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बेंगलुरु को दिल्ली बनाना है, ट्रैक्टर से मेट्रो सिटी का घेराव करें: राकेश टिकैत की किसानों से अपील

भारतीय किसान यूनियन के प्रवक्ता राकेश टिकैत. (एएनआई/18 मार्च 2021)

भारतीय किसान यूनियन के प्रवक्ता राकेश टिकैत. (एएनआई/18 मार्च 2021)

Farm Laws: तीन कृषि कानूनों को वापस लिए जाने और एमएसपी के लिए कानूनी गारंटी देने की मांग के साथ हजारों किसान कई दिनों से दिल्ली की सीमाओं पर प्रदर्शन कर रहे हैं.

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शिवमोगा. किसान नेता राकेश टिकैत ने कर्नाटक के किसानों से अपील की है कि केंद्र सरकार के तीन विवादास्पद कृषि कानूनों के विरोध में वे ट्रैक्टर से बेंगलुरु का घेराव करें और महानगर को दिल्ली की तरह आंदोलन का केंद्र बिंदु बनाएं. उन्होंने शनिवार को यहां किसानों की एक महापंचायत में कहा, ‘‘...आपको बेंगलुरु को दिल्ली बनाना है. आपको हर दिशाओं से महानगर को घेर लेना है.’’


उन्होंने कहा कि दिल्ली की तरह केवल ट्रैक्टर का इस्तेमाल करना चाहिए, जहां 25 हजार से अधिक ट्रैक्टरों ने महानगर के प्रवेश बिंदुओं को जाम कर रखा है. दिल्ली के सीमावर्ती क्षेत्रों-- सिंघू, टीकरी और गाजीपुर में पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश सहित देश के विभिन्न हिस्से के हजारों किसानों ने कृषि कानूनों को वापस लेने और अपनी फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की मांग को लेकर तीन महीने से अधिक समय से डेरा डाले हुए हैं.


टिकैत ने दावा किया कि किसानों और उनके परिवारों ने सीमावर्ती स्थानों पर आंदोलन कर दिल्ली को घेर रखा है और कहा कि तीनों कानूनों को वापस लिए जाने तक आंदोलन जारी रहेगा. टिकैत ने कहा, ‘‘जब तक तीनों कानून वापस नहीं लिए जाते हैं, जब तक एमएसपी से संबंधित कानून नहीं बनता है, आपको कर्नाटक में भी आंदोलन जारी रखने की जरूरत है.’’


गौरतलब है कि तीन कृषि कानूनों को वापस लिए जाने और फसलों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के लिए कानूनी गारंटी देने की मांग के साथ पंजाब, हरियाणा और देश के विभिन्न हिस्सों से आए हजारों किसान कई दिनों से राष्ट्रीय राजधानी की विभिन्न सीमाओं पर प्रदर्शन कर रहे हैं.



क्या है मामला
कृषि क्षेत्र में बड़े सुधार के तौर पर सरकार ने पिछले साल सितंबर में तीनों कृषि कानूनों को लागू किया था. सरकार ने कहा था कि इन कानूनों के बाद बिचौलिए की भूमिका खत्म हो जाएगी और किसानों को देश में कहीं पर भी अपने उत्पाद को बेचने की अनुमति होगी. वहीं, किसान तीनों कृषि कानूनों को रद्द करने की मांग पर अड़े हुए हैं. प्रदर्शन कर रहे किसानों का दावा है कि ये कानून उद्योग जगत को फायदा पहुंचाने के लिए लाए गए हैं और इनसे मंडी और न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की व्यवस्था खत्म हो जाएगी.

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