चुनावों के लिए इस तरह फिल्मी अंदाज में हो रही है शराब की तस्करी

कार्यकर्ताओं से लेकर वोटरों तक शराब पहुंचाने की चर्चाएं खूब आम होती हैं. वोटिंग से एक रात पहले तो मानों शराब की नदी बहने लगती है. उम्मीदवार भी दिल खोलकर शराब परोसते हैं.

नासिर हुसैन | News18Hindi
Updated: April 17, 2019, 9:43 AM IST
चुनावों के लिए इस तरह फिल्मी अंदाज में हो रही है शराब की तस्करी
प्रतीकात्मक फाइल फोटो.
नासिर हुसैन
नासिर हुसैन | News18Hindi
Updated: April 17, 2019, 9:43 AM IST
चुनावों में जब तक आखिरी वोट नहीं डल जाता है जाम की महफिल सजती रहती हैं. कार्यकर्ताओं से लेकर वोटरों तक शराब पहुंचाने की चर्चाएं खूब आम होती हैं. वोटिंग से एक रात पहले तो मानों शराब की नदी बहने लगती है. उम्मीदवार भी दिल खोलकर शराब परोसते हैं.

लोकसभा चुनाव 2019 में भी कुछ ऐसा ही चल रहा है. कुछ इक्का-दुक्का शराब के ट्रक पकड़े भी जा रहे हैं. तीन दिन पहले ही मथुरा में 40 लाख रुपये की शराब पकड़ी गई थी. अगर शराब की तस्करी के तरीके को देखें तो एकदम फिल्मी अंदाज है. तस्करों का ये ही अंदाज 'लेवल-6' पुलिस की आंखों में धूल झौंक रहा है. शराब बंदी वाले राज्य बिहार-गुजरात में भी खूब तस्करी हो रही है.

लेकिन पुलिस तस्करों के लेवल-6 के चक्रव्यूह को नहीं तोड़ पा रही है. ये ही वजह है कि तस्कर लगातार ट्रक और कंटेनरों द्वारा शराब की तस्करी कर रहे हैं. तस्करों के लेवल-6 का खुलासा हाल में, यूपी की कानपुर पुलिस ने किया जब अवैध शराब से भरा कंटेनर पकड़ा गया. पुलिस से बातचीत के बाद न्यूज़18 संवाददाता ने जाना कि कैसे तस्कर एक-दूसरे की निगाह में आए बगैर लेवल-6 के तरीके पर चलते हुए शराब की तस्करी कर रहे हैं.

जानकारों की मानें तो हरियाणा से चली शराब की एक बोतल जिसकी कीमत 600 से 700 रुपये होती है वो बिहार और गुजरात पहुंचकर दो हजार रुपये तक की बिक जाती है. कानपुर देहात में डेरापुर क्षेत्र के सीओ (सर्किल अफसर) टीबी सिंह ने बताया कि हाल ही में एक कंटेनर के साथ दो लोगों के पकड़े जाने के बाद तस्करों के लेवल-6 का खुलासा हुआ, जो इस तरह काम करता है. इस खुलासे के लिए टीबी सिंह को डीजीपी ने सम्मानित भी किया है.

लेवल एक यानी हरियाणा में बैठा वो शख्स है, जिसके पास बड़ी मात्रा में शराब है और वो उसे बिहार, गुजरात या किसी दूसरे राज्य में भेज रहा है. इस शराब माफिया को किसी भी लेवल से जुड़ा कोई व्यक्ति चेहरे या नाम से नहीं जानता. बस लेवल दो से जुड़ा व्यक्ति ही इस माफिया को सिर्फ मोबाइल नम्बर से जानता है.

लेवल दो होता है दलाल. इसका काम हरियाणा के शराब माफिया का संपर्क बिहार और गुजरात में अवैध शराब खरीदने वाले माफिया से कराना होता है. संपर्क कराने का ये खेल पूरी तरह मोबाइल पर होता है. खास बात ये कि बीच की कड़ी का ये मोहरा ही दोनों लोगों से बातचीत के बाद तय करता है कि माल हरियाणा से किस दिन निकलेगा और किस दिन तक पहुंचेगा दूसरे राज्य में पहुंचेगा.

लेवल तीन का काम छोटा लेकिन बहुत ही खास है. लेवल तीन अवैध शराब को हरियाणा में रखने के लिए गोदाम का इंतज़ाम करता है. साथ ही, शराब को एक तयशुदा दिन और वक्त पर ट्रक में लोड कराने का काम करता है. शराब ट्रक में लोड होते ही लेवल तीन का काम खत्म हो जाता है और वो लेवल दो को माल लोड हो जाने की जानकारी दे देता है.
Loading...

लेवल चार का काम तस्करी के लिए ज़रूरी सामान का इंतज़ाम करना है. लेवल चार ही ट्रक का इंतज़ाम करता है. साथ ही, हर लेवल पर दिए जाने वाले मोबाइल फोन और सिम, शराब के लिए फर्ज़ी कागज़ तैयार कराने व कार का इंतज़ाम की ज़िम्मेदारी भी लेवल चार की होती है. सबसे खास ये कि शराब से लदे ट्रक को गोदाम से हरियाणा के ढाबे पर खड़ा करने का काम भी लेवल चार ही करता है.

लेवल पांच का काम शराब से लदे ट्रक को पायलट करना है. ये पायलट कार ट्रक से तीन से पांच किमी की दूरी बनाकर चलती है. रास्ते में जैसे ही कहीं चेकिंग या कोई खतरा दिखाई देता है, तो पायलट कार ट्रक ड्राइवर को फोन कर देती है. इसके बाद ट्रक ड्राइवर या तो कुछ देर ट्रक रोक लेता है या दूसरे रास्ते पर डाल देता है. ये बार्डर पार कराने का पूरा खेल है. कानपुर में कंटेनर इसलिए पकड़ा गया क्योंकि हरियाणा से साथ चली पायलट कार यूपी वेस्ट का बार्डर पार कराकर बुलंदशहर से वापस लौट गई थी. इसके बाद ट्रक को दूसरी पायलट कार मिलनी थी लेकिन कानपुर पहुंचते ही पुलिस ने ट्रक के लिए जाल बिछा रखा था.

ये भी पढ़ें- महिलाओं की एंट्री पर विवाद, इस मस्जिद में महिलाएं पढ़ती हैं नमाज़

लेवल छह में सिर्फ ट्रक ड्राइवर है. लेवल चार ड्राइवर को ट्रक की चाबी, मोबाइल और ज़रूरी कागज़ सौंपता है. ड्राइवर को सिर्फ ये पता होता है कि ट्रक को कहां, कौन से ढाबे पर छोड़ना है. ट्रक वहां पहुंचाने के बाद ड्राइवर लेवल चार को खबर दे देता है. इस काम के बदले ड्राइवर को 40 से 45 हजार रुपये मिलते हैं. खास बात ये कि शराब तस्करी के इस काम में छोटा-बड़ा हर लेन-देन सिर्फ हवाला के ज़रिए किया जाता है. जब जिस लेवल का काम पूरा होता है, तब मोबाइल पर उसे हवाला ट्रेडर का मोबाइल नम्बर देकर कोड बता दिया जाता है. जैसे ही ट्रक अपनी मंज़िल पर पहुंचता है, सभी लेवल के लोग अपने-अपने मोबाइल और सिम कार्ड तोड़ देते हैं.

ये भी पढ़ें-

कुमार विश्वास ने किसकी तस्वीर ट्वीट कर कहा, ‘ये भोले पशु कुल से हैं, मित्रहंता, थूकचट्टा वंश से नहीं’

इस मोबाइल नम्बर पर कांग्रेस बता रही है कैसे मिलेंगे 72 हजार रुपये

कोई और डाल गया है आपका वोट, फिर भी आप ऐसे कर सकते हैं मतदान
Loading...

और भी देखें

पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर
Loading...

वोट करने के लिए संकल्प लें

बेहतर कल के लिए#AajSawaroApnaKal
  • मैं News18 से ई-मेल पाने के लिए सहमति देता हूं

  • मैं इस साल के चुनाव में मतदान करने का वचन देता हूं, चाहे जो भी हो

    Please check above checkbox.

  • SUBMIT

संकल्प लेने के लिए धन्यवाद

काम अभी पूरा नहीं हुआ इस साल योग्य उम्मीदवार के लिए वोट करें

ज्यादा जानकारी के लिए अपना अपना ईमेल चेक करें

Disclaimer:

Issued in public interest by HDFC Life. HDFC Life Insurance Company Limited (Formerly HDFC Standard Life Insurance Company Limited) (“HDFC Life”). CIN: L65110MH2000PLC128245, IRDAI Reg. No. 101 . The name/letters "HDFC" in the name/logo of the company belongs to Housing Development Finance Corporation Limited ("HDFC Limited") and is used by HDFC Life under an agreement entered into with HDFC Limited. ARN EU/04/19/13618
T&C Apply. ARN EU/04/19/13626