भाषण के बाद हिंदी के नाम पर देश में विवाद खड़ा हो गया था. खासकर देश के दक्षिण राज्यों ने इस मुद्दे पर तीखी प्रतिक्रिया दी थी. हालांकि खुद गृहमंत्री अमित शाह ने इस पर कहा था कि उनके बयान को गलत तरीके से लिया गया था. उन्होंने कहा, मैं खुद एक गैर हिंदी भाषी राज्य गुजरात से आता हूं. मैं क्षेत्रीय भाषाओं के बारे में ऐसी कोई बात नहीं कहूंगा, जो लोगों को आहत करे. मैंने सिर्फ हिंदी की व्यापकता और उसकी पहुंच के बारे में बोला था कि देश में अगर एक स्वीकार भाषा हो तो उसे विश्व स्तर पर पहचान में आसानी होती है.

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First published: November 21, 2019, 8:27 PM IST
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