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आधी से अधिक सजा काट चुके विचाराधीन कैदियों की जमानत पर रिहायी सुनिश्चित करें हाईकोर्ट: सरकार

News18Hindi
Updated: November 28, 2019, 6:43 PM IST
आधी से अधिक सजा काट चुके विचाराधीन कैदियों की जमानत पर रिहायी सुनिश्चित करें हाईकोर्ट: सरकार
रविशंकर प्रसाद ने एक सवाल के जवाब में यह जानकारी दी (PTI Photo/Kamal Singh)

कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद (Ravishankar Prasad) ने बताया कि राष्ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्यूरो (NCRB) के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, 2017 में भारतीय जेलों की क्षमता 3,91,574 थी जबकि इनमें 4,50,696 कैदी (Prisoners) बंद थे. यह कुल क्षमता से 115% अधिक है.

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  • Last Updated: November 28, 2019, 6:43 PM IST
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नई दिल्ली. कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद (Ravishankar Prasad) ने गुरुवार को राज्यसभा (Rajya Sabha) में बताया कि जेलों में बंद विचाराधीन कैदियों (Under Trials) के मुकदमों की शीघ्र सुनवाई पूरी करने को कहा गया है. इसके अलावा उनके खिलाफ अपराधों के आरोपों के लिए प्रस्तावित सजा की आधे से अधिक अवधि जेल में बिता चुके विचाराधीन कैदियों की जमानत पर रिहाई के लिये सभी उच्च न्यायालय (High Courts) के मुख्य न्यायाधीशों (Chief Justices) से उन्होंने अनुरोध किया है.

प्रसाद ने राज्यसभा (Rajya Sabha) में प्रश्नकाल के दौरान एक सवाल के जवाब में कहा कि उन्होंने सभी 25 उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीशों से अनुरोध किया है कि वे जिला न्यायालयों (District Courts) से विचाराधीन कैदियों के मुकदमों की यथाशीघ्र सुनवाई को सुनिश्चित करें.

2017 में भारतीय जेलों में क्षमता से 115% कैदी थे बंद
कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने टाटा ट्रस्ट की ‘भारत न्याय रिपोर्ट 2019’ (India Justice Report 2019) के हवाले से बताया कि 2016 में जेलों में बंद कैदियों में 67.7 प्रतिशत कैदी विचाराधीन थे.

उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्यूरो (NCRB) के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, 2017 में भारतीय जेलों की क्षमता 3,91,574 थी जबकि इनमें 4,50,696 कैदी बंद थे. यह कुल क्षमता से 115 प्रतिशत अधिक है.

गतिशील सुनवाई के लिए निर्धारित की गई प्रक्रिया
कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि जेलों की व्यवस्था में सुधार के लिये मंत्रालय द्वारा किये गये उपायों के तहत उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीशों से विचाराधीन मामलों के त्वरित निपटान (Quick Disposal) का अनुरोध किया है. साथ ही ऐसे विचाराधीन कैदियों को भी जमानत पर रिहा किया जाना चाहिये जो गंभीर आपराधिक मामलों में मुकदमों का सामना नहीं कर रहे हैं और प्रस्तावित सजा की आधे से ज्यादा अवधि जेल में बिता चुके हैं.
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उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया को गतिशील बनाने के लिये देश के सभी जिलों में जिला न्यायाधीश (District Judge) की अध्यक्षता में विचाराधीन मुकदमों की समीक्षा के लिये समिति कार्यरत हैं. इन समितियों ने इस बाबत एक प्रक्रिया भी निर्धारित की है.

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First published: November 28, 2019, 6:43 PM IST
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