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गुरुग्राम के पास तेंदुए को पीट-पीटकर मार डाला, देखते रह गए वाइल्‍ड लाइफ अधिकारी

गुरुग्राम के पास तेंदुए को पीट-पीटकर मार डाला, देखते रह गए वाइल्‍ड लाइफ अधिकारी

गुरुग्राम के सोहना कस्बे  से सटे गांव मण्डावर में ग्रामीणों ने तेंदुए को पीट-पीटकर मार डाला। पुलिस और वन विभाग की टीम देखती रह गई।  इससे पहले फरीदाबाद में एक तेंदुए को ग्रामीणों ने पीट-पीटकर मार डाला था।

गुरुग्राम के सोहना कस्बे से सटे गांव मण्डावर में ग्रामीणों ने तेंदुए को पीट-पीटकर मार डाला। पुलिस और वन विभाग की टीम देखती रह गई। इससे पहले फरीदाबाद में एक तेंदुए को ग्रामीणों ने पीट-पीटकर मार डाला था।

गुरुग्राम के सोहना कस्बे से सटे गांव मण्डावर में ग्रामीणों ने तेंदुए को पीट-पीटकर मार डाला। पुलिस और वन विभाग की टीम देखती रह गई। इससे पहले फरीदाबाद में एक तेंदुए को ग्रामीणों ने पीट-पीटकर मार डाला था।

    नर्इ दिल्‍ली। गुरुग्राम के सोहना कस्‍बे से सटे गांव मण्डावर में ग्रामीणों ने तेंदुए को पीट-पीटकर मार डाला। पुलिस और वन विभाग की टीम देखती रह गई। मामला गुरुवार का है। सुबह तेंदुए ने एक युवक पर हमला करके उसे बुरी तरह से घायल कर दिया।

    इसके बाद मंडावर एवं आसपास के गांव वालों ने उसकी घेराबंदी की।  मौके पर पुलिस और वन विभाग की टीम पहुंच गई है। उसे पकड़ने के लिए घेराबंदी की गई। फिर वह गांव से निकलकर एक फार्महाउस में पहुंच गया। वहां पर जाल डालकर उसे पकड़ने की कोशिश की गई लेकिन वह उसे फाड़कर निकल गया। बताया गया है इस दौरान उसे घेरकर गांव वालों ने पीट-पीटकर मार डाला। एक ग्रामीण ने बताया कि लोग काफी दहशत में थे इसीलिए उसे मार डाला।

    जब भी कहीं तेंदुआ दिखता है तो उस पर भी बड़ा खतरा पैदा हो जाता है। 12 जनवरी 2011 को फरीदाबाद के खेड़ी गुजरान में भीड़ ने एक तेंदुए को पीट-पीटकर मार डाला था, क्‍योंकि गांव वालों को उससे खतरा लग रहा था। यह मामला उस वक्‍त सुर्खियों में था। अब यह पीट-पीटकर मारने की दूसरी घटना हो गई है। इस बारे में जब हमने हरियाणा के फॉरेस्‍ट एवं वाइल्‍ड लाइफ मिनिस्‍टर राव नरवीर से बातचीत की तो उन्‍होंने कहा कि मुझे गांव में तेंदुआ घुसने की खबर मिली है, मरने की नहीं।

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    अरावली को वन्य जीवों की सुरक्षा का कवच माना जाता रहा है। लेकिन अब इस क्षेत्र में गुरुग्राम और फरीदाबाद के कई बिल्‍डरों का कब्‍जा होता जा रहा है। पूरी अरावली में जगह-जगह निर्माण गतिविधियां जारी हैं। नतीजा यह हो रहा है कि तेंदुआ आबादी में घुस रहा है। इससे न सिर्फ आम लोगों बल्‍कि तेंदुओं की जान पर भी खतरा बढ़ रहा है।

    सेव अरावली से जुड़े पर्यावरणविद् जितेंद्र भड़ाना कहते हैं कि मंडावर के आसपास नेताओं ने अपने फार्महाउस बनाकर जंगल को तहस-नहस कर दिया है। भोजन से अधिक प्यास बुझाने के लिए तेंदुए या अन्य वन्य जीव रिहायशी इलाकों में भागते हैं। जिसकी वजह से यह इन इलाकों में दिखने लगे हैं। जंगल में न पीने के पानी का इंतजाम और न ही शिकारियों से सुरक्षा का। इस तेंदुए को मारना दुर्भाग्‍यपूर्ण है।

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    पीपल फॉर एनिमल हरियाणा के चेयरमैन नरेश कादयान का कहना है कि जंगली जानवरों को लोगों से खतरा है। लोगों को जंगली जानवरों से कोई खतरा नहीं है। लोगों ने ही जंगलों पर कब्‍जा कर लिया है, इसलिए वे बेचारे कहां जाएं।

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    अरावली में तेंदुओं पर संकट

    -अप्रैल 2014: चार तेंदुओं की मौत मानेसर गोल्फ कोर्स परिसर के आसपास संदिग्ध अवस्था में हुई थी।

    -नवंबर 2014: मानेसर के सहरावन गांव के पास सड़क दुर्घटना में 12 वर्षीय तेंदुए की मौत हो गई थी।

    -मई 2015: गुडग़ांव-फरीदाबाद पर एक तेंदुए की मौत सड़क दुर्घटना में हो गई थी।

    -मई 2016: सोहना क्षेत्र के गैरतपुर बांस के जंगलों में मृत मिला तेंदुआ।

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    कब-कब दिखाई दिए तेंदुए

    -जनवरी 2016 में गैरतपुर बास से सटे जंगलों में पेड़ से बंधा मिला था शावक।

    -13 जनवरी, 2015: सोहना के दमदमा इलाके में दिखा था तेंदुआ और शावक।

    -08 मई 2015: मांगर के पास सड़क पर तेंदुआ दिखा।

    -06 अगस्त, 2015: मानेसर के पास अरावली में तेंदुआ दिखने से मचा था हड़कंप।

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    Tags: गुड़गांव, हरियाणा

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