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तो इस वजह से गीर अभयारण्य में हुई 21 शेरों की मौत...

इन शेरों को उसी वायरस ने दबोचा था, जिनकी वजह से तंजानिया के एक रिजर्व जंगल में 1000 शेर मर गए थे.

इन शेरों को उसी वायरस ने दबोचा था, जिनकी वजह से तंजानिया के एक रिजर्व जंगल में 1000 शेर मर गए थे.

इन शेरों को उसी वायरस ने दबोचा था, जिनकी वजह से तंजानिया के एक रिजर्व जंगल में 1000 शेर मर गए थे.

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    गुजरात वन विभाग का दावा है कि गीर अभयारण्य में मरे 21 शेरों में से चार जानलेवा वायरस के शिकार बने हैं. इन शेरों को उसी वायरस ने दबोचा था, जिनकी वजह से तंजानिया के एक रिजर्व जंगल में 1000 शेर मर गए थे.

    ये भी पढ़ें : गिर अभयारण्य में आखिर कैसे मरे 10 दिन में 13 शेर!

    वन विभाग के मुताबिक ये शेर डिसटेंपर रोग से संक्रमित थे. डिसटेंपर बड़ी बिल्लियों और दूसरे किटकिटाने वाले जानवरों के लिए जानलेवा वायरस के तौर पर जाना जाता है. इस तरह से दुनिया भर में एशियाई शेरों के अकेले ठिकाने पर एक बाहरी खतरा मड़रा रहा है.

    गुजरात के वन विभाग ने सोमवार शाम इस बात की भी पुष्टि की कि अभयारण्य के पूर्वी डिविजन के डलखानिया से लाकर जशधार के इलाज और पुनर्वास केंद्र में रखे गए 10 एशियाई शेर मार गए. ये शेर 20 से 30 सितंबर के बीच मरे. इससे पहले 12 से 19 सितंबर के बीच शावकों समेत 11 शेर डलखानिया रेंज में मरे पाए गए थे.

    पुणे के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी की प्रारंभिक रिपोर्टों ने भी इसकी पुष्टि की है. विशेषज्ञों के मुताबिक इस रोग के वायरस कुत्तों से जानवरों में फैलते हैं. इसे कैनाइन डिसटेंपर वायरस (सीवीडी) कहा जाता है. जानकार इस वजह से भी चिंतित है क्योंकि इसी वायरस ने तंजानिया के सेरेंगेटी रिजर्व में 1000 शेरों की 1994 में जान ले ली थी.

    सूत्रों के मुताबिक इस वायरस के फैसले से बहुत बड़ी परेशानी भी हो सकती है, क्योंकि एशियाई शेर की आबादी एक ही जगह पाई जाती है. सोमवार को जारी एक बयान में गुजरात वन विभाग ने कहा है कि 21 शेरों में से छह प्रोटोजोआ संक्रमण के कारण मरे हैं, जबकि चार किसी और वायरस से. वन विभाग के एक अधिकारी के मुताबिक- “प्रोटोजोआ संक्रमण आम तौर पर गीर के जंगलों में कुत्तों, जानवरों और यहां तक कि घास के जरिए भी हो सकता हैं.’’

    सेमार्डी इलाके से 31 शरों को जामवाला पुनर्वास केंद्र में ले जाया गया. उन्हें आइसोलेशन में रखा गया है और उनकी निगरानी की जा रही है. फिर भी जानकार इस वायरस के फैलने को लेकर चिंतित हैं.

    वन्यजीव के प्रधान मुख्य वन संरक्षक अक्षय कुमार सक्सेना वन विभाग ने दिल्ली चिड़ियाघर से पॉली-वालेंट टीके मंगा लिए हैं. इसे सभी पकड़े गए शेरों को लगाया जाएगा. पिछली गिनती में गीर अभयारण्य में शेरों की कुल संख्या 523 बताई गई थी.

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