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लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी: एक एक्टिविस्ट जिसने सामाजिक परिवर्तन के लिए हर बुराई के खिलाफ की लड़ाई

लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी: एक एक्टिविस्ट जिसने सामाजिक परिवर्तन के लिए हर बुराई के खिलाफ की लड़ाई

लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी. (फाइल फोटो)

लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी. (फाइल फोटो)

देश में ट्रांसजेंडर और LGBTQ समुदाय से हर स्तर पर पक्षपात होता रहा है. यहां तक कि साफ पानी और सैनेटाइजेशन को लेकर भी उन्हें पक्षपात का सामना करना पड़ा है. न्यूज़18 और हार्पिक इंडिया की पहली मिशन पानी देश में हर व्यक्ति तक साफ पानी पहुंचाने के लिए काम करती है. अब लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी भी इस जरूरी मुद्दे पर अपनी राय शेयर करेंगी. वर्ल्ड टॉयलेट डे के अवसर पर वो मिशन पानी के इवेंट में वो ट्रांसजेंडर समुदाय में साफ पानी और सैनेटाइजेशन की समस्या पर अपने विचार रखेंगी.

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    नई दिल्ली. लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी (Laxmi Narayan Tripathi) देश की ऐसी पहली ट्रांसजेडर हैं जिन्होंने यूनाइटेड नेशंस टास्क मीटिंग में एशिया-पेसिफिक का प्रतिनिधित्व किया है. देश में लक्ष्मी का LGBTQ और ट्रांसजेंडर समुदाय की बेहतरी की लड़ाई में अहम रोल रहा है. बीते कई दशकों से वो इस क्षेत्र में काम कर रही हैं. सिर्फ इतना ही नहीं वो एक अभिनेत्री, डांसर, मोटिवेशनल स्पीकर के अलावा लेखक भी हैं.

    लक्ष्मी का जन्म महाराष्ट्र के थाने जिले में साल 1978 में हुआ था. उन्होंने मुंबई के मीठीबाई कॉलेज से ग्रेजुएशन किया फिर भरतनाट्यम में पोस्ट ग्रेजुएशन किया. वो बॉलिवुड के कई डांस वीडियो में डायरेक्टर और स्क्रिप्ट राइटर केन घोष के साथ मिलकर काम कर चुकी हैं. ट्रांसजेंडर एक्टिविस्ट के तौर पर लक्ष्मी ने करीब बीस साल पहले काम करना शुरू किया. साल 2002 में उन्हें मुंबई की DAI वेलफेयर सोसायटी का अध्यक्ष बनाया गया. DAI वेलफेयर सोसायटी दक्षिण एशिया का पहला रजिस्टर्ड संगठन है जो ट्रांसजेडर्स की भलाई के लिए काम करता है.

    करीब तीन साल बाद महाराष्ट्र के गृहमंत्री आर आर पाटिल ने मुंबई के बारों पर पाबंदी लगा दी थी. लक्ष्मी ने इस निर्णय के खिलाफ प्रदर्शन की अगुवाई की. राज्य सरकार के इन निर्णय के कारण मुंबई में बार डांसरों की आजीविका खतरे में आ गई थी. हालांकि प्रदर्शनों के बावजूद राज्य के गृहमंत्री ने अपना फैसला नहीं बदला लेकिन इस घटना से लक्ष्मी की जिंदगी वास्तविक अर्थों में एक एक्टिविस्ट में तब्दील हो गई.

    साल 2007 में शुरू किया अपना एनजीओ
    साल 2007 में लक्ष्मी ने सेक्सुअल माइनॉरिटी के लिए एक एनजीओ की शुरुआत की जिसका नाम अस्तित्व था. ट्रांसजेंडर समुदाय को मान्यता दिलाने की उनकी लड़ाई साल 2014 में अपने मुकाम पर पहुंची जब सुप्रीम कोर्ट ने समुदाय को ‘थर्ड जेंडर’ माना. ट्रांसजेंडर समुदाय को सरकारी योजनाओं और आरक्षण का लाभ मिलना शुरू हुआ. नौकरी और शिक्षा में ट्रांसजेंडर समुदाय को कोटा मिला.

    आर्टिकल 377 के खिलाफ याचिका का भी हिस्सा थीं लक्ष्मी
    इसके अलावा लक्ष्मी उस याचिका का भी हिस्सा थीं जिसमें सुप्रीम कोर्ट से आर्टिकल 377 को खत्म करने की मांग की गई थी. इस आर्टिकल के तहत होमोसेक्सुअलिटी को अपराध माना जाता था. साल 2018 में इस पर भी फैसला आया. ट्रांसजेडर समुदाय के लिए लक्ष्मी का काम करना नहीं रुका और बाद में वो किन्नर अखाड़ा की अध्यक्ष भी बनीं. वो इस वक्त किन्नर अखाड़ा की महामंडलेश्वर भी हैं.

    न्यूज़18 की पहल मिशन पानी में अपनी राय रखेंगी लक्ष्मी
    दरअसल देश में ट्रांसजेंडर और LGBTQ समुदाय से हर स्तर पर पक्षपात होता रहा है. यहां तक कि साफ पानी और सैनेटाइजेशन को लेकर भी उन्हें पक्षपात का सामना करना पड़ा है. न्यूज़18 और हार्पिक इंडिया की पहली मिशन पानी देश में हर व्यक्ति तक साफ पानी पहुंचाने के लिए काम करती है. अब लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी भी इस जरूरी मुद्दे पर अपनी राय शेयर करेंगी. वर्ल्ड टॉयलेट डे के अवसर पर वो मिशन पानी के इवेंट में वो ट्रांसजेंडर समुदाय में साफ पानी और सैनेटाइजेशन की समस्या पर अपने विचार रखेंगी.

    Tags: Mission Paani, News18 Mission Paani

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