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हवाई जहाज की तरह कंट्रोल रूम से संपर्क में रहेंगी ट्रेनें, रेलवे ने शुरू की नई प्रणाली

भारतीय रेलवे में पहली बार मोबाइल रेडियो ट्रेन कम्युनिकेशन की शुरूआत हो गई है. (प्रतीकात्‍मक चित्र)

भारतीय रेलवे में पहली बार मोबाइल रेडियो ट्रेन कम्युनिकेशन की शुरूआत हो गई है. (प्रतीकात्‍मक चित्र)

भारतीय रेलवे में पहली बार मोबाइल रेडियो ट्रेन कम्युनिकेशन की शुरूआत हो गई है. यह वैसी ही प्रणाली है जैसी प्‍लेन और कंट्रोल रूम के बीच संपर्क के लिए अपनाई जाती है. इस सिस्‍टम से मोटरमैन और गार्डों को रेलवे कंट्रोल रूम के साथ सीधे संपर्क में रहने में मदद मिलेगी. इसकी शुरूआत सोमवार को पश्चिमी रेलवे के मुंबई सेंट्रल स्‍टेशन से हुई. इस परियोजना को 2014 में मंजूरी दे दी गई थी.

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मुंबई. भारतीय रेलवे (Indian Railway) में पहली बार एक परिष्कृत संचार प्रणाली सोमवार को यहां शुरू की गई जो नियंत्रण कक्ष और पश्चिमी रेलवे (डब्ल्यूआर) की उपनगरीय ट्रेनों के गार्ड और मोटरमैन को निर्बाध संचार में सक्षम बनाएगी. यह जानकारी एक वरिष्ठ अधिकारी ने दी. डब्ल्यूआर के महाप्रबंधक आलोक कंसल ने मुंबई सेंट्रल स्टेशन पर मोबाइल रेडियो ट्रेन कम्युनिकेशन (एमआरटीसी) शुरू करने के बाद संवाददाताओं से कहा, ‘‘जैसे आकाश में उड़ने वाली उड़ानें हवाई यातायात नियंत्रण के साथ निरंतर संपर्क में रहती हैं, वैसे ही यह नई प्रणाली मोटरमैन और गार्डों को रेलवे नियंत्रण कक्ष के साथ सीधे संपर्क में रहने में मदद करेगी.’’

कंसल ने कहा कि पहली बार भारतीय रेलवे में एमआरटीसी प्रणाली शुरू की गई है. उन्होंने कहा, ‘‘इस परियोजना को 2014 में मंजूरी दे दी गई थी, लेकिन इसमें विभिन्न कारणों से कम से कम तीन साल की देरी हुई, जिसमें विभिन्न अनुमोदन और लाइसेंस प्राप्त करना शामिल था..’’

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एक और उपलब्धि रेलवे के नाम 
कोटा रेल मंडल (Kota Railway Division) ने नया इतिहास रचा है. यहां एक परीक्षण ट्रेन को अधिकतम 185 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ाया गया. यह रफ्तार भारत (India) में दौड़ी अब तक सभी ट्रेनों में सबसे अधिक बताई जा रही है. कोटा में इन दिनों रेलवे की ओर से नये बनाये गये तृतीय श्रेणी के वातानुकूलित इकोनॉमी क्लास के कोच का परीक्षण किया जा रहा है.



दो दिन पहले 26 फरवरी (शुक्रवार) 2021 को कोटा से लबान के बीच इस कोच का परीक्षण किया गया. परीक्षण के दौरान ट्रेन के इंजन का स्पीडो मीटर का कांटा 185 के ऊपर पहुंच गया. कुछ सैंकड़ों के लिए यह कांटा 186 पर भी टिका रहा. ट्रेन को अधिकतम 186 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से सफलतापूर्वक दौड़ने पर अधिकारी खुशी से फूले नहीं समाये. इसके बाद ट्रेन की रफ्तार को घटाया गया. परीक्षण से पहले वजन के लिए कोच में रेती से भरे कट्टे रखे गए थे. उल्लेखनीय है कि गतिमान एक्सप्रेस भारत में सबसे तेज गति से चलने वाली ट्रेन है. यह ट्रेन दिल्ली और झांसी के बीच 160 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ती है. भारत में चलने वाली ट्रेनों की औसत गति 36 से लेकर 112 किलोमीटर प्रतिघंटा है.
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