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बंगाल चुनाव में 'नश्य शेख समुदाय' बन सकता है गेम चेंजर, बीजेपी-TMC दोनों की निगाहें इन पर

बंगाल चुनाव में 'नश्य शेख समुदाय' बन सकता है गेम चेंजर, बीजेपी-TMC दोनों की निगाहें इन पर

इस चुनाव में बीजेपी सत्तारूढ़ दल टीएमसी के लिए बड़ी चुनौती बनकर उभरी है. (फाइल फोटो)

इस चुनाव में बीजेपी सत्तारूढ़ दल टीएमसी के लिए बड़ी चुनौती बनकर उभरी है. (फाइल फोटो)

वर्तमान समय की बात करें तो कम ही लोग जानते हैं कि नश्य शेख समुदाय के पास बड़ी संख्या में मतदाता हैं, जो इस साल के विधानसभा चुनावों में किसी भी राजनीतिक पार्टी को उत्तर बंगाल में लाभकारी स्थिति में डाल सकते हैं.

    कोलकाता. एक समुदाय के लोग जो जमींदार थे उन्‍होंने कोच राजबंशी के रूप में एक बार मोहम्‍मद बिन बख्तियार खिलजी के सैनिकों के खिलाफ जंग लड़ी थी. लेकिन बाद में ये समुदाय खिलजी के प्रभाव में आ गया और उनका साथ देने लगा. कोच राजबंशी ने मोहम्‍मद बिन बख्तियार खिलजी के साथ मिलकर बंगाल और बिहार के पूर्वी भारतीय क्षेत्रों में विजय प्राप्त की और 12वीं शताब्दी में इस्लामी शासन ले आए. इसके बाद उत्‍तरी बंगाल के कई कोच, राजबंशी और पोलिया लोग इस्‍लाम में परिवर्तित हो गए. इसके बाद से उन्‍होंने अपने समुदाय का नाम नश्य शेख रख दिया.

    पश्चिम बंगाल सरकार के रिकॉर्ड के मुताबिक नश्य शेख समुदाय में इस समय बंगाल के सबसे दलित, वंचित, सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्ग के लोग आते हैं. ये आर्थिक रूप से काफी कमजोर हैं. यही नहीं बिहार के पूर्णिया जिले में भी इस समुदाय के काफी लोग हैं, जो उत्तर बंगाल के छह जिलों - कूच बिहार, जलपाईगुड़ी, दार्जिलिंग, उत्तर और दक्षिण दिनाजपुर और मालदा में रहते हैं. वे ज्यादातर खेतिहर मजदूर, काश्तकार, रिक्शा चालक, राजमिस्त्री, अकुशल श्रमिक, और कारीगर के रूप में काम कर रहे हैं. महिलाएं भी अपने परिवार को चलाने में सहायता के लिए खेतों में काम करती हैं.

    वर्तमान समय की बात करें तो कम ही लोग जानते हैं कि नश्य शेख समुदाय के बड़ी संख्या में मतदाता हैं, जो इस साल के विधानसभा चुनावों में किसी भी राजनीतिक पार्टी को उत्तर बंगाल में फायदा पहुंचा सकते हैं. यही कारण है कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने 16 दिसंबर को कूच बिहार में एक सार्वजनिक बैठक में विशेष रूप से उनका उल्लेख किया.

    News18 से बात करते हुए नश्य शेख उननयन मंच के सचिव गोलम नबी आज़ाद ने कहा, साल 2014 में, हमने नश्य विकास बोर्ड की स्‍थापना की जिससे हम कूच बिहार में अलिया विश्वविद्यालय के एक अन्य परिसर की स्थापना कर सकें. हमने राज्य के मुख्यमंत्री को अपना अनुरोध पहले ही भेज दिया है और हमें उम्मीद है कि यह जल्द ही पूर होगा. बता दें कि उत्‍तरी बंगाल में नश्य शेख समुदाय का वोट शेयर 13 से 15 प्रतिशत है. यही कारण है कि पश्चिम बंगाल चुनाव से पहले नश्य शेख समुदाय एक बार फिर चर्चा में आ गया है. यहां तक की ममता बनर्जी ने आश्‍वासन दिया है कि अगर वह सत्‍ता में वापसी करती है तो वह जल्‍द ही नाश्‍या विकास बोर्ड की मांगों को पूरा करने की कोशिश करेंगी.



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    कूच बिहार में हाल में ममता की सभा को देखें तो पता चलता है कि यहां की नौ विधानसभा सीटों में नाश्‍या समुदाय का वोट बैंक 9 प्रतिशत के करीब है, जबकि मुस्लिम मतदाता की उपस्थिति लगभग 22 प्रतिशत है. बता दें कि कूच बेहार की नौ विधानसभा सीटें हैं सीताई, सीतलकुची, माथाभांगा, कूच बिहार उत्तर, कूच बिहार दक्षिण, दिनहाटा, नताबाई, तुफानगंज और मैक्लिगंज हैं.undefined

    Tags: Mamta Banerjee, West bengal, West Bengal Assembly Election, West Bengal Assembly Election 2021

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