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    केंद्र ने कहा- जहर फैला रहा है डिजिटल मीडिया, पहले उसपर कानून बनाए सुप्रीम कोर्ट

    केंद्र सरकार ने सुदर्शन टीवी मामले (Sudarshan TV Controversy) में सोमवार को सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में नया हलफनामा दाखिल किया है.
    केंद्र सरकार ने सुदर्शन टीवी मामले (Sudarshan TV Controversy) में सोमवार को सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में नया हलफनामा दाखिल किया है.

    सरकार ने कहा कि अगर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) दिशा-निर्देशों पर विचार करना चाहता है, तो कोर्ट को वेब आधारित डिजिटल मीडिया (Digital Media) को विनियमित करना होगा. हलफनामे में सरकार ने कहा कि डिजिटल मीडिया ने जहरीली नफरत फैलाते हुए जानबूझकर न केवल हिंसा, बल्कि आतंकवाद को भी बढ़ावा दिया है.

    • News18Hindi
    • Last Updated: September 21, 2020, 2:28 PM IST
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    (उत्कर्ष आनंद)

    नई दिल्ली. केंद्र सरकार ने सुदर्शन टीवी मामले (Sudarshan TV Controversy) में सोमवार को सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में नया हलफनामा दाखिल किया है. सरकार ने कहा कि वेब आधारित डिजिटल मीडिया (Digital Media) को पहले कंट्रोल करना होगा, तभी टीवी चैनलों पर नियंत्रण किया जा सकता है. केंद्र ने कहा कि कोर्ट चाहे तो डिजिटल मीडिया को लेकर कानून बनाए या कानून बनाने के लिए इसे सरकार पर छोड़ दे.

    सरकार ने कहा कि अगर सुप्रीम कोर्ट दिशा-निर्देशों पर विचार करना चाहता है, तो कोर्ट को वेब आधारित डिजिटल मीडिया को विनियमित करना होगा. हलफनामे में सरकार ने कहा कि डिजिटल मीडिया ने जहरीली नफरत फैलाते हुए जानबूझकर न केवल हिंसा, बल्कि आतंकवाद को भी बढ़ावा दिया है. वेब आधारित डिजिटल मीडिया व्यक्तियों और संस्थानों की छवि को धूमिल करने में सक्षम है और यह प्रथा खतरनाक है.



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    केंद्र सरकार ने कहा- 'सुप्रीम कोर्ट को इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के लिए दिशा-निर्देशों को बनाए रखना चाहिए. साथ ही मामले को विधायिका पर छोड़ देना चाहिए. अगर अदालत दिशा-निर्देश देना चाहता है तो वेब पत्रिकाओं, वेब आधारित समाचार चैनलों और वेब अखबारों को शामिल करें, क्योंकि उनकी व्यापक पहुंच है और यह पूरी तरह से अनियंत्रित है. '


    क्या है सुदर्शन टीवी का विवाद?
    अपने यूपीएससी जिहाद कार्यक्रम के लिए सुदर्शन टीवी सुप्रीम कोर्ट में सवालों का सामना कर रहा है. ज़कात फाउंडेशन ने सुदर्शन टीवी के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में एक हस्तक्षेप आवेदन दायर किया है. ज़कात फ़ाउंडेशन विवाद के केंद्र में है और सुदर्शन टीवी द्वारा उस पर "UPSC जिहाद" टैगलाइन के साथ अपने शो 'बिंदास बोल' में आतंकवाद से जुड़े संगठनों से विदेशी फंड प्राप्त करने का आरोप लगाया गया है.

    चैनल ने दिया जवाब
    इस बीच सुदर्शन टीवी ने भी पूरे मामले में जवाब दिया है. दूसरे चैनलों में हिंदू आतंकवाद पर बने कार्यक्रमों का हवाला देते हुए सुप्रीम कोर्ट में नया हलफनामा दाखिल कर किया है. चैनल ने कहा है कि वह प्रोग्राम कोड और सूचना-प्रसारण मंत्रालय के निर्देशों का पालन करेगा. इसलिए, कोर्ट कार्यक्रम के प्रसारण पर लगी रोक हटा ले. हालांकि, चैनल ने हिंदुओं से जुड़े मामलों में इसी तरह के प्रतीकों के इस्तेमाल की तरफ कोर्ट का ध्यान आकर्षित करने की कोशिश भी की है. चैनल ने यह जानना चाहा था कि क्या वह कार्यक्रम की प्रस्तुति में कुछ बदलाव करेगा. कोर्ट ने कार्यक्रम में नमाज़ी टोपी में मुस्लिम व्यक्ति का ग्राफिक्स दिखाए जाने को गलत बताया था.

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    पिछली सुनवाई में क्या हुआ था?
    पिछली सुनवाई में सुदर्शन टीवी ने जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़, इंदु मल्होत्रा और केएम जोसफ की बेंच के सामने इस बात से इनकार किया था कि वह पूरे मुस्लिम समुदाय को निशाना बना रहा है. चैनल के वकील श्याम दीवान ने कहा था, “जकात फाउंडेशन नाम की संस्था मुस्लिम छात्रों को यूपीएससी की परीक्षा पास करने के लिए मदद पहुंचा रही है. इस संस्था को मदीना ट्रस्ट, मुस्लिम एड, इस्लामिक फाउंडेशन जैसे विदेशी संगठनों से आर्थिक मदद मिली है. यह सभी संगठन भारत विरोधी गतिविधियों में शामिल रहे हैं. हमने खोजी पत्रकारिता के जरिए यह तथ्य निकाले और उन्हें लोगों के सामने पेश किया."
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