ले कर्नल ने सैन्य कर्मियों के सोशल मीडिया के इस्तेमाल पर रोक के खिलाफ अदालत का दरवाजा खटखटाया

ले कर्नल ने सैन्य कर्मियों के सोशल मीडिया के इस्तेमाल पर रोक के खिलाफ अदालत का दरवाजा खटखटाया
एक वरिष्ठ अधिकारी ने 6 जून के आदेश को चुनौती दी है (सांकेतिक फोटो)

याचिका (Plea) पर मंगलवार को सुनवाई होने की संभावना है. याचिका में सैन्य खुफिया महानिदेशालय (Directorate general of military intelligence) को छह जून की नीति को वापस लेने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया है.

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नई दिल्ली. भारतीय सेना (Indian Army) के एक वरिष्ठ अधिकारी (Senior Officer) ने सैन्य कर्मियों (Military personnel) के फेसबुक और इंस्टाग्राम (Facebook and Instagram) जैसे सोशल मीडिया मंचों (Social Media Forums) का इस्तेमाल करने पर रोक लगाने वाली हालिया नीति को चुनौती देते हुए दिल्ली उच्च न्यायालय (Delhi High Court) में एक याचिका दायर की है.

याचिका पर मंगलवार को सुनवाई होने की संभावना है. याचिका में सैन्य खुफिया महानिदेशालय (Directorate general of military intelligence) को छह जून की नीति को वापस लेने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया है. इस नीति के तहत भारतीय सेना (Indian Army) के सभी सदस्यों को आदेश दिया गया है कि वे फेसबुक और इंस्टाग्राम (Facebook and Instagram) तथा 87 अन्य ऐप से अपने अकाउंट हटा लें.

'यह कार्रवाई कानून व सेना अधिनियम के प्रावधानों के अनुरूप नहीं और असंवैधानिक'
फिलहाल जम्मू-कश्मीर में तैनात लेफ्टिनेंट कर्नल पीके चौधरी ने अपनी याचिका में कहा कि वह फेसबुक पर सक्रिय रहते हैं और इस मंच का इस्तेमाल अपने दोस्तों और परिवार के साथ संपर्क में रहने के लिए करते हैं, जिनमें से अधिकतर विदेशों में बस गए हैं. उनमें उनकी बड़ी बेटी भी शामिल है.
वकील शिवांक प्रताप सिंह और सानंदिका प्रताप सिंह के जरिए दायर याचिका में अधिकारी ने रक्षा मंत्रालय के जरिए केंद्र सरकार को छह जून की नीति को वापस लेने का निर्देश देने का आग्रह किया है. साथ में यह भी सुनिश्चित करने का आग्रह किया गया है कि मनमाने तरीके से कार्यकारी कार्रवाई के जरिए सशस्त्र बलों के कर्मियों के मौलिक अधिकार खत्म नहीं हों या संशोधित न हों. याचिका में दावा किया गया है कि यह कार्यकारी कार्रवाई कानून व सेना अधिनियम के प्रावधानों और इसके तहत बनाए गए नियमों के अनुरूप नहीं हैं और असंवैधानिक हैं.



89 ऐप-वेबसाइटों के इस्तेमाल पर प्रतिबंध और अकाउंट को डिलीट करने का दिया था निर्देश
याचिका में कहा गया है कि चौधरी को नौ जुलाई को एक खबर से पता चला कि सेना का आदेश है जिसके तहत उन्हें और अन्य कर्मियों को 15 जुलाई तक फेसबुक, इंस्टाग्राम तथा 87 अन्य ऐप से अपने अकाउंट खत्म करने हैं.

याचिका में कहा गया है कि 10 जुलाई को उन्हें एक पत्र मिला जिसका शीर्षक “भारतीय सेना में सोशल मीडिया मंच एवं मोबाइल फोन के इस्तेमाल की नीति’’ था. यह सैन्य खुफिया महानिदेशालय ने जारी किया था. इनमें 89 ऐप और वेबसाइटों के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाने और अकाउंट को डिलीट करने का निर्देश था.

'अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और निजता के अधिकार सहित मौलिक अधिकार का उल्लंघन'
याचिका में कहा गया है कि नीति गोपनीय है, इसलिए वह यहां इसके किसी भी हिस्से को पुनः प्रस्तुत नहीं कर रहे हैं. याचिका में दावा किया गया है कि नीति के प्रावधान याचिकाकर्ता की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और निजता का अधिकार समेत संविधान के तहत दिए मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करते हैं.

याचिका में कहा गया है कि सैनिक दूरस्थ क्षेत्र में, खराब मौसम में, मुश्किल इलाकों में सेवा देते हैं जहां दुश्मन के हमले का हर वक्त खतरा रहता है और पेशेवर खतरों के कारण सैनिक आत्महत्या भी कर लेते हैं और कुछ मामलों में अपनी जान देने से पहले साथियों की गोली मारकर हत्या कर देते हैं.

'सैनिक डिजिटल संपर्क के जरिए अपने परिवार के साथ बनी दूरी को पाटते हैं'
याचिका में कहा गया है, “ऐसे अधिकतर मामलों का कारण सैनिक को छुट्टी दिए जाने से इनकार करना होता है. दूरदराज के इलाकों में तैनात सैनिक अपने परिवारों में उपजे मसलों को हल करने के लिए फेसबुक जैसे सोशल नेटवर्किंग मंच पर निर्भर करते हैं और डिजिटल संपर्क के जरिए अपने परिवार के साथ बनी दूरी को पाटते हैं.’’

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केंद्र और सैन्य खुफिया महानिदेशालय (Directorate general of military intelligence) के अलावा याचिका में सेना प्रमुख को भी पक्ष बनाया गया है.
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