कर्नाटक में प्री-पोल डील से JDS-कांग्रेस कार्यकर्ताओं में फूट, BJP के हौसले बुलंद

कर्नाटक में प्री-पोल डील से JDS-कांग्रेस कार्यकर्ताओं में फूट, BJP के हौसले बुलंद
राहुल गांधी और एचडी कुमारस्वामी

कर्नाटक जेडीएस, कांग्रेस और बीजेपी के बीच त्रिकोणीय मुकाबले के लिए जाना जाता है. ऐसे में अगर जेडीएस-कांग्रेस अपना मतभेद नहीं दूर कर पाए, तो निश्चित तौर पर बीजेपी इसका फायदा ले जाएगी.

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 14, 2019, 9:05 AM IST
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(दीपा बालाकृष्णन)

कर्नाटक में पिछले साल विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) स्पष्ट बहुमत पाने से चूक गई, लेकिन लोकसभा में उसके हौसले बुलंद हैं. राज्य में जनता दल सेक्युलर (JDS) और कांग्रेस के गठबंधन में फूट पड़ चुकी है और वो सबके सामने उजागर भी हो चुकी है. ऐसे में जिस गठबंधन ने बीजेपी को सरकार को बनाने से रोक दिया था, वहीं गठबंधन अब लोकसभा में बीजेपी के लिए फायदेमंद साबित होता दिख रहा है.

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जेडीएस और कांग्रेस के जमीनी कार्यकर्ताओं और समर्थकों के बीच खाई पटने का नाम नहीं ले रही. कर्नाटक जेडीएस, कांग्रेस और बीजेपी के बीच त्रिकोणीय मुकाबले के लिए जाना जाता है. ऐसे में अगर जेडीएस-कांग्रेस अपना मतभेद नहीं दूर कर पाए, तो निश्चित तौर पर बीजेपी इसका फायदा ले जाएगी. लोकसभा चुनाव 2019 के दूसरे चरण के तहत 18 अप्रैल को दक्षिण कर्नाटक की 14 सीटों पर वोटिंग होनी है. ऐसे में इस मतदान से ये भी साबित हो जाएगा कि दक्षिण कर्नाटक के मतदाताओं ने जेडीएस-कांग्रेस के गठबंधन को स्वीकार किया है या नहीं.
18 अप्रैल को दक्षिण कर्नाटक की उदुपी, चिकमंगलूर, हासन, दक्षिण कन्नड़, चित्रदुर्गा, तुमकुर, मांड्या, मैसूर, चामराजनगर, बेंगलुरु ग्रामीण, बेंगलुरु उत्तर, बेंगलुरु मध्य, बेंगलुरु दक्षिण, चिक्काबल्लापुर, कोलार में मतदान है. पिछले साल हुए विधानसभा चुनाव में दक्षिण कर्नाटक में जेडीएस और कांग्रेस के बीच कांटे की टक्कर देखी गई थी.

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विधानसभा चुनाव बाद मौजूदा राजनीतिक संकट को देखते हुए कांग्रेस-जेडीएस ने गठबंधन तो कर लिया, तब जरूरत को समझते हुए दोनों पार्टियों के कार्यकर्ताओं ने इसे बेमन ने स्वीकार भी कर लिया, लेकिन अब दोनों पार्टियों के कार्यकर्ता गठबंधन पर नाखुशी जाहिर कर रहे हैं. जेडीएस-कांग्रेस के कार्यकर्ताओं के बीच खाई दिनोंदिन बढ़ती जा रही है. पार्टी संगठन पर भी इसका असर दिख रहा है.

लोकसभा चुनाव को लेकर हुए प्री-पोल अलायंस के तहत जेडीएस राज्य के कुल 28 लोकसभा सीटों में से 7 और कांग्रेस 21 सीटों पर चुनाव लड़ रही है. हालांकि, मांड्या, तुमकुर और हसन सीट को लेकर दोनों पार्टियों में मतभेद हैं.


तुमकुर में मौजूदा कांग्रेस सांसद ने जेडीएस को अपनी सीट देने से इनकार कर दिया और एक स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में अपना नामांकन दाखिल किया. बाद में उन्हें जेडीएस के राष्ट्रीय अध्यक्ष एचडी देवगौड़ा के रूप में अपनी उम्मीदवारी वापस लेने के लिए मना लिया गया था. हासन में एक पूर्व कांग्रेस मंत्री बीजेपी में शामिल हो गए और भगवा टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं. पार्टी में ये विद्रोह मुख्य रूप से जेडीएस के उम्मीदवार प्रज्वल रेवन्ना, देवेगौड़ा के पोते के खिलाफ था. वहीं, मांड्या सीट पर दोनों पार्टियों के बीच प्यार-नफरत का रिश्ता चरम पर आ गया है.

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जाहिर है इसका सीधा फायदा बीजेपी को मिलने की उम्मीद है, लेकिन इसके साथ ही बीजेपी को कर्नाटक में मोदी की लोकप्रियता का लाभ मिल सकता है. बताया जाता है कि पिछले दिनों कार्यकर्ताओं के साथ बैठक के दौरान कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने प्रधानमंत्री के खिलाफ अपशब्दों का प्रयोग कर दिया. इस पर कांग्रेसी कार्यकर्ता ही नाराज हो गए. यह कर्नाटक में मोदी की लोकप्रियता के साथ उनके प्रति सम्मान को भी दिखाता है. जाहिर है 2014 में 28 में से 17 सीटें जीतने वाली बीजेपी इस बार 22 सीटों पर जीत का दावा करने लगी है.

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