कुलभूषण जाधव: पाकिस्तान के फैसले की तारीफ, लेकिन क्यों इसे 'बेमतलब' बता रहा है भारत?

कुलभूषण जाधव अपनी सजा के खिलाफ पाकिस्तान के किसी भी हाईकोर्ट में अपील कर सकेंगे. (फाइल फोटो)

कुलभूषण जाधव अपनी सजा के खिलाफ पाकिस्तान के किसी भी हाईकोर्ट में अपील कर सकेंगे. (फाइल फोटो)

Kulbushan Jadhav Case: भारत लगातार यह कह रहा है कि जाधव एक पूर्व नौसेना अधिकारी हैं और एक नागरिक हैं, जिन्हें ईरान (Iran) से किडनैप कर लिया गया था. वे उस दौरान कारोबार के सिलसिले में वहां पहुंचे थे.

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  • Last Updated: June 11, 2021, 10:41 AM IST
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नई दिल्ली. पाकिस्तान (Pakistan) की तरफ से कुलभूषण जाधव को देश के किसी भी हाईकोर्ट में अपील करने की इजाजत दे दी गई है. भारत (India) ने पड़ोसी के इस फैसले का स्वागत किया है. हालांकि, भारत ने यह भी कहा है कि अगर जाधव को भारतीय वकील मुहैया नहीं कराया जाता है, तो इस कानून का कोई भी मतलब नहीं है. पाकिस्तान की सैन्य कोर्ट ने जाधव को मौत की सजा सुनाई थी. इसके बाद भारत ने इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस का रुख किया था.

शुक्रवार को भारत सरकार ने कहा, 'अगर उन्हें भारतीय वकील या निष्पक्ष कानूनी सहायता नहीं दी जाती है, तो इस कानून का कोई मतलब नहीं होगा.' सरकार ने कहा कि न्याय की भावना से लिए गया यह फैसला स्वागत योग्य है. सरकार ने कहा, 'अगर पाकिस्तान किसी भारतीय वकील को नहीं चाहता है, तो उन्हें किसी तीसरे देश की मदद लेनी चाहिए.'

इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस सीजे रिव्यू एंड रिकॉन्सिडरेशन ऑर्डिनेंस, 2020 नाम का एक अध्यादेश पहले लागू किया गया था. गुरुवार को इसे नेशनल एसेंबली के सामने रखा गया और स्टैंडिंग कमेटी की मंजूरी के बाद इसे अपना लिया गया. भारत ने पहले ही मौत की सजा के खिलाफ जाधव को कानूनी सहायता नहीं दिए जाने पर फटकार लगाई थी. सरकार ने कहा था कि जाधव को कानूनी सहायता पहुंचाने के लिए अथॉरिटीज कूटनीतिक माध्यमों के जरिए पाकिस्तान से बात करेंगी.

भारत लगातार यह कह रहा है कि जाधव एक पूर्व नौसेना अधिकारी हैं और एक नागरिक हैं, जिन्हें ईरान से किडनैप कर लिया गया था. वे उस दौरान कारोबार के सिलसिले में वहां पहुंचे थे. किडनैप किए जाने के बाद उन्हें पाकिस्तान की सेना को सौंप दिया गया था. वहीं, इस्लामाबाद आरोप लगाता रहा है कि जाधव एक भारतीय जासूस है, जो पाकिस्तान के अंदर आतंकी हमले कराने में जिम्मेदार है.


संसद में हुआ विरोध

नेशनेल एसेंबली में बिल पेशहोने के साथ ही विपक्षी दलों ने इसका विरोध शुरू कर दिया था. वे बेंच पर खड़े होकर इसका विरोध कर रहे थे और कह रहे थे कि भारत की मांगों के आगे यह सरकार का आत्मसमर्पण है. उन्होंने आरोप लगाया कि खान के नेतृत्व वाली सरकार भारत के इशारे पर काम कर रही है. ICJ के भारत के पक्ष में आए फैसले के बाद जाधव को पाकिस्तान में काउंसल एक्सेस दिया गया था.

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