अवमानना मामले में कैसे दोषी करार दिए गए वकील प्रशांत भूषण, जानें खास बातें

अवमानना मामले में कैसे दोषी करार दिए गए वकील प्रशांत भूषण, जानें खास बातें
प्रशांत भूषण कोर्ट की अवमानना के मामले में दोषी ठहराए गए.

प्रशांत भूषण (Prashant Bhushan) ने प्रधान न्यायाधीश (CJI) एसए बोबडे और सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के 4 पूर्व जजों को लेकर ये टिप्पणी की थी, जिस पर कोर्ट ने स्वत:संज्ञान लेते हुए इसे अदालत की अवमानना माना था.

  • News18Hindi
  • Last Updated: August 20, 2020, 12:54 PM IST
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नई दिल्‍ली. सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने पिछले दिनों सामाजिक कार्यकर्ता और वकील प्रशांत भूषण (Prashant Bhushan) को न्यायपालिका के खिलाफ दो अपमानजनक ट्वीट के लिए आपराधिक अवमानना का दोषी ठहराया था और कहा था कि इन्हें जनहित में न्यापालिका के कामकाज की स्वस्थ आलोचना नहीं कहा जा सकता. शीर्ष अदालत ने अपने फैसले में कहा था कि प्रशांत भूषण ने उच्चतम न्यायालय की समूची संस्था को ही बदनाम करने का प्रयास किया है. आज इस मामले की सुनवाई हो रही है. इससे पहले भूषण ने बुधवार को सजा के लिए होने वाली सुनवाई स्थगित करने का अनुरोध किया था जिसे अदालत ने खारिज कर दिया.

गुरुवार को सुनवाई के दौरान प्रशांत भूषण ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का हवाला देते हुए कहा, 'मैं दया नहीं मांग रहा. मैं उदारता की अपील नहीं करता. अदालत जो भी सजा देगी वह मुझे खुशी-खुशी स्वीकार्य है.' उन्‍होंने कहा कि मेरे ट्वीट एक नागरिक के रूप में मेरे कर्तव्य का निर्वहन करने का प्रयास थे. अगर मैं इतिहास के इस मोड़ पर नहीं बोलता तो मैं अपने कर्तव्य में असफल होता. मुझे कोई भी सजा स्वीकार्य है.'

प्रशांत भूषण केस की 10 प्रमुख बातें-



1. आपराधिक अवमानना के लिए सजा के खिलाफ प्रशांत भूषण की समीक्षा याचिका दायर नहीं होने तक सुप्रीम कोर्ट ने उनकी याचिका पर पर सुनवाई टालने से इनकार कर दिया. SC का कहना है कि सजा के बाद ही फैसला पूरा होता है.
2. प्रशांत भूषण ने प्रधान न्यायाधीश (CJI) एसए बोबडे और सुप्रीम कोर्ट के 4 पूर्व जजों को लेकर ये टिप्पणी की थी, जिस पर कोर्ट ने स्वत:संज्ञान लेते हुए इसे अदालत की अवमानना माना था.

3. इस मामले की सुनवाई के दौरान प्रशांत भूषण ने कहा था कि ट्वीट भले ही अप्रिय लगे, लेकिन अवमानना नहीं है. उन्होंने कहा था कि वे ट्वीट न्यायाधीशों के खिलाफ उनके व्यक्तिगत स्तर पर आचरण को लेकर थे और वे न्याय प्रशासन में बाधा उत्पन्न नहीं करते. अदालत ने इस मामले में प्रशांत भूषण को 22 जुलाई को कारण बताओ नोटिस जारी किया था.

4. पिछली सुनवाई में न्यायमूर्ति अरूण मिश्रा, न्यायमूर्ति बीआर गवई और न्यायमूर्ति कृष्ण मुरारी की पीठ ने अपने फैसले में कहा था, 'ट्वीट जो तोड़े मरोड़े गये तथ्यों पर आधारित थे, हमारी सुविचारित राय में आपराधिक अवमानना करने के समान है. परिणामस्वरूप, हम कथित अवमाननाकर्ता-प्रशांत भूषण- को इस न्यायालय की आपराधिक अवमानना करने का दोषी ठहराते हैं.'

5. शीर्ष अदालत ने अपने 108 पेज के आदेश में ट्विटर इंक, कैलिफोर्निया, अमेरिका को अवमानना मामले में उनका स्पष्टीकरण स्वीकार करने के बाद आरोप मुक्त कर दिया था. ट्विटर इंक ने अपनी सफाई में कहा था कि वह तो सिर्फ एक मध्यस्थ था और उसका इस पर कोई नियंत्रण नहीं है कि इसका इस्तेमाल करने वाला इस प्लेटफार्म पर क्या पोस्ट करता है.

6. पीठ ने अपने आदेश में भूषण द्वारा अपनी माइक्रो ब्लागिंग साइट पर 27 जून को न्यायपालिका के पिछले छह साल के कामकाज के बारे में और 22 जुलाई को प्रधान न्यायाधीश एसए बोबडे के संबंध में पोस्ट किये गये दो ट्विट का विश्लेषण किया था. पीठ ने कहा था, 'हमारी राय में यह नहीं कहा जा सकता कि इस तरह के ट्विट जनहित में न्यायपालिका की स्वस्थ आलोचना हैं.'

7. नागपुर स्थित राजभवन में भाजपा नेता की कथित 50 लाख रुपये की मोटर साइकिल पर प्रधान न्यायाधीश की सवारी के बारे में 22 जुलाई के ट्विट का जिक्र करते हुए पीठ ने कहा था कि इसके पहले हिस्से को प्रधान न्यायाधीश की व्यक्तिगत आलोचना कहा जा सकता है लेकिन दूसरे हिस्से को नहीं.

8. पीठ ने कहा था कि इस तथ्य को ध्यान में रखना होगा कि जिस तारीख पर प्रधान न्यायाधीश ने कथित रूप से एक मोटर साइिकल की सवारी की थी उस दौरान उच्चतम न्यायालय में ग्रीष्मावकाश था और अवकाशकालीन पीठ नियमित काम कर रही थीं.

9. प्रशांत भूषण ने 134 पन्नों के जवाब में अपने ट्वीट्स को सही ठहराने के लिए कई पुराने मामलों का जिक्र किया था, जिसमें सहारा-बिड़ला डायरी मामले से लेकर जज लोया की मौत, कलिको पुल आत्महत्या मामले से लेकर मेडिकल प्रवेश घोटाले, असम में मास्टर ऑफ रोस्टर विवाद, अनुच्छेद 370 को निरस्त करने से लेकर नागरिकता संशोधन अधिनियम शामिल है.'

10. सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश कुरियन जोसेफ ने बुधवार को प्रशांत भूषण का समर्थन किया. उन्होंने कहा कि भूषण के खिलाफ अवमानना मामला कानून के मूलभूत सवाल खड़े करते हैं, जिन पर संविधान पीठ को सुनवाई करनी चाहिए. जस्टिस कुरियन जोसेफ ने यह भी कहा कि एक स्वत:संज्ञान वाले मामले में शीर्ष अदालत द्वारा दोषी ठहराया गए व्यक्ति को अंत:अदालती अपील का अवसर मिलना चाहिए.
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