होम /न्यूज /राष्ट्र /सबक सीखना बाकी: राजस्थान के बाद, CM और बाजवा की लड़ाई से पंजाब कांग्रेस में बढ़ी परेशानी

सबक सीखना बाकी: राजस्थान के बाद, CM और बाजवा की लड़ाई से पंजाब कांग्रेस में बढ़ी परेशानी

प्रताप सिंह बाजवा (बाएं) और अमरिंदर सिंह की फाइल फोटो

प्रताप सिंह बाजवा (बाएं) और अमरिंदर सिंह की फाइल फोटो

दोनों के बीच की यह दुश्मनी तब शुरू हुई थी जब बाजवा प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PCC) के प्रमुख थे और सिंह ने बहुत जोर दिया था ...अधिक पढ़ें

    (पल्लवी घोष)

    नई दिल्ली. यह स्पष्ट है कि कांग्रेस (Congress) को अभी सबक सीखना बाकी है. जबकि इसका शीर्ष नेतृत्व अब भी राजस्थान (Rajasthan) में अशोक गहलोत बनाम सचिन पायलट (Ashok Gehlot versus Sachin Pilot battle) की लड़ाई को सुलझाने की कोशिश कर रहा है. एक ऐसी ही लड़ाई पंजाब में खुले तौर पर कांग्रेस के दो नेताओं के बीच जारी है. मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह (Chief Minister Amarinder Singh) और राज्यसभा सांसद प्रताप सिंह बाजवा लड़ रहे हैं. इस समस्या की शुरुआत पिछले हफ्ते जहरीली शराब पीने (consumption of hooch) से हुई लोगों की मौतों के बाद से हुई थी और इस मुद्दे को बाजवा ने सिंह को लिए एक पत्र में उठाया था. लेकिन जब एक संवाददाता सम्मेलन में पूछा गया, तो सिंह ने इस पत्र को खारिज कर दिया गया और उन्होंने कहा कि बाजवा ने जो लिखा था, उस पर उन्होंने कभी संज्ञान नहीं लिया.

    दोनों के बीच की यह दुश्मनी तब शुरू हुई थी जब बाजवा प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PCC) के प्रमुख थे और सिंह ने बहुत जोर दिया था कि उन्हें हटा दिया जाए. बाजवा को 2016 में सिंह की पसंद के उम्मीदवार से बदल दिया गया था और उन्हें (बाजवा को) मुआवजे के तौर पर राज्यसभा सीट (Rajya Sabha Seat) दी गई थी. तब से हालात खराब बने हुए हैं और राजस्थान (Rajasthan) के मामले की तरह ही यहां भी दोनों नेताओं के बीच झगड़े या तनाव को सुलझाने की कोई कोशिश नहीं की गई है.

    ताजा कदमों ने और बदतर कर दिये संबंधों के हालात
    ताजा कदमों ने हालात को और बदतर बना दिया है. पंजाब सरकार ने शनिवार को बाजवा की सुरक्षा इस आधार पर वापस ले ली कि उन्हें सुरक्षा का कोई खतरा नहीं है. 1980 में राज्य सरकार की ओर से बाजवा को तब सुरक्षा दी गई थी जब आतंकवाद अपने चरम पर था. लेकिन अब यह उनसे वापस ले ली गई है. इसका एक आधार यह भी बताया गया है कि उनके पास केंद्र सरकार की ओर से प्रदान की गई सुरक्षा है. यह सुरक्षा संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (UPA) के डिस्पेंसन को मिली सुरक्षा के वितरण के जरिए प्रदान की गई थी.

    जब इसे हाल ही में केंद्र सरकार ने हटा दिया था, तब राज्यसभा में कांग्रेस के नेता ने गृह मंत्री अमित शाह को एक पत्र लिखा था. और बाजवा के अनुसार इसमें कहा गया था, केंद्र से कोई विशेष एहसान नहीं मांगा गया है.

    'अनुचित साधनों का लिया सहारा'
    बाजवा ने शनिवार को कहा, "मैंने पंजाब में प्रशासन की विफलता और सीएम अमरिंदर सिंह की अनुचित कार्यप्रणाली के खिलाफ खुलकर बात की थी." उन्होंने कहा था, "जाहिर है, अपने सामान्य तरीकों से, मेरी सुरक्षा वापस लेने और मेरे परिवार को जोखिम में डालने के लिए उन्हें अनुचित साधनों का सहारा लेना पड़ा."

    यह भी पढ़ें: विदेश मंत्री जयशंकर बोले- भारत और चीन पर दुनिया का बहुत कुछ निर्भर करता है

    इस नये टकराव ने केवल फिर से यह बात उजागर की है कि दिल्ली के राज्यों की समस्याओं की ओर आंखें मूंद लेना और चीजें जिस दशा में जा रही हो, उन्हें जाने देना, यह केवल पार्टी को कमजोर करता है और गांधी परिवार की शक्ति को नष्ट करता है. कांग्रेस पहले ही ज्योतिरादित्य सिंधिया, प्रद्युत देब बर्मन जैसे कई नेताओं को खो दिया है, और पायलट भी छोड़ने की कगार पर है. इस दौरान अक्सर जाग जाने के लिए दी जाने वाली आवाजों को अनदेखा किया जा चुका है.

    Tags: Amarindar singh, Congress, Punjab, Rahul gandhi, Rajasthan news, Sonia Gandhi

    विज्ञापन

    टॉप स्टोरीज

    अधिक पढ़ें