केरल में ISIS लड़ाके को आजीवन कारावास, NIA कोर्ट ने कहा- सुधारने के सामान्य तरीके शायद काम आए

प्रतीकात्मक तस्वीर (News18.com)
प्रतीकात्मक तस्वीर (News18.com)

NIA अदालत ने केरल निवासी सुब्हानी हजा मोइदीन को भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 120 (बी) और धारा 125 तथा गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम कानून (यूएपीए) की धारा 20 के तहत दोषी पाया था.

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  • Last Updated: September 30, 2020, 10:13 AM IST
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तिरुवनंतपुरम. केरल (Kerala) स्थित कोच्चि (Kocchi) की एक NIA अदालत ने सोमवार को एक व्यक्ति को आजीवन कारावास की सजा सुनायी जिसे जानबूझकर ISIS (ISIS) में शामिल होने और बाद में इस खतरनाक आतंकवादी संगठन की गतिविधियों को आगे बढ़ाने के लिए इराक जाने का दोषी ठहराया गया था. विशेष एनआईए अदालत ने इसके साथ ही केरल निवासी सुब्हानी हजा मोइदीन पर 2,10,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया जिसे एनआईए ने 2016 में तमिलनाडु में केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों एवं राज्य पुलिस की मदद से की गई एक कार्रवाई के बाद गिरफ्तार किया था. सजा सुनाते हुए एनआईए अदालत ने कहा कि 'इसने कितनी आसानी से तुर्की में कांसुल जनरल को धोखा दिया. किसी से बात करने के लिए एक ही ब्रांड का फोन इस्तेमाल करना और शख्स ने अपनी वापसी  के बारे में किसी को नहीं बताया. यह दिखाता है कि इन्हें सुधारने के लिए सामान्य तरीके शायद ही काम आएं.'

एनआईए के अनुसार, 'मोइदीन अप्रैल 2015 में चेन्नई से रवाना हुआ और सीरिया और इराक में आईएसआईएस के युद्ध में शामिल होने के इरादे से इस्तांबुल के माध्यम से मोसुल, इराक पहुंचा.'

अनफिट करार दिया गया सुब्हानी
उसे 25 दिनों का 'धार्मिक प्रशिक्षण' और 21 दिनों का 'हथियार प्रशिक्षण' दिया गया था, जो मुख्य रूप से ऑटोमेटिक राइफ़ल्स को डिसममेंटल और फिर असेंबल करने से जुड़ा था.  शारीरिक प्रशिक्ष के रूप में  मोइदीन को किकिंग प्रैक्टिस करने के लिए कहा गया था, जिसमें वह अपने दाहिने पैर के साथ एक किक पूरा करने के बाद अपने बाएं पैर पर उतरना था.. हालांकि  उसके कबूलनामे के अनुसार, वह ठीक से उतरने में विफल रहा, उसके बाएं घुटने में 'बिजली का झटका जैसा दर्द'महसूस हुआ, और खुरदरी सीमेंट की फर्श पर गिर गया. उसके ट्रेनर्स ने बाद में उसे अनफिट करार दिया, और उन्हें गार्ड ड्यूटी पर लगाया.




एक दिन, जब वह गार्ड ड्यूटी पर था, एक शेलिंग में दो लड़ाकों को मार दिए गए जिसके लिए मोइदीन ने खुद को दोषी ठहराया. उसने घर लौटने की अनुमति मांगी, जिसे खारिज कर दिया गया और मोइदीन को जेल में डाल दिया गया. अंत में उसे एक अकेला छोड़ दिया गया जहां से उसने तुर्की में सीमा पार की.  इस्तांबुल में वाणिज्य दूतावास में, उन्होंने झूठ बोला कि वह एक पर्यटक था जिसके दस्तावेज गुम हो गए. उसने बताया कि यहां  वह एक सूफी समूह के साथ था. सितंबर 2015 में वह भारत लौट आया.

साल 2016 में NIA ने दर्ज किया था केस
देश वापस लौटकर मोइदीन ने आईएसआईएस को पसंद करने वालों से संपर्क किया. जिनसे वह सोशल मीडिया पर मिला था. एनआईए के अनुसार  'उसने दो नकली सिम कार्ड भी खरीदे. उसने क्लोरेट, फॉस्फोरस, सल्फर और एल्यूमीनियम पाउडर, (विस्फोटक) में से प्रत्येक को 50 किलोग्राम इकट्ठा करने की कोशिश की जो 5 किमी के दायरे तक के क्षेत्र को नष्ट कर सकता है.'

एनआईए ने मामला अक्टूबर 2016 में इस विश्वसनीय सूचना के आधार पर दर्ज किया कि कुछ युवाओं ने एक षड्यंत्र रचा है और आतंकवादी संगठन ISIS के उद्देश्यों को आगे बढ़ाने के लिए भारत में आतंकवादी हमले करने की तैयारी कर रहे हैं. एनआईए के अनुसार तीन अक्टूबर 2016 को तमिलनाडु के तिरुनवेली जिले में स्थित मोइदीन के मकान पर छापा मारा गया था जिससे ऐसी सामग्री बरामद हुई जिससे पश्चिम एशिया में संघर्ष वाले क्षेत्र में उसकी यात्रा करने का पता चला और उसे पांच अक्टूबर को गिरफ्तार कर लिया गया.
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